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रानीखेत और आला हजरत एक्सप्रेस लौटीं
उझानी (बदायूं)।
Updated Mon, 22 Feb 2016 07:57 PM IST
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हरियाणा में आरक्षण के लिए चल रहे जाट आंदोलन की वजह से प्रभावित लंबी दूरी की ट्रेनों की वापसी शुरू हो गई है। मालगाड़ियों का भी रूट परिवर्तन होने से बरेली-कासगंज ब्रॉडगेज लाइन पर लोड बढ़ गया है। रद़्द होने के बाद आला हजरत एक्सप्रेस और रानीखेत एक्सप्रेस कासगंज के रास्ते काठगोदाम के लिए लौट गईं।
काठगोदाम से नई दिल्ली के लिए जाने वाली 15013 रानीखेत हरियाणा में उग्र चल रहे जाट आंदोलन की वजह से रास्ते में फंसी थी। उसे कासगंज के रास्ते बदायूं होकर बरेली से काठगोदाम के लिए भेजा गया। रानीखेत एक्सप्रेस अजमेर और जैसलमेर भी पहुंचती है। बरेली-अजमेर के बीच चलने वाली 14322 आला हजरत एक्सप्रेेस को भी कासगंज-बरेली लाइन से वापस निकाला गया है। स्टेशन अधीक्षक एसके यादव ने बताया कि दोनों ट्रेन गंतव्य तक पहुंच चुकी हैं।
फिलहाल अन्य ट्रेनों में से किसी और के इस रूट से पास होने की सूचना नहीं है लेकिन सूत्रों की मानें तो रेलवे लंबी दूरी की ट्रेनों को वैकल्पिक रास्ते से पास करा सकता है। दो दिन के अंदर चार मालगाड़ियां भी बरेली-कासगंज रूट से होकर पास की गईं। इनमें दो का रूट परिवर्तन किया गया था। बता दें कि साप्ताहिक रामनगर-आगरा एक्सप्रेस को छोड़ दें तो बरेली-कासगंज रूट पर दिन में अप और डाउन की चार सवारी गाड़ियां ही पास होती हैं। आंदोलन की वजह से अचानक ही इस रूट पर लोड बढ़ गया है।
काठगोदाम से नई दिल्ली के लिए जाने वाली 15013 रानीखेत हरियाणा में उग्र चल रहे जाट आंदोलन की वजह से रास्ते में फंसी थी। उसे कासगंज के रास्ते बदायूं होकर बरेली से काठगोदाम के लिए भेजा गया। रानीखेत एक्सप्रेस अजमेर और जैसलमेर भी पहुंचती है। बरेली-अजमेर के बीच चलने वाली 14322 आला हजरत एक्सप्रेेस को भी कासगंज-बरेली लाइन से वापस निकाला गया है। स्टेशन अधीक्षक एसके यादव ने बताया कि दोनों ट्रेन गंतव्य तक पहुंच चुकी हैं।
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फिलहाल अन्य ट्रेनों में से किसी और के इस रूट से पास होने की सूचना नहीं है लेकिन सूत्रों की मानें तो रेलवे लंबी दूरी की ट्रेनों को वैकल्पिक रास्ते से पास करा सकता है। दो दिन के अंदर चार मालगाड़ियां भी बरेली-कासगंज रूट से होकर पास की गईं। इनमें दो का रूट परिवर्तन किया गया था। बता दें कि साप्ताहिक रामनगर-आगरा एक्सप्रेस को छोड़ दें तो बरेली-कासगंज रूट पर दिन में अप और डाउन की चार सवारी गाड़ियां ही पास होती हैं। आंदोलन की वजह से अचानक ही इस रूट पर लोड बढ़ गया है।
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