{"_id":"670c1f2343174793070ca664","slug":"rama-refuses-to-come-to-ayodhya-bharata-returns-with-charan-paduka-badaun-news-c-123-1-sbly1006-127666-2024-10-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: राम का अयोध्या आने से इनकार, चरण पादुका लेकर लौटे भरत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: राम का अयोध्या आने से इनकार, चरण पादुका लेकर लौटे भरत
विज्ञापन
बिसौली में रामलीला का मंचन करते कलाकार। संवाद
बिल्सी। मेला मैदान में चल रही रामलीला में वृंदावन के कलाकारों ने राम-भरत मिलाप की लीला का मंचन किया।
मंचन में दिखाया गया कि अयोध्या में राजा दशरथ की मृत्यु होने के कारण चारों ओर शोक छा जाता है। वहीं राम, लक्ष्मण और जानकी मां सीता के अयोध्या से वनगमन के कारण भी प्रजा मायूस है। महल से लेकर झोंपड़ी तक सभी जगह सूनापन और अंधेरा कायम है।
गुरु वशिष्ठ से भरत कहते हैं कि उन्हें अयोध्या का सिंहासन नहीं चाहिए। मेरा कल्याण तो भैया राम की सेवा में है। इसके बाद तीनों माताओं को लेकर भरत अपने अनुज शत्रुघ्न के साथ श्रीराम को मनाने चित्रकूट पहुंचते हैं। यहां गंगा के किनारे राम-सीता व लक्ष्मण के साथ विराजमान मिलते हैं। इस बीच भरत वहां पहुंचते हैं और भगवान राम को देखते ही उनसे लिपट जाते हैं, रोने लगते हैं।
हाथ जोड़कर आग्रह करते हैं कि अयोध्या लौट चलो। राम-भरत मिलाप के इस मार्मिक दृश्य को देखकर सभी की आंखें भर आती हैं। भरत सहित माताएं, गुरुदेव सभी राम को मनाने की कोशिश करते हैं। राम के इनकार के बाद गुरु वशिष्ठ कहते हैं कि आप अपनी चरण पादुका भरत को सौंप दें, जिन्हें राजगद्दी पर रखकर भरत राज करेंगे। श्रीराम अयोध्या वापस लौटने से इनकार कर देते हैं तो भरत श्रीराम की चरण पादुका अपने सिर पर उठाकर अयोध्या लौट आते हैं।
विज्ञापन
भगवान राम ने खाए शबरी के जूठे बेर
बिसौली। जनता रामलीला के मंचन में दिखाया गया कि भगवान श्रीराम पंचवटी में माता जानकी को न पाकर विलाप करने लगते हैं। तब उन्होंने यह धरती राक्षस विहीन करने की प्रतिज्ञा की। रास्ते में जटायु घायल अवस्था में मिले और सारा वृत्तांत बताया। भगवान राम ने जटायु का उद्धार किया। उसके बाद शबरी के आश्रम में पहुंचे।
भगवान को शबरी ने बेर का भोग लगाया। शबरी भगवान को चखकर मीठे-मीठे बेर दे रही थी। भगवान राम उसे बड़े ही चाव से खा रहे थे। इसे देखकर लक्ष्मण कुछ समझ नहीं सके। तब भगवान ने शबरी के अंदर समाहित नवधा भक्ति की व्याख्या की और शबरी का उद्धार किया। मंचन के दौरान पुष्पेंद्र नाथ गर्ग, राम प्रकाश गुप्ता, राम अनुज कुमार शर्मा, श्रीकृष्ण गुप्ता, अमरदीप गर्ग, शिव कुमार शिब्बू, गौरी शंकर आदि मौजूद रहे। संवाद
विज्ञापन
मंचन में दिखाया गया कि अयोध्या में राजा दशरथ की मृत्यु होने के कारण चारों ओर शोक छा जाता है। वहीं राम, लक्ष्मण और जानकी मां सीता के अयोध्या से वनगमन के कारण भी प्रजा मायूस है। महल से लेकर झोंपड़ी तक सभी जगह सूनापन और अंधेरा कायम है।
गुरु वशिष्ठ से भरत कहते हैं कि उन्हें अयोध्या का सिंहासन नहीं चाहिए। मेरा कल्याण तो भैया राम की सेवा में है। इसके बाद तीनों माताओं को लेकर भरत अपने अनुज शत्रुघ्न के साथ श्रीराम को मनाने चित्रकूट पहुंचते हैं। यहां गंगा के किनारे राम-सीता व लक्ष्मण के साथ विराजमान मिलते हैं। इस बीच भरत वहां पहुंचते हैं और भगवान राम को देखते ही उनसे लिपट जाते हैं, रोने लगते हैं।
विज्ञापन
हाथ जोड़कर आग्रह करते हैं कि अयोध्या लौट चलो। राम-भरत मिलाप के इस मार्मिक दृश्य को देखकर सभी की आंखें भर आती हैं। भरत सहित माताएं, गुरुदेव सभी राम को मनाने की कोशिश करते हैं। राम के इनकार के बाद गुरु वशिष्ठ कहते हैं कि आप अपनी चरण पादुका भरत को सौंप दें, जिन्हें राजगद्दी पर रखकर भरत राज करेंगे। श्रीराम अयोध्या वापस लौटने से इनकार कर देते हैं तो भरत श्रीराम की चरण पादुका अपने सिर पर उठाकर अयोध्या लौट आते हैं।
विज्ञापन
भगवान राम ने खाए शबरी के जूठे बेर
बिसौली। जनता रामलीला के मंचन में दिखाया गया कि भगवान श्रीराम पंचवटी में माता जानकी को न पाकर विलाप करने लगते हैं। तब उन्होंने यह धरती राक्षस विहीन करने की प्रतिज्ञा की। रास्ते में जटायु घायल अवस्था में मिले और सारा वृत्तांत बताया। भगवान राम ने जटायु का उद्धार किया। उसके बाद शबरी के आश्रम में पहुंचे।
भगवान को शबरी ने बेर का भोग लगाया। शबरी भगवान को चखकर मीठे-मीठे बेर दे रही थी। भगवान राम उसे बड़े ही चाव से खा रहे थे। इसे देखकर लक्ष्मण कुछ समझ नहीं सके। तब भगवान ने शबरी के अंदर समाहित नवधा भक्ति की व्याख्या की और शबरी का उद्धार किया। मंचन के दौरान पुष्पेंद्र नाथ गर्ग, राम प्रकाश गुप्ता, राम अनुज कुमार शर्मा, श्रीकृष्ण गुप्ता, अमरदीप गर्ग, शिव कुमार शिब्बू, गौरी शंकर आदि मौजूद रहे। संवाद

बिसौली में रामलीला का मंचन करते कलाकार। संवाद