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Budaun News: डीजल की खरीदारी दिखाकर रखरखाव के बजट में खेल
Fri, 05 May 2023 01:40 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Fri, 05 May 2023 01:40 AM IST
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बदायूं। सीएचसी-पीएचसी पर लगे जनरेटर भले ही न चलाए जा रहे हों, लेकिन एमओआइसी रखरखाव के बजट से ही तेल की खरीदारी कर बिल बना रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सीएचसी-पीएचसी पर इन्वर्टर लगवाने के बाद डीजल का बजट देना ही बंद कर दिया था। इसके बाद भी इमरजेंसी सेवा के नाम पर जनरेटर चलाए जाने की बात कहते हुए तेल के नाम पर खेल किया जा रहा है।
जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बिजली जाने के बाद मरीज और स्टाफ की दिक्कतों को देखते हुए जनरेटर लगवाए गए। सीएचसी पर 25 केवीए के जनरेटर लगे तो सभी को डीजल के लिए भरपूर बजट दिया जाता था। ढाई साल पहले वहां इन्वर्टर लगाने के बाद डीजल का बजट बंद कर दिया गया तो सीएचसी-पीएचसी के स्टाफ ने डीजल के नाम पर खेल बंद नहीं किया। कभी एक्सरे तो कभी अन्य जांचों के नाम पर वह कागजों में लगातार जनरेटर को चलाते रहे, जबकि हकीकत यह है कि सीएचसी पर कभी जनरेटर चलते ही नहीं हैं। वहां बिजली जाने के बाद एक्सरे तक नहीं किए जाते हैं।
हालांकि एमओआइसी अपने स्तर से तेल की खरीद की बात कर रहे हैं, लेकिन सीएचसी से आने वाले बिल को देखकर अधिकारी भी हैरत में हैं। कुछ जगह सीएचसी के रखरखाव के लिए मिलने वाले बजट से ही तेल की खरीद दिखाई जा रही है। कादरचौक में तो ढाई साल में साढ़े चार लाख रुपये डीजल की खरीद के नाम पर खर्च कर दिए गए, जहां महज पांच केवीए का ही जनरेटर चलता है। ऐसे में रखरखाव के बजट को डीजल के नाम खपाने पर अन्य कामों पर असर पड़ रहा है। अब सभी जगह डीजल के नाम पर दिखाई जा रही खरीदारी की जांच शुरू की जा रही है। सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय ने बताया कि जरूरत पड़ने पर एमओआइसी अपने स्तर से ही रखरखाव के बजट से डीजल खरीदते हैं, हालांकि इन्वर्टर लगने के बाद जनरेटर चलाने की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती है।
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जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बिजली जाने के बाद मरीज और स्टाफ की दिक्कतों को देखते हुए जनरेटर लगवाए गए। सीएचसी पर 25 केवीए के जनरेटर लगे तो सभी को डीजल के लिए भरपूर बजट दिया जाता था। ढाई साल पहले वहां इन्वर्टर लगाने के बाद डीजल का बजट बंद कर दिया गया तो सीएचसी-पीएचसी के स्टाफ ने डीजल के नाम पर खेल बंद नहीं किया। कभी एक्सरे तो कभी अन्य जांचों के नाम पर वह कागजों में लगातार जनरेटर को चलाते रहे, जबकि हकीकत यह है कि सीएचसी पर कभी जनरेटर चलते ही नहीं हैं। वहां बिजली जाने के बाद एक्सरे तक नहीं किए जाते हैं।
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हालांकि एमओआइसी अपने स्तर से तेल की खरीद की बात कर रहे हैं, लेकिन सीएचसी से आने वाले बिल को देखकर अधिकारी भी हैरत में हैं। कुछ जगह सीएचसी के रखरखाव के लिए मिलने वाले बजट से ही तेल की खरीद दिखाई जा रही है। कादरचौक में तो ढाई साल में साढ़े चार लाख रुपये डीजल की खरीद के नाम पर खर्च कर दिए गए, जहां महज पांच केवीए का ही जनरेटर चलता है। ऐसे में रखरखाव के बजट को डीजल के नाम खपाने पर अन्य कामों पर असर पड़ रहा है। अब सभी जगह डीजल के नाम पर दिखाई जा रही खरीदारी की जांच शुरू की जा रही है। सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय ने बताया कि जरूरत पड़ने पर एमओआइसी अपने स्तर से ही रखरखाव के बजट से डीजल खरीदते हैं, हालांकि इन्वर्टर लगने के बाद जनरेटर चलाने की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती है।
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