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पंखियानगला में आग ने झुलसाई जिंदगी
Ujani
Updated Fri, 15 May 2015 07:50 PM IST
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कछला से सटे पंखिया नगला गांव में शुक्रवार सुबह दक्षिणी छोर पर झोपड़ी से उठी चिंगारी ने विकराल रूप धारण कर लिया। दर्जनों घर समेत सौ से अधिक झोपड़ियां जल गईं। पूरे गांव में हाहाकार मच गया। आग पर काबू पाने के लिए पुलिस को बदायूं और कासगंज से दमकल बुलानी पड़ीं। आग पर काबू पाने के लिए दोनों जिलों की पुलिस ने भी मशक्कत की। एसडीएम सदर प्रदीप कुमार ने मौका मुआयना कर पीड़ितों की सूची बनवाई। राजस्व विभाग का अनुमान है कि करीब 20 लाख का नुकसान हो गया है।
गंगा किनारे कासगंज वाले छोर पर बसे कछला नगर पंचायत के वार्ड नंबर-तीन में आग की पहली चिंगारी दक्षिण की ओर इसरार के घर से फूटी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप लेकर ज्यादातर घरों और झोपड़ियों को चपेट में ले लिया। एक-एक करके एक सौ से अधिक झोपड़ियां जल गईं। इनमें कुछेक का पशुशाला और ज्यादातर झोपड़ीनुमा आशियाने थे। ग्रामीणों ने खुद भी आग पर काबू पाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पाई। कछला चौकी इंचार्ज मानपाल सिंह ने बदायूं और कासगंज पुलिस से संपर्क करके दो दमकल बुलवा लीं। ग्रामीणों ने पंपसेट चलाकर भी आग बुझाने का प्रयास किया।
दमकलों को भी आग पर काबू पाने में करीब चार घंटा लगे लेकिन तब तक ज्यादातर घरों में अनाज, रोजमर्रा इस्तेमाल का सामान और नकदी आदि जलकर स्वाहा हो चुकी थी। कासगंज जिले से सोरों कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। सोरों पुलिस ने भी ग्रामीणों की मदद की। राजस्व कर्मियों की टीम के साथ पहुंचे एसडीएम सदर प्रदीप कुमार ने पीड़ित परिवारों के सदस्यों से जानकारी हासिल की। उन्होंने राजस्व निरीक्षक जुगेंद्रपाल सिंह की अगुवाई में लेखपाल ओमबाबू नागेंद्र और वीरेंद्र सिंह से पीड़ितों परिवारों की सूची भी तैयार कराई। लेखपाल ओमबाबू ने बताया कि दर्जनों घरों समेत 105 झोपड़ियां आग की भेंट चढ़ी हैं। नुकसान भी करीब 20 लाख रुपये का आंका गया है। एसडीएम ने बताया कि पीड़ित परिवारों के सदस्यों को तहसील प्रशासन की ओर से खाने के पैकेट भी वितरित कराए गए हैं।
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अग्निपीड़ित परिवारों की सूची
इसरार, अमरुद्दीन, नवी अहमद, मिसवाह वली, मुशर्रफ, इसहाक, रसूल अहमद, जहीरुल, गट्अे, मोहम्मद हसन, नकसर अली, मोहम्मद कलीम, अमीर हसन, उमर खांन, तसवीर, चमन, शमसाद, जुने अली, शाहिदा पत्नी अवरार, सलीम, नवारुन पत्नी रलीउद्दीन, नियामत, बालकिशन, जान मोहम्मद, जरुन अहमद, खुश मोहम्मद, विकार, सूखे, इमरान, कपूरन पत्नी हिकमत, जमात अली, आसिफ हुसैन, इंताम हुसैन, निहालुद्दीन, भूरे और फतेह खां समेत 105 लोगों के नाम राजस्व विभाग की सूची में शामिल हैं।
पांच बार पंखियों पर भारी पड़ा जेठ का महीना
पिछले साल भी जेठ में आग ने मचाया था तांडव
उझानी (बदायूं)। आग वाले पंखियानगला के नाम से ज्यादातर जुबां पर रटा कछला नगर पंचायत का बार्ड नंबर-तीन के महिला-पुरुष कई साल से महज इसलिए परेशान हैं कि क्या उपाय करें जो आग के कोप से छुटकारा मिल जाए। जब भी आग लगी चपेट में आने वाले घरों की तादाद दो-चार नहीं बल्कि दर्जनों रही। खासकर जेठ का महीना पंखियों की किस्मत पर कुदरत का कहर बनकर भारी पड़ता रहा है।
शुक्रवार को पंखियानगला के ग्रामीणों को एक बार फिर आग के कोप का शिकार होना पड़ा। गांव के फतेह खां कहते हैं कि आग ने जेठ महीना में अब तक पांच बार कहर बरपाया है। पिछले साल इन्हीं दिनों में भीषण आग लगी थी। उस वक्त की तबाही से उबर पाना तो दूर आशियां बनाने के लिए लिया गया कर्ज भी कुछेक परिवार चुका नहीं पाए हैं। कपूरन भी आग से आहत हैं। उसके परिवार ने भी तीन बार आग की विभीषिका का दंश झेला है।
पिछले साल जेठ महीना में पीड़ित परिवारों को तहसील प्रशासन की ओर से आर्थिक मदद मुहैया कराने के साक्षी रहे राजस्व निरीक्षक जुगेंद्र पाल सिंह और लेखपाल ओमबाबू नागेंद्र की मानें तो तहसील प्रशासन भी जेठ महीना में ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत देता रहा है। बुजुर्ग जानकार बताते हैं कि जेठ महीना में आग की छोटी सी चिंगारी भी विकराल रूप ले लेती है। वजह तेज हवा के झोके और सूखा घास-फूंस रहती है।
बेटियों के लिए रखा दहेज का सामान भी जला
उझानी। पंखियानगला के इसरार की एक और कमालउद्दीन की दो बेटियों का निकाह होना अगले महीना मुकर्रर हो चुकी है। दोनों ने बेटी के निकाह के लिए चार-पांच दिन पहले ही कासगंज जाकर सामान खरीदा था। उनके घरों में रखा दहेज का सामान भी आग की भेंट चढ़ गया। इसरार और कमालउ्ददीन को बेटियों के निकाह की चिंता सताने लगी है।
लंबित पड़ा है फायर सब स्टेशन का प्रस्ताव
उझानी। पुलिस सूत्रों की मानें तो कछला कसबे में फायर सब स्टेशन की स्थापना का प्रस्ताव करीब आठ साल पहले कोतवाली पुलिस से अफसरों के माध्यम से शासन को भेजा था। प्रस्ताव में इस बात का जिक्र भी था कि कटरी से इलाका जुड़ा होने की वजह से बदायूं और सहसवान से दमकल पहुंचने में ज्यादा वक्त लगता है। प्रस्ताव अभी भी शासन स्तर पर लंबित है।
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गंगा किनारे कासगंज वाले छोर पर बसे कछला नगर पंचायत के वार्ड नंबर-तीन में आग की पहली चिंगारी दक्षिण की ओर इसरार के घर से फूटी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप लेकर ज्यादातर घरों और झोपड़ियों को चपेट में ले लिया। एक-एक करके एक सौ से अधिक झोपड़ियां जल गईं। इनमें कुछेक का पशुशाला और ज्यादातर झोपड़ीनुमा आशियाने थे। ग्रामीणों ने खुद भी आग पर काबू पाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पाई। कछला चौकी इंचार्ज मानपाल सिंह ने बदायूं और कासगंज पुलिस से संपर्क करके दो दमकल बुलवा लीं। ग्रामीणों ने पंपसेट चलाकर भी आग बुझाने का प्रयास किया।
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दमकलों को भी आग पर काबू पाने में करीब चार घंटा लगे लेकिन तब तक ज्यादातर घरों में अनाज, रोजमर्रा इस्तेमाल का सामान और नकदी आदि जलकर स्वाहा हो चुकी थी। कासगंज जिले से सोरों कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। सोरों पुलिस ने भी ग्रामीणों की मदद की। राजस्व कर्मियों की टीम के साथ पहुंचे एसडीएम सदर प्रदीप कुमार ने पीड़ित परिवारों के सदस्यों से जानकारी हासिल की। उन्होंने राजस्व निरीक्षक जुगेंद्रपाल सिंह की अगुवाई में लेखपाल ओमबाबू नागेंद्र और वीरेंद्र सिंह से पीड़ितों परिवारों की सूची भी तैयार कराई। लेखपाल ओमबाबू ने बताया कि दर्जनों घरों समेत 105 झोपड़ियां आग की भेंट चढ़ी हैं। नुकसान भी करीब 20 लाख रुपये का आंका गया है। एसडीएम ने बताया कि पीड़ित परिवारों के सदस्यों को तहसील प्रशासन की ओर से खाने के पैकेट भी वितरित कराए गए हैं।
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अग्निपीड़ित परिवारों की सूची
इसरार, अमरुद्दीन, नवी अहमद, मिसवाह वली, मुशर्रफ, इसहाक, रसूल अहमद, जहीरुल, गट्अे, मोहम्मद हसन, नकसर अली, मोहम्मद कलीम, अमीर हसन, उमर खांन, तसवीर, चमन, शमसाद, जुने अली, शाहिदा पत्नी अवरार, सलीम, नवारुन पत्नी रलीउद्दीन, नियामत, बालकिशन, जान मोहम्मद, जरुन अहमद, खुश मोहम्मद, विकार, सूखे, इमरान, कपूरन पत्नी हिकमत, जमात अली, आसिफ हुसैन, इंताम हुसैन, निहालुद्दीन, भूरे और फतेह खां समेत 105 लोगों के नाम राजस्व विभाग की सूची में शामिल हैं।
पांच बार पंखियों पर भारी पड़ा जेठ का महीना
पिछले साल भी जेठ में आग ने मचाया था तांडव
उझानी (बदायूं)। आग वाले पंखियानगला के नाम से ज्यादातर जुबां पर रटा कछला नगर पंचायत का बार्ड नंबर-तीन के महिला-पुरुष कई साल से महज इसलिए परेशान हैं कि क्या उपाय करें जो आग के कोप से छुटकारा मिल जाए। जब भी आग लगी चपेट में आने वाले घरों की तादाद दो-चार नहीं बल्कि दर्जनों रही। खासकर जेठ का महीना पंखियों की किस्मत पर कुदरत का कहर बनकर भारी पड़ता रहा है।
शुक्रवार को पंखियानगला के ग्रामीणों को एक बार फिर आग के कोप का शिकार होना पड़ा। गांव के फतेह खां कहते हैं कि आग ने जेठ महीना में अब तक पांच बार कहर बरपाया है। पिछले साल इन्हीं दिनों में भीषण आग लगी थी। उस वक्त की तबाही से उबर पाना तो दूर आशियां बनाने के लिए लिया गया कर्ज भी कुछेक परिवार चुका नहीं पाए हैं। कपूरन भी आग से आहत हैं। उसके परिवार ने भी तीन बार आग की विभीषिका का दंश झेला है।
पिछले साल जेठ महीना में पीड़ित परिवारों को तहसील प्रशासन की ओर से आर्थिक मदद मुहैया कराने के साक्षी रहे राजस्व निरीक्षक जुगेंद्र पाल सिंह और लेखपाल ओमबाबू नागेंद्र की मानें तो तहसील प्रशासन भी जेठ महीना में ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत देता रहा है। बुजुर्ग जानकार बताते हैं कि जेठ महीना में आग की छोटी सी चिंगारी भी विकराल रूप ले लेती है। वजह तेज हवा के झोके और सूखा घास-फूंस रहती है।
बेटियों के लिए रखा दहेज का सामान भी जला
उझानी। पंखियानगला के इसरार की एक और कमालउद्दीन की दो बेटियों का निकाह होना अगले महीना मुकर्रर हो चुकी है। दोनों ने बेटी के निकाह के लिए चार-पांच दिन पहले ही कासगंज जाकर सामान खरीदा था। उनके घरों में रखा दहेज का सामान भी आग की भेंट चढ़ गया। इसरार और कमालउ्ददीन को बेटियों के निकाह की चिंता सताने लगी है।
लंबित पड़ा है फायर सब स्टेशन का प्रस्ताव
उझानी। पुलिस सूत्रों की मानें तो कछला कसबे में फायर सब स्टेशन की स्थापना का प्रस्ताव करीब आठ साल पहले कोतवाली पुलिस से अफसरों के माध्यम से शासन को भेजा था। प्रस्ताव में इस बात का जिक्र भी था कि कटरी से इलाका जुड़ा होने की वजह से बदायूं और सहसवान से दमकल पहुंचने में ज्यादा वक्त लगता है। प्रस्ताव अभी भी शासन स्तर पर लंबित है।