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Budaun News: रक्षाबंधन पर रोडवेज की व्यवस्था धड़ाम... भटकने को मजबूर हुईं बहनें
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जरियनपुर जाने के लिए बस के बाहर लगी यात्रियों की भीड़। संवाद
बदायूं। रक्षाबंधन पर भले ही मुफ्त में यात्रा की सौगात बहनों को मिली है, लेकिन लचर व्यवस्था से वह परेशान दिखीं। बस आते ही फुल होती रहीं और बच्चों के साथ आईं बहनें बसों में बमुश्किल बैठ सकीं। बसों की कमी देखने को मिली।
दोपहर बाद जब बहनें घरों से निकलीं तो रोडवेज बस अड्डे पर बसें ही नहीं मिलीं। बहनों को बसों के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। रोडवेज बस अड्डे, रोडवेज चौराहा, भामाशाह चौक और शहर के कई तिराहे-चौराहों पर बहनें बसों के लिए भटकती रहीं। सबसे ज्यादा परेशानी लंबे सफर पर जाने वाली बहनों को हुई। उन्हें एटा, कासगंज, आगरा और बरेली जाने के लिए बसें नहीं मिलीं। इससे बहनों को काफी दिक्कत झेलनी पड़ी।
बरेली व मथुरा के लिए शुरू में तो तीन-चार बसें रवाना कर दीं गईं। इसके बाद कहा गया कि बसें आएंगी तो बैठाया जाएगा। बहनों और अन्य यात्रियों को बसों के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। दोपहर बाद एटा, कासगंज, आगरा, बरेली, फर्रुखाबाद, दातागंज और कादरचौक मार्ग के यात्रियों को बसें तक नहीं मिलीं। देर शाम तक सैकड़ों यात्री रोडवेज चौराहे से लेकर भामाशाह चौक, इंदिरा चौक, दातागंज तिराहा, खेड़ा नवादा, कचहरी तिराहा और लालपुल तिराहे पर बसों का इंतजार करते रहे।
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रूट के हिसाब से बसें नहीं चला पाया रोडवेज प्रशासन
परिवहन निगम के पास 128 सरकारी व 32 अनुबंधित बसें चलाने का दावा किया गया, लेकिन जब यात्री उमड़े तो बसें ही नहीं मिलीं। अधिकारियों के पास इसका कोई जवाब नहीं था। यह कहकर यात्रियों को टरका दिया कि सभी रूटों पर बसों को भेजा गया है। जिस रूट पर सबसे ज्यादा सवारियां थीं उसी रूट पर सबसे कम बस थीं। बरेली और आगरा रूट पर सबसे ज्यादा सवारियां थीं और इस रूट का हाल यह था कि एक घंटे में बमुश्किल एक बस मिल पा रही थी। बस आते ही भर जा रही थी। लोगों को स्टैंडों पर एक एक घंटे बसों का इंतजार करना पड़ा।
डग्गामार वाहन चालकों ने की कमाई
सबसे ज्यादा बरेली मार्ग पर डग्गामार वाहन दौड़ते नजर आए। इसके अलावा बिसौली, अलापुर, उसावां, ककराला, कादरचौक, उझानी मार्ग पर भी डग्गामार वाहन हावी रहे। बरेली रूट पर चलने वाले वाहन चालकों ने रात में 100 से 150 रुपये प्रति सवारी तक वसूले।
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दोपहर बाद जब बहनें घरों से निकलीं तो रोडवेज बस अड्डे पर बसें ही नहीं मिलीं। बहनों को बसों के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। रोडवेज बस अड्डे, रोडवेज चौराहा, भामाशाह चौक और शहर के कई तिराहे-चौराहों पर बहनें बसों के लिए भटकती रहीं। सबसे ज्यादा परेशानी लंबे सफर पर जाने वाली बहनों को हुई। उन्हें एटा, कासगंज, आगरा और बरेली जाने के लिए बसें नहीं मिलीं। इससे बहनों को काफी दिक्कत झेलनी पड़ी।
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बरेली व मथुरा के लिए शुरू में तो तीन-चार बसें रवाना कर दीं गईं। इसके बाद कहा गया कि बसें आएंगी तो बैठाया जाएगा। बहनों और अन्य यात्रियों को बसों के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। दोपहर बाद एटा, कासगंज, आगरा, बरेली, फर्रुखाबाद, दातागंज और कादरचौक मार्ग के यात्रियों को बसें तक नहीं मिलीं। देर शाम तक सैकड़ों यात्री रोडवेज चौराहे से लेकर भामाशाह चौक, इंदिरा चौक, दातागंज तिराहा, खेड़ा नवादा, कचहरी तिराहा और लालपुल तिराहे पर बसों का इंतजार करते रहे।
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रूट के हिसाब से बसें नहीं चला पाया रोडवेज प्रशासन
परिवहन निगम के पास 128 सरकारी व 32 अनुबंधित बसें चलाने का दावा किया गया, लेकिन जब यात्री उमड़े तो बसें ही नहीं मिलीं। अधिकारियों के पास इसका कोई जवाब नहीं था। यह कहकर यात्रियों को टरका दिया कि सभी रूटों पर बसों को भेजा गया है। जिस रूट पर सबसे ज्यादा सवारियां थीं उसी रूट पर सबसे कम बस थीं। बरेली और आगरा रूट पर सबसे ज्यादा सवारियां थीं और इस रूट का हाल यह था कि एक घंटे में बमुश्किल एक बस मिल पा रही थी। बस आते ही भर जा रही थी। लोगों को स्टैंडों पर एक एक घंटे बसों का इंतजार करना पड़ा।
डग्गामार वाहन चालकों ने की कमाई
सबसे ज्यादा बरेली मार्ग पर डग्गामार वाहन दौड़ते नजर आए। इसके अलावा बिसौली, अलापुर, उसावां, ककराला, कादरचौक, उझानी मार्ग पर भी डग्गामार वाहन हावी रहे। बरेली रूट पर चलने वाले वाहन चालकों ने रात में 100 से 150 रुपये प्रति सवारी तक वसूले।

जरियनपुर जाने के लिए बस के बाहर लगी यात्रियों की भीड़। संवाद