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UP: बदायूं मेडिकल कॉलेज में मरीज ने चौथी मंजिल से कूदकर दी जान, पिता बोले- रातभर तड़पा बेटा, नहीं मिली दवा
Fri, 06 Dec 2024 11:50 AM IST
मुकेश कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 06 Dec 2024 11:50 AM IST
सार
बदायूं के राजकीय मेडिकल कॉलेज में दिल दहला देने वाली घटना हुई है। चौथी मंजिल पर बने टीबी वार्ड की खिड़की से एक मरीज नीचे कूद गया, जिससे उसकी मौत हो गई। पिता ने स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
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सुभाष का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बदायूं के राजकीय मेडिकल कॉलेज में मरीज ने चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। शुक्रवार सुबह हुई घटना से मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मच गया। मृतक के पिता ने स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बताया जा रहा है कि घटना के समय प्राचार्य व सीएमएस दोनों ही नदारद रहे। घटना से कॉलेज की व्यवस्था पर फिर सवालिया निशान लग रहे हैं।
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संभल जिले के जुनावई थाना क्षेत्र के गांव हथिया वली निवासी सुभाष (30 वर्ष) टीबी से ग्रसित थे। वह मेडिकल कॉलेज की चौथी मंजिल पर बने टीबी वार्ड में भर्ती थे। शुक्रवार सुबह उन्होंने चौथी मंजिल से छलांग लगा दी, जिससे वह प्रथम तल की पक्की जमीन पर आकर गिर गए। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। सूचना पर पहुंची थाना पुलिस ने शव पोस्टमार्टम को भेजा है।
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परिजनों ने लगाया इलाज में लापरवाही का आरोप
मेडिकल कॉलेज में मरीज के चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या की घटना शुक्रवार की सुबह सात बजे की है। घटना के समय उसके पिता दवा लेने गए थे। इसी दौरान युवक ने खिड़की से छलांग लगा दी थी। पिता ने स्टाफ पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है।
मृतक के किशनलाल ने आरोप लगाया कि बेटे की सांस फूल रही थी। डॉक्टर ने दवाई नहीं दी। रातभर परेशान रहा। सुबह करीब साढ़े सात बजे वह इमरजेंसी में दवाई लेने गए। इसी दौरान बेटा खिड़की से कूद गया।
प्रभारी सीएमएस ने दी यह दलील
प्रभारी सीएमएस डॉक्टर ज्ञानेंद्र यादव ने बताया कि रात में टीबी वार्ड में एक मरीज की मौत हो गई थी। उसे देखकर वह घबरा गया, जिससे उसकी सांस फूलने लगी। स्टाफ ने उसे इंजेक्शन लगाए थे। दवाई भी दी। सुबह जब मरीज के पिता काउंटर पर दवाई लेने गए, तभी मरीज ने खिड़की धक्का देकर खोला और नीचे कूद गया।
पहले भी खिड़की से कूदकर मरीज कर चुका है आत्महत्या
कोरोना काल में भी एक मरीज ने खिड़की से कूदकर आत्महत्या की थी। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने खिड़कियों को ठीक कराने की जहमत नहीं उठाई। इसी वजह से एक बार फिर घटना सामने आई है। मेडिकल कॉलेज लगातार विवादों के घेरे में है। बच्ची की मौत के मामले में कार्रवाई न होना लापरवाही को उजागर कर रहा है। बच्ची की मौत के मामले में तीसरी जांच चल रही है।
प्रभारी सीएमएस डॉक्टर ज्ञानेंद्र यादव ने बताया कि रात में टीबी वार्ड में एक मरीज की मौत हो गई थी। उसे देखकर वह घबरा गया, जिससे उसकी सांस फूलने लगी। स्टाफ ने उसे इंजेक्शन लगाए थे। दवाई भी दी। सुबह जब मरीज के पिता काउंटर पर दवाई लेने गए, तभी मरीज ने खिड़की धक्का देकर खोला और नीचे कूद गया।
पहले भी खिड़की से कूदकर मरीज कर चुका है आत्महत्या
कोरोना काल में भी एक मरीज ने खिड़की से कूदकर आत्महत्या की थी। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने खिड़कियों को ठीक कराने की जहमत नहीं उठाई। इसी वजह से एक बार फिर घटना सामने आई है। मेडिकल कॉलेज लगातार विवादों के घेरे में है। बच्ची की मौत के मामले में कार्रवाई न होना लापरवाही को उजागर कर रहा है। बच्ची की मौत के मामले में तीसरी जांच चल रही है।