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पुलिस लाइंस चौराहा बना सवारियां भरने का अड्डा
ब्यूरो /बदायूं
Updated Mon, 29 Aug 2016 11:01 PM IST
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शहर की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सक्रियता के साथ काम रहे एसएसपी सुनील सक्सेना के काम को टै्रफिक पुलिस बट्टा लगा रही है। शहर के पुलिस लाइंस चौराहा डग्गामार वाहनों को सवारी बैठाने का अड्डा बनता जा रहा है। इससे चौराहा पर अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है।
शहर के पुलिस लाइंस चौराहा पर दो हाईवे मिलते हैं। इसमें मुरादाबाद-फर्रुखाबाद हाईवे और बरेली मथुरा हाईवे समेत चार हाईवे को जोड़ता है। इस वजह से इस पर भारी वाहनों का आवागमन भी अधिक रहता है। साथ ही रोडवेज और प्राइवेट बस अड्डे के लिए आने जाने वाली बसों का आवागमन अधिक रहता है। इस वजह से चंद मिनटों की लापरवाही से यहां पर जाम भी लग जाता है। शहर को जाम से मुक्त कराने के लिए एसएसपी सुनील सक्सेना की ओर से लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। बावजूद इसके पुलिस लाइंस चौराहा पर डग्गामार वाहन चार से छह की संख्या में एकत्रित होकर सवारियों को बैठाते हैं। इससे जाम की स्थिति बन जाती है। कई बार स्थिति मारपीट तक पहुंच जाती है। यह सब ट्रैफिक पुलिस के संरक्षण में होता है। ऐसा इसलिए है कि चौराहा पर तैनात होने वाले ट्रैफिक पुलिसकर्मी और होमगार्ड उन वाहनों से चौराहा से हटाने की जरूरत नहीं समझते हैं। साथ ही उन वाहनों से पांच सौ रुपये प्रतिमाह के हिसाब से वसूली भी की जाती है। इस पर लगाम लगे बिना शहर को जाम के जंजाल से मुक्त नहीं किया जा सकता है।
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शहर के पुलिस लाइंस चौराहा पर दो हाईवे मिलते हैं। इसमें मुरादाबाद-फर्रुखाबाद हाईवे और बरेली मथुरा हाईवे समेत चार हाईवे को जोड़ता है। इस वजह से इस पर भारी वाहनों का आवागमन भी अधिक रहता है। साथ ही रोडवेज और प्राइवेट बस अड्डे के लिए आने जाने वाली बसों का आवागमन अधिक रहता है। इस वजह से चंद मिनटों की लापरवाही से यहां पर जाम भी लग जाता है। शहर को जाम से मुक्त कराने के लिए एसएसपी सुनील सक्सेना की ओर से लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। बावजूद इसके पुलिस लाइंस चौराहा पर डग्गामार वाहन चार से छह की संख्या में एकत्रित होकर सवारियों को बैठाते हैं। इससे जाम की स्थिति बन जाती है। कई बार स्थिति मारपीट तक पहुंच जाती है। यह सब ट्रैफिक पुलिस के संरक्षण में होता है। ऐसा इसलिए है कि चौराहा पर तैनात होने वाले ट्रैफिक पुलिसकर्मी और होमगार्ड उन वाहनों से चौराहा से हटाने की जरूरत नहीं समझते हैं। साथ ही उन वाहनों से पांच सौ रुपये प्रतिमाह के हिसाब से वसूली भी की जाती है। इस पर लगाम लगे बिना शहर को जाम के जंजाल से मुक्त नहीं किया जा सकता है।
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