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Budaun News: जल जीवन मिशन के नाम पर खोद दीं सड़कें, शुरू नहीं हुई जलापूर्ति
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जलजीवन मिशन के तहख्बनी खड़ी टंकी। संवाद
- फोटो : 1
ओरछी। जल जीवन मिशन के तहत ओरछी और बझेड़ा नूतन गांव में ओवरहेड टैंक अब तक बनकर तैयार नहीं हुए हैं, जबकि ओरछी में पाइपलाइन डालने के कारण सड़कें खुदी पड़ी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पैदल चलना मुश्किल है और मोटरसाइकिल से निकलना तो लगभग नामुमकिन हो गया है।
परमानंदपुर, सिसरका और खेड़ादास गांव में ओवरहेड टैंक बनकर तैयार है। पाइपलाइन भी बिछ चुकी है, लेकिन किसी भी घर में नल से पानी नहीं आ रहा। हैंडपंप का पानी पीला और दूषित है। ग्रामीणों का आरोप है कि ओरछी चौराहे पर स्थित 15 कोल्ड स्टोरेज और मटर प्लांटों का दूषित पानी जमीन में जा रहा है, जिससे भूजल दूषित हो रहा है। इसी कारण हैंडपंप का पानी पीला आ रहा है। इससे ग्रामीण विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। मजबूरी में पानी खरीदकर इस्तेमाल कर रहे हैं।
परमानंदपुर निवासी तिलोकी ने हैंडपंप चलाकर दिखाया तो पीला पानी निकला, कुछ देर रखने पर पानी ऐसा लगने लगा जैसे उसमें होली का रंग मिला हो। अंकित गुप्ता ने लोहे की बाल्टी में पानी भरा तो बाल्टी भी पीली हो गई। भोजराज ने हथेली पर पानी रखा तो हथेली ही पीली पड़ गई। चरणसिंह उर्फ भगत जी ने बताया कि 100 फुट बोरिंग कराने पर भी पीला पानी निकला। अब जानवरों को पिलाने पर वे भी बीमार हो रहे हैं।
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खेड़ादास गांव निवासी संजीव शर्मा और जयभगवान शर्मा ने बताया कि गांव में दो साल से ओवरहेड टैंक बनकर तैयार है, लेकिन पानी कब मिलेगा, किसी को नहीं पता। सड़कें तोड़कर छोड़ दी गई हैं, जिससे गिरते-पड़ते चलना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों से शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
टंकी में मरे दो दर्जन बंदर, सफाई के बाद भी नहीं आया पानी
परमानंदपुर में टंकी बनकर तैयार है लेकिन चालू नहीं हुई है। पिछले साल करीब दो दर्जन बंदर टंकी में घुसकर निकल नहीं पाए और भूख-प्यास से मर गए। टंकी ऊंची और गांव से दूर होने के कारण महीनों तक बदबू नहीं आई। क्रिकेट की गेंद टंकी में गिरने पर शवों का पता चला। पुलिस और वन विभाग ने शव निकलवाकर सफाई कराई। इसके बाद भी टंकी से पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी।
ओरछी, परमानंदपुर, खेड़ादास आदि गांवों में जल जीवन मिशन के तहत हो रहे कार्यों में स्थानीय आधार पर कुछ दिक्कतें हैं। जल्द ही उन्हें दूर करके जलापूर्ति शुरू कराई जाएगी।- अमित कुमार वर्मा, ईई, जल निगम, बदायूं
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परमानंदपुर, सिसरका और खेड़ादास गांव में ओवरहेड टैंक बनकर तैयार है। पाइपलाइन भी बिछ चुकी है, लेकिन किसी भी घर में नल से पानी नहीं आ रहा। हैंडपंप का पानी पीला और दूषित है। ग्रामीणों का आरोप है कि ओरछी चौराहे पर स्थित 15 कोल्ड स्टोरेज और मटर प्लांटों का दूषित पानी जमीन में जा रहा है, जिससे भूजल दूषित हो रहा है। इसी कारण हैंडपंप का पानी पीला आ रहा है। इससे ग्रामीण विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। मजबूरी में पानी खरीदकर इस्तेमाल कर रहे हैं।
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परमानंदपुर निवासी तिलोकी ने हैंडपंप चलाकर दिखाया तो पीला पानी निकला, कुछ देर रखने पर पानी ऐसा लगने लगा जैसे उसमें होली का रंग मिला हो। अंकित गुप्ता ने लोहे की बाल्टी में पानी भरा तो बाल्टी भी पीली हो गई। भोजराज ने हथेली पर पानी रखा तो हथेली ही पीली पड़ गई। चरणसिंह उर्फ भगत जी ने बताया कि 100 फुट बोरिंग कराने पर भी पीला पानी निकला। अब जानवरों को पिलाने पर वे भी बीमार हो रहे हैं।
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खेड़ादास गांव निवासी संजीव शर्मा और जयभगवान शर्मा ने बताया कि गांव में दो साल से ओवरहेड टैंक बनकर तैयार है, लेकिन पानी कब मिलेगा, किसी को नहीं पता। सड़कें तोड़कर छोड़ दी गई हैं, जिससे गिरते-पड़ते चलना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों से शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
टंकी में मरे दो दर्जन बंदर, सफाई के बाद भी नहीं आया पानी
परमानंदपुर में टंकी बनकर तैयार है लेकिन चालू नहीं हुई है। पिछले साल करीब दो दर्जन बंदर टंकी में घुसकर निकल नहीं पाए और भूख-प्यास से मर गए। टंकी ऊंची और गांव से दूर होने के कारण महीनों तक बदबू नहीं आई। क्रिकेट की गेंद टंकी में गिरने पर शवों का पता चला। पुलिस और वन विभाग ने शव निकलवाकर सफाई कराई। इसके बाद भी टंकी से पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी।
ओरछी, परमानंदपुर, खेड़ादास आदि गांवों में जल जीवन मिशन के तहत हो रहे कार्यों में स्थानीय आधार पर कुछ दिक्कतें हैं। जल्द ही उन्हें दूर करके जलापूर्ति शुरू कराई जाएगी।- अमित कुमार वर्मा, ईई, जल निगम, बदायूं