फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Police kept fabricated false stories to save Sagar, arguments broke out in court

सागर को बचाने की खातिर झूठी कहानियां गढ़ती रही पुलिस, कोर्ट में धड़ाम हुई दलीलें

Tue, 02 Nov 2021 12:28 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 02 Nov 2021 12:28 AM IST
विज्ञापन
Police kept fabricated false stories to save Sagar, arguments broke out in court
बदायूं। छात्रा के अपहरण और कई दिन तक बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म मामले में पुलिस ने तत्कालीन बसपा विधायक योगेंद्र सागर को बचाने की काफी कोशिश की, लेकिन पुलिस विवेचना की झोल में ही गले का फंदा तैयार हो गया। पुलिस ने योगेंद्र को बचाने के लिए कई झूठी कहानियां गढ़ीं, लेकिन यह काम नहीं आईं। योगेंद्र सागर ने अपने पक्ष में तत्कालीन एसओ अल्लाहबख्श और महिला दरोगा अक्षरा चौधरी को पेश किया। इनके आपसी बयान ही बेमेल साबित हो गए।
विज्ञापन

छात्रा का अपहरण 19 अप्रैल 2008 को हुआ था। पुलिस ने 17 मई को उसे मुजफ्फरनगर स्टेशन से बरामद कर लिया। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि छात्रा की शमी उर्फ रोहित शर्मा से कॉल पर बात होती थी। उसी के बुलाने पर वह मुजफ्फरनगर गई थी। वहां छात्रा ने शमी के साथ निकाह भी कर लिया था। तत्कालीन एसओ अल्लाह बख्श ने कोर्ट को बताया कि उनको छात्रा के मुजफ्फरनगर स्टेशन पर होने की खबर मोबाइल कॉल पर मिली थी। दूसरी ओर महिला दरोगा अक्षरा चौधरी का कहना था कि सूचना मुखबिर से मिली थी। पुलिस ने यह भी दावा किया कि जब वह बदायूं से मुजफ्फरनगर स्टेशन पहुुंचे तो छात्रा बुर्का पहने स्टेशन पर खड़ी थी।
विज्ञापन

यहां गौर करने वाली बात यह है कि पुलिस अब तक न तो शमी उर्फ रोहित शर्मा का पता लगा सकी है और न ही वह बुर्का ही कोर्ट में दाखिल किया गया जो बरामदगी के वक्त छात्रा पहने हुए थी। बदायूं से मुजफ्फरनगर की करीब 280 किमी दूरी तय करने में छह घंटे का वक्त लगता है। यहां पर सवाल यह भी है कि छात्रा लगातार छह घंटे तक मुजफ्फरनगर स्टेशन पर एक ही जगह खड़ी रही। इसके साथ ही अगर शमी ने छात्रा के साथ निकाह किया था तो तेरह साल की लंबी सुनवाई के दौरान एक बार भी शमी सामने क्यों नहीं आया। लंबी सुनवाई के दौरान पुलिस निकाहनामा भी दाखिल नहीं कर सकी। बिना कप्तान के लिखित आदेश के पुलिस ने दूसरे जिले में दबिश कैसे दी, इसका जवाब भी विवेचक नहीं दे सके। पुलिस विवेचना के झोल और विरोधाभासी बयानों ने न्याय की राह को और भी आसान कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

विधायक और पुलिसवालों की गवाही कराई पर सागर के काम न आई
अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के मामले में सजा से बचने के लिए योगेंद्र सागर ने सभी जतन किए, लेकिन इसके साथ ही उस पर कानून का शिकंजा कसता हुआ चला गया। मामले में पिछले साल योगेंद्र सागर की ओर से बिल्सी विधायक आरके शर्मा, तत्कालीन थानेदार अल्लाहबख्श और महिला दरोगा अक्षरा चौधरी ने भी कोर्ट में पेश होकर गवाही दी। बिल्सी विधायक आरके शर्मा ने नारी निकेतन में पीड़िता से घटनाक्रम के दिनों में अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए कोर्ट को बताया कि वह पीड़िता से नारी निकेतन में मिले थे। उस वक्त पीड़िता ने कहा कि योगेंद्र सागर मामले में शामिल नहीं हैं। वह स्वस्थ लग रही थी। उसने सागर पर कोई आरोप नहीं लगाया। गौर करने वाली बात यह है कि 2008 में जब छात्रा के साथ वारदात हुई थी उस वक्त योगेंद्र सागर बिल्सी से बसपा विधायक और आरके शर्मा बरेली की आंवला सीट से बसपा विधायक थे। घटनाक्रम के दिनों में एक जातीय संगठन के प्रतिनिधिमंडल के साथ शर्मा नारी निकेतन जाकर पीड़िता से मिले थे। कोर्ट ने शर्मा के दावे के बाद नारी निकेतन से मुलाकात करने वालों की सूची भी तलब की। नारी निकेतन की अधीक्षिका की भी गवाही कराई गई। इन बातों में कई ऐसी झोल सामने आईं जिनसे केस का रुख सागर के पक्ष में जाने की बजाय पीड़ित के हक में चला गया। इसी तरह से अल्लाहबक्श और अक्षरा चौधरी ने भी योगेंद्र के पक्ष में गवाही दी थी। खास बात यह रही कि परिवाद केस में कोर्ट ने इनमें से किसी को तलब भी नहीं किया था। आरोपी पक्ष की ओर से ही इन्हें पेश किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed