‘दाम नहीं तो काम नहीं’

badaun Updated Fri, 03 Apr 2015 11:55 PM IST
" Prices do not work '
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‘दाम नहीं तो काम नहीं’ के फार्मूले को लेकर बीते चार दिन से आंदोलन की राह पर चल रहे शेखूपुर चीनी मिल के कर्मचारियों की दुश्वारियां बढ़ती जा रही हैं। मिल के अंदर एकजुट होकर बैठे इन कर्मचारियों का साफ कहना है कि जब तक उन्हें वेतन और अन्य देयकों का भुगतान नहीं हो जाता वह काम पर नहीं लौटेंगे। हालांकि मिल के जीएम राजीव जैन ने उनसे बात की और बीच का रास्ता निकालने की कहकर काम पर लौट आने का कहा। कर्मचारियों ने दो टूक शब्दों में कह दिया कि वह चार माह से उन्हें गुमराह करते आ रहे हैं किंतु वह अब उनकी किसी बात पर मानने को तैयार नहीं हैं। कर्मचारियों ने नारे भी लगाए।
मिल के बाहर गन्ने से भरे तमाम ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी हुईं हैं। गन्ने की तौल का काम पीक पर है। इसी बीच मिल के कर्मचारियों ने लंबे समय से वेतन नहीं मिलने और अन्य देयकों का भुगतान नहीं मिलने पर बीते 29 मार्च 2015 से आंदोलित हैं। मिल परिसर में ही दरी डालकर बैठे सभी कर्मचारियों का कहना है कि वर्ष 2014 में 22 मार्च से अब तक उन्हें मात्र आठ-नौ हजार रुपये ही वेतन के तौर पर दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि वेतन और अन्य देयकों के भुगतान को लेकर वह मिल प्रशासन से लगातार वार्ता करते रहे हैं किंतु मिल के जीएम उन्हें हमेशा ही यह कहकर गुमराह करते आए हैं कि वह शासन से बात कर रहे हैं। जल्द उनके देयकों का भुगतान कर दिया जाएगा। आरोप है कि मिल के कुछ अधिकारियों ने वेतन और अन्य मदों में भुगतान भी ले लिया है।
मौके पर पहुंचे जीएम राजीव जैन के सामने ही इन आक्रोशित कर्मचारियों ने कहा कि वह अब बातों में नहीं आने वाले हैं। उन्हें परिवार के पालन-पोषण को वेतन चाहिए। जब उन्हें वेतन मिल जाएगा, तो वह काम पर लौट आएंगे। बोले, वेतन न मिलने के कारण एक कर्मचारी की हालत नाजुक है और वह जिला अस्पताल में इलाज करा रहा है फिर भी मिल प्रशासन को शर्म नहीं आ रही है। हर कर्मचारी के सामने आर्थिक दिक्कतें खड़ीं हो गईं हैं। कर्मचारियों की दो टूक सुनने के बाद जीएम अपने ऑफिस चले गए। इस मौके पर गजेंद्र सिंह, सतेंद्र सिंह, चैतन्यवीर, नौबत, रामवृक्ष, विशन चंद्र अग्रवाल, असरार अहमद,महेश पाल, जोगराज,शफी अहमद, महेश पाल, केशो चौबे आदि सैकड़ों कर्मचारी थे।
निकाल रहे हैं बीच का रास्ता
चीनी मिल के जीएम राजीव जैन ने कर्मचारियों से बात करते हुए कहा था कि वह बीच का रास्ता निकाल रहे हैं, ताकि कर्मचारी काम पर लौट आएं।
...खुद ही बता दें कौन सा है बीच का रास्ता
कई माह से वेतन नहीं मिलने से परेशान कर्मचारियों ने जीएम से सीधे संवाद करते हुए पूछा था कि वो ही बता दें कि बीच का रास्ता कौन सा है? जिससे उन्हें वेतन मिल जाए और वह काम पर लौट आएं। तब जीएम कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके।

जीएम के चहेते को भी
सुर्नाइं खरी-खोटी
हुआ यूं जब जीएम राजीव जैन कर्मचारियों से बात कर रहे थे, तभी उनके साथ मौजूद एक व्यक्ति ने कहा कि कर्मचारी खुद बीच का रास्ता निकाल लें। कर्मचारी उसकी बातों को गौर से सुन रहे थे, जैसे ही जीएम वहां से चले तैसे ही कर्मचारियों ने जीएम के चहेते को पकड़ लिया। कर्मचारियों ने उसे खूब खरी-खोटी सुनाईं। मौके की नजाकत को भांपकर वह चुपचाप खिसक लिया।
मर चुके हैं तीन-चार कर्मचारी
आंदोलित कर्मचारियों ने बताया कि महीनों तक वेतन नहीं मिलने और उनके फंड, ग्रेच्युटी आदि से धनराशि नहीं मिलने के कारण मिल में काम करने वाले कर्मचारी रामस्वरूप, रामचरन, श्रीचंद्र और रामाशंकर का पूर्व में निधन हो चुका है। इन सब की बीमारी के चलते मौत हुई थी। इलाज को पैसे नहीं थे। एक कर्मचारी गनेश राम इस समय जिला अस्पताल में भर्ती हैं।

शेखूपुर चीनी मिल के कर्मचारियों को कई चिंताएं घेरे हैं। अब उनके और परिवार के सामने दो वक्त की रोटी जुटाना भी कठिन हो रहा है। कुछ कर्मचारी तो इस बात को लेकर चिंता के सागर में डूबे हैं कि इसी माह उनकी बेटियों की शादी होनी है, लेकिन पैसे का अभी इंतजाम नहीं हुआ है। उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि वह किस तरह उनके हाथ पीले करेंगे।
शेखूपुर सहकारी चीनी मिल में सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी कार्यरत हैं। इन दिनों वह कई माह से वेतन न मिलने पर कार्य बहिष्कार कर रहे हैं। मिल के अंदर ही दरी डालकर बैठे कर्मचारियों के चेहरों पर उदासी छाई है। लगभग सभी कर्मचारी इस बात को लेकर दुखी दिखे कि जब वेतन ही नहीं मिल रहा है, तो उनकी और परिवार की नैया कैसे पार होगी। कई कर्मचारियों से बात की गई, तो उन्होंने अपने और परिवार के दर्द को बयां किया।
कर्मचारी शफी अहमद, महेश पाल, कैशो चौबे ने बताया कि उनकी बेटियों की शादी इसी माह की 15 तारीख को है। मिल से कोई पैसा नहीं मिला है। फंड से पैसा लेने को प्रार्थनापत्र दे दिया, अभी तक कुछ हाथ नहीं आया है। धन के अभाव में सामान नहीं खरीदा है। भगवान सिंह ने बताया कि इलाज तक को पैसे नहीं हैं। कई कर्मी बोले, वेतन न मिलने के कारण वह अपने घरों को भी नहीं जा रहे हैं। तमाम कर्मचारी जिले से बाहर के हैं। नया शैक्षिक सत्र भी शुरू हो गया है। बच्चों का एडमीशन कैसे होगा? किताबें कहां से आएंगी? उनकी समझ में नहीं आ रहा। दुकानदारों ने भी उधार देना बंद कर दिया है। किसी के आगे हाथ फैलाने से भी बात नहीं बन रही।

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