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Budaun News: दुष्कर्म पीड़िता ने रिपोर्ट का नहीं किया समर्थन, अभियुक्त दोषमुक्त
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बदायूं। अपर जिला सत्र एवं न्यायाधीश राजवीर सिंह की कोर्ट ने बहलाकर किशोरी को ले जाने और दुष्कर्म करने के आरोप के मामले में साक्ष्यों के अभाव में अभियुक्त सद्दाम हुसैन निवासी ग्राम बागरपुर थाना कुंवरगांव को दोषमुक्त कर दिया। मामले में अभियोजन पक्ष अभियुक्त पर लगाए आरोपों को साबित करने में विफल रहा। पीड़िता ने भी परिवादी की प्रथम सूचना रिपोर्ट का समर्थन नहीं किया।
थाना कुंवरगांव क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने थाने में तहरीर देकर कहा था कि पीड़िता के साथ उसकी शादी 2026 को हुई थी। हम दोनों से एक पुत्र हुआ। 18 दिसंबर 2020 को उसकी पत्नी को सद्दाम बहलाकर अपने साथ ले गया। मामले में पुलिस ने सद्दाम के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर ली थी।
पुलिस ने विवेचना कर कई गंभीर धाराओं में आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया। परिवादी ने मुख्य परीक्षा और प्रति परीक्षा में जो गवाही दी, उसमें काफी विरोधाभास था। वहीं पीड़िता ने गवाही में कहा कि उसके पति से संबंध अच्छे नहीं थे। वह अक्सर मारपीट किया करता है। वह सात माह की गर्भवती थी। पति से तंग आकर वह मायके चली गई थी।
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पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि अभियुक्त सद्दाम या अन्य कोई उसे पकड़कर नहीं ले गया था। न ही उसके साथ दुष्कर्म हुआ। कोर्ट ने पीड़िता की गवाही सहित अन्य साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद साक्ष्यों के अभाव में अभियुक्त को दोषमुक्त कर दिया।
कोर्ट ने परिवादी को न्यायालय में झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करने का दोषी माना है। कोर्ट ने कार्यालय लिपिक को परिवादी के विरुद्ध वाद दर्ज कराने का आदेश दिया है।
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थाना कुंवरगांव क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने थाने में तहरीर देकर कहा था कि पीड़िता के साथ उसकी शादी 2026 को हुई थी। हम दोनों से एक पुत्र हुआ। 18 दिसंबर 2020 को उसकी पत्नी को सद्दाम बहलाकर अपने साथ ले गया। मामले में पुलिस ने सद्दाम के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर ली थी।
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पुलिस ने विवेचना कर कई गंभीर धाराओं में आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया। परिवादी ने मुख्य परीक्षा और प्रति परीक्षा में जो गवाही दी, उसमें काफी विरोधाभास था। वहीं पीड़िता ने गवाही में कहा कि उसके पति से संबंध अच्छे नहीं थे। वह अक्सर मारपीट किया करता है। वह सात माह की गर्भवती थी। पति से तंग आकर वह मायके चली गई थी।
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पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि अभियुक्त सद्दाम या अन्य कोई उसे पकड़कर नहीं ले गया था। न ही उसके साथ दुष्कर्म हुआ। कोर्ट ने पीड़िता की गवाही सहित अन्य साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद साक्ष्यों के अभाव में अभियुक्त को दोषमुक्त कर दिया।
कोर्ट ने परिवादी को न्यायालय में झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करने का दोषी माना है। कोर्ट ने कार्यालय लिपिक को परिवादी के विरुद्ध वाद दर्ज कराने का आदेश दिया है।