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पुरुषोत्तम मास में धार्मिक कार्य सर्वाधिक पुण्यदायक
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Updated Mon, 13 Jul 2015 12:03 AM IST
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पंडित भगवान दास पैलेस में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में रविवार को रामानुजाचार्य गोपालाचार्य त्रिदंडी महाराज ने लोगों को माता-पिता और गुरुओं का आदर करने की सलाह दी। कहा कि माता-पिता और गुरू को खुश रखने से सुख और शांति की प्राप्त होती है। पुरुषोत्तम मास में पुण्य करते रहें। इस महीना धार्मिक कार्य सर्वाधिक पुण्यदायक रहते हैं।
जगदगुरू रामानुजाचार्य गोपालाचार्य ने कहा कि मासों में सर्वश्रेष्ठ मास पुरुषोत्तम मास में धार्मिक कार्यों का जो आशीष प्राप्त होता है, वह किसी और महीना अर्जित नहीं हो सकता। पुरुषोत्तम मास को ही अधिक मास कहा जाता है। धार्मिक कार्यक्रम के आयोजन के जरिए पुण्य करने वाले पुरुषोत्तम मास में इंसान को अच्छे कार्य करने में संकोच नहीं करना चाहिए। भगवान में ध्यान लगाएं लेकिन उस दौरान मन एकाग्र होना चाहिए। मन में किसी तरह का कपट भी न हो। गोपालाचार्य ने लोगों को नेक रास्ते पर चलने का सार समझाया। बोले- गलत कार्य करने से जीवन में कभी आत्म संतुष्टि नहीं होती।
उन्होंने माता-पिता और गुरु को सर्वश्रेष्ठ बताया। कहा कि माता-पिता की सेचा से ही जीवन सफल होता है। गुरू समेत माता और पिता का दिल नहीं दुखाना चाहिए। पुरुषों में वहीं व्यक्ति पुरुषोत्तम है जो मर्यादित आचरण रख दूसरे की भलाई के बारे में भी सोचे। जगदगुरू ने कहा कि दूसरों के प्रति आदर भाव रखने वाले को भी आदर मिलता है। जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम यादव और पूर्व एमएलसी भारत सिंह यादव ने आरती में हिस्सा लिया। कथा में किशनचंद्र शर्मा, प्रवीण शर्मा, अवधेश शर्मा, अतुल गौड, शिवगोपाल, सुनील यादव, कृष्णगोपाल, परशुराम, धर्मेंद्र प्रधान और श्याम यादव आदि मौजूद थे।
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जगदगुरू रामानुजाचार्य गोपालाचार्य ने कहा कि मासों में सर्वश्रेष्ठ मास पुरुषोत्तम मास में धार्मिक कार्यों का जो आशीष प्राप्त होता है, वह किसी और महीना अर्जित नहीं हो सकता। पुरुषोत्तम मास को ही अधिक मास कहा जाता है। धार्मिक कार्यक्रम के आयोजन के जरिए पुण्य करने वाले पुरुषोत्तम मास में इंसान को अच्छे कार्य करने में संकोच नहीं करना चाहिए। भगवान में ध्यान लगाएं लेकिन उस दौरान मन एकाग्र होना चाहिए। मन में किसी तरह का कपट भी न हो। गोपालाचार्य ने लोगों को नेक रास्ते पर चलने का सार समझाया। बोले- गलत कार्य करने से जीवन में कभी आत्म संतुष्टि नहीं होती।
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उन्होंने माता-पिता और गुरु को सर्वश्रेष्ठ बताया। कहा कि माता-पिता की सेचा से ही जीवन सफल होता है। गुरू समेत माता और पिता का दिल नहीं दुखाना चाहिए। पुरुषों में वहीं व्यक्ति पुरुषोत्तम है जो मर्यादित आचरण रख दूसरे की भलाई के बारे में भी सोचे। जगदगुरू ने कहा कि दूसरों के प्रति आदर भाव रखने वाले को भी आदर मिलता है। जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम यादव और पूर्व एमएलसी भारत सिंह यादव ने आरती में हिस्सा लिया। कथा में किशनचंद्र शर्मा, प्रवीण शर्मा, अवधेश शर्मा, अतुल गौड, शिवगोपाल, सुनील यादव, कृष्णगोपाल, परशुराम, धर्मेंद्र प्रधान और श्याम यादव आदि मौजूद थे।
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