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कछुआ चाल से गड्ढामुक्त नहीं हो पाएंगी सड़कें
अमर उजाला ब्यूरो/ बदायूं
Updated Fri, 19 May 2017 11:46 PM IST
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बदहाल सड़क से होकर गुजरते राहगीर।
- फोटो : Amar Ujala
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नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश सभी सड़को को गड्ढा मुक्त करने के लिए अफसरों को 15 जून तक का समय दिया लेकिन जिले में खराब और जर्जर सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का काम जिस सुस्ती से चल रहा है, उससे लगता नहीं कि महीने भर में यह काम हो पाएगा।
शासन के आदेश के बाद डीएम ने लोक निर्माण विभाग के अलावा मंडी, गन्ना विभाग, जिला पंचायत और आरईएस से सड़कों का सर्वे कराके कार्ययोजना उपलब्ध कराने के निर्देश प्रांतीय खंड के नोडल अधिकारी को दिये थे लेकिन अब भी सर्वे रिपोर्ट और कार्य योजना उपलब्ध नही कराई गई है। इस लापरवाही से जाहिर है कि 15 जून तक गड्ढा मुक्ति अभियान पूरा नही हो पाएगा। नतीजतन, जिले में लोगों को गड्ढों में ही चलना होगा।
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ये है लक्ष्य
लोक निर्माण विभाग ने गड्ढा मुक्ति के लिए सड़कों को चिह्नित कर लिया है। इसके मुताबिक, जिले में 651 किलोमीटर सड़कों को गड्ढा मुक्त किया जाना है। 445 किलोमीटर ध्वस्त सड़कों का नवीनीकरण होना है। 99 किलोमीटर कच्चे मार्ग पर सड़क का निर्माण करना है। लोक निर्माण के अधिशासी अभियंता केसी वर्मा का कहना है कि पीडब्ल्यूडी की ओर से जिले में लक्ष्य के अनुसार सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए 64.530 लाख रुपये की जरूरत है। इसके लिए शासन की ओर से अभी 12.99 लाख रुपये मिले हैं। फिलहाल इतनी धनराशि से गड्ढा मुक्त कराने के लिए उझानी, दातागंज, बिसौली, शेखूपुर साइड में कार्य चल रहा है, लेकिन पूरा पैसा मिलने पर ही लक्ष्य पूरा हो पाएगा। जिन विभागों ने रिपोर्ट नही भेजी है उनसे कहा गया है।
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ये है सड़कों की स्थिति
पुल पर हादसे को दावत दे रहे गड्ढे
उसावां। अकबरपुर के पास सोत नदी पर 20 वर्ष पहले बने पुल पर गहरे गड्ढे हादसे का सबब बने हुए हैं। क्षेत्रीय लोगों की ओर से कई बार पुल की मरम्मत की मांग की गई लेकिन टूटे पुल को देखने वाला कोई नहीं है, शायद बड़े हादसे का इंतजार है । 17 किलोमीटर लंबे उसावां- अटेना मार्ग पर अकबरपुर के पास सोत नदी है। इस पर 20 वर्ष पहले पूर्व मंत्री स्व. बनवारी सिंह ने पुल का निर्माण कराया था । देखरेख न होने की वजह से पुल पर गहरे गड्ढे हो गए हैं। जब से अटेना गंगा घाट पर पुल बना है तब से कायमगंज- कंपिल, सिबारा आदि क्षेत्रों की दूरी कम हो गई। अधिकतर लोग यहीं से आते-जाते हैं। दो पहिया वाहनों के साथ साथ चार पहिया और बड़े वाहन भी इसी रास्ते से निकल रहे है। जिनसे हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। प्रदीप कुमार, राजू, उदयवीर, चंद्रपाल, सुशील कुमार ने डीएम से पुल की मरम्मत कराए जाने की मांग की है।
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वैन में जर्जर मार्ग पर कीचड़ का अंबार
बिल्सी। विकास खंड अंबियापुर क्षेत्र के गांव वैन में पिछले लंबे से जर्जर पड़ी सड़क पर भरा हुए जलभराव एवं कीचड़ से ग्रामीण काफी दुखी हो चुके है। इसके कारण आए दिन लोग इस कीचड़ में गिरते रहते है। बावजूद इसके विकास खंड अंबियापुर के अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे है। गांव के विष्णु गोपाल सिंह, दुर्गपाल सिंह, सुखवीर सिंह, प्रमोद कुमार, सुधीर कुमार ने बताया कि गांव के सुनील कुमार चक्की वाले, केहर सिंह राणा एवं नरेश कुमार सिंह के आवास के सामने से गुजरने वाली सड़क मरम्मत के अभाव में काफी जर्जर हो गई है। इसमें कई माह से जलभराव की समस्या बन गई है। इससे इधर से लोगों का निकलना बंद हो गया है। जबकि यह गांव की मुख्य सड़क है। इसी तरह की गांव की अन्य सड़कों की हालत बनी हुई है।
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उसहैत में जी का जंजाल बने उखड़े मार्ग
उसहैत। क्षेत्र में जी का जंजाल बने हुए हैं उखड़े मार्ग। मुख्य मार्ग ककराला चौराहा से श्री कालसेन बाबा मंदिर तक और कटरा चौराहा से पक्के पुल तक रोड पूरी तरह टूटा पड़ा है। क्षेत्र के कई गांव के लोग उसहैत से रौता करीम नगर गोविंद नगला होते हुए उसावां-उसहैत से कटरा सहादतगंज तक उसहैत से म्याऊं तक इन सभी मार्गों से आते-जाते हैं, जो बदतर है। इससे गांव के समस्त ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार शिकायत के बाद भी इसे दुरुस्त नहीं कराया गया।
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राजथल से बहजोई रोड को मिलाने वाली सड़क जर्जर
इस्लामनगर। कस्बे के राजथल रोड से बहजोई रोड को मिलाने वाली सड़क का पिछले पांच सालों से बुरा हाल है। हालात ये है कि पिछले पांच सालों की सपा सरकार में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस तरफ नहीं देखा। यह सड़क बिसौली विधानसभा में पड़ती है और कस्बे के बाईपास का काम करती है। छोटे बड़े वाहनों का भारी चलन इस मार्ग पर रहता है। सैकड़ों की संख्या में वाहन इस मार्ग से निकलते हैं। यह मार्ग राजथल रोड से मढईया होते हुए अलेहपुर के पास बेहजोई रोड पर निकलता है। अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
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तीन किमी तक सड़क की परत ही गायब
कादरचौक। मैनपुरी को जोड़ने वाली रोड पर गंगपुर से कादरचौक तक गड्ढे ही गड्ढे हैं। अनेजा पेट्रोल पंप से तीन किमी तक सड़क की परत ही गायब है। सरकार के दावों की पोल खोलती रोड पर पूरे बदायूं तक गड्ढे ही गड्ढे है। जहां काम हुआ भी है वह भी एक महीने नहीं चलता है।
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शासन के आदेश के बाद डीएम ने लोक निर्माण विभाग के अलावा मंडी, गन्ना विभाग, जिला पंचायत और आरईएस से सड़कों का सर्वे कराके कार्ययोजना उपलब्ध कराने के निर्देश प्रांतीय खंड के नोडल अधिकारी को दिये थे लेकिन अब भी सर्वे रिपोर्ट और कार्य योजना उपलब्ध नही कराई गई है। इस लापरवाही से जाहिर है कि 15 जून तक गड्ढा मुक्ति अभियान पूरा नही हो पाएगा। नतीजतन, जिले में लोगों को गड्ढों में ही चलना होगा।
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ये है लक्ष्य
लोक निर्माण विभाग ने गड्ढा मुक्ति के लिए सड़कों को चिह्नित कर लिया है। इसके मुताबिक, जिले में 651 किलोमीटर सड़कों को गड्ढा मुक्त किया जाना है। 445 किलोमीटर ध्वस्त सड़कों का नवीनीकरण होना है। 99 किलोमीटर कच्चे मार्ग पर सड़क का निर्माण करना है। लोक निर्माण के अधिशासी अभियंता केसी वर्मा का कहना है कि पीडब्ल्यूडी की ओर से जिले में लक्ष्य के अनुसार सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए 64.530 लाख रुपये की जरूरत है। इसके लिए शासन की ओर से अभी 12.99 लाख रुपये मिले हैं। फिलहाल इतनी धनराशि से गड्ढा मुक्त कराने के लिए उझानी, दातागंज, बिसौली, शेखूपुर साइड में कार्य चल रहा है, लेकिन पूरा पैसा मिलने पर ही लक्ष्य पूरा हो पाएगा। जिन विभागों ने रिपोर्ट नही भेजी है उनसे कहा गया है।
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ये है सड़कों की स्थिति
पुल पर हादसे को दावत दे रहे गड्ढे
उसावां। अकबरपुर के पास सोत नदी पर 20 वर्ष पहले बने पुल पर गहरे गड्ढे हादसे का सबब बने हुए हैं। क्षेत्रीय लोगों की ओर से कई बार पुल की मरम्मत की मांग की गई लेकिन टूटे पुल को देखने वाला कोई नहीं है, शायद बड़े हादसे का इंतजार है । 17 किलोमीटर लंबे उसावां- अटेना मार्ग पर अकबरपुर के पास सोत नदी है। इस पर 20 वर्ष पहले पूर्व मंत्री स्व. बनवारी सिंह ने पुल का निर्माण कराया था । देखरेख न होने की वजह से पुल पर गहरे गड्ढे हो गए हैं। जब से अटेना गंगा घाट पर पुल बना है तब से कायमगंज- कंपिल, सिबारा आदि क्षेत्रों की दूरी कम हो गई। अधिकतर लोग यहीं से आते-जाते हैं। दो पहिया वाहनों के साथ साथ चार पहिया और बड़े वाहन भी इसी रास्ते से निकल रहे है। जिनसे हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। प्रदीप कुमार, राजू, उदयवीर, चंद्रपाल, सुशील कुमार ने डीएम से पुल की मरम्मत कराए जाने की मांग की है।
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वैन में जर्जर मार्ग पर कीचड़ का अंबार
बिल्सी। विकास खंड अंबियापुर क्षेत्र के गांव वैन में पिछले लंबे से जर्जर पड़ी सड़क पर भरा हुए जलभराव एवं कीचड़ से ग्रामीण काफी दुखी हो चुके है। इसके कारण आए दिन लोग इस कीचड़ में गिरते रहते है। बावजूद इसके विकास खंड अंबियापुर के अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे है। गांव के विष्णु गोपाल सिंह, दुर्गपाल सिंह, सुखवीर सिंह, प्रमोद कुमार, सुधीर कुमार ने बताया कि गांव के सुनील कुमार चक्की वाले, केहर सिंह राणा एवं नरेश कुमार सिंह के आवास के सामने से गुजरने वाली सड़क मरम्मत के अभाव में काफी जर्जर हो गई है। इसमें कई माह से जलभराव की समस्या बन गई है। इससे इधर से लोगों का निकलना बंद हो गया है। जबकि यह गांव की मुख्य सड़क है। इसी तरह की गांव की अन्य सड़कों की हालत बनी हुई है।
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उसहैत में जी का जंजाल बने उखड़े मार्ग
उसहैत। क्षेत्र में जी का जंजाल बने हुए हैं उखड़े मार्ग। मुख्य मार्ग ककराला चौराहा से श्री कालसेन बाबा मंदिर तक और कटरा चौराहा से पक्के पुल तक रोड पूरी तरह टूटा पड़ा है। क्षेत्र के कई गांव के लोग उसहैत से रौता करीम नगर गोविंद नगला होते हुए उसावां-उसहैत से कटरा सहादतगंज तक उसहैत से म्याऊं तक इन सभी मार्गों से आते-जाते हैं, जो बदतर है। इससे गांव के समस्त ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार शिकायत के बाद भी इसे दुरुस्त नहीं कराया गया।
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राजथल से बहजोई रोड को मिलाने वाली सड़क जर्जर
इस्लामनगर। कस्बे के राजथल रोड से बहजोई रोड को मिलाने वाली सड़क का पिछले पांच सालों से बुरा हाल है। हालात ये है कि पिछले पांच सालों की सपा सरकार में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस तरफ नहीं देखा। यह सड़क बिसौली विधानसभा में पड़ती है और कस्बे के बाईपास का काम करती है। छोटे बड़े वाहनों का भारी चलन इस मार्ग पर रहता है। सैकड़ों की संख्या में वाहन इस मार्ग से निकलते हैं। यह मार्ग राजथल रोड से मढईया होते हुए अलेहपुर के पास बेहजोई रोड पर निकलता है। अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
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तीन किमी तक सड़क की परत ही गायब
कादरचौक। मैनपुरी को जोड़ने वाली रोड पर गंगपुर से कादरचौक तक गड्ढे ही गड्ढे हैं। अनेजा पेट्रोल पंप से तीन किमी तक सड़क की परत ही गायब है। सरकार के दावों की पोल खोलती रोड पर पूरे बदायूं तक गड्ढे ही गड्ढे है। जहां काम हुआ भी है वह भी एक महीने नहीं चलता है।