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अचानक बढ़ने लगा मलेरिया का प्रकोप, मंडलीय टीम भी करेगी निगरानी
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बदायूं। मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से हाई रिस्क बदायूं जिले में अचानक मलेरिया के रोगियों की संख्या में इजाफा होने लगा है। साथ ही मंडल स्तर से निगरानी भी शुरू हो गई है। दरअसल, इस वर्ष मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से बदायूं में हालात सामान्य थे लेकिन अगस्त मध्य से मलेरिया का प्रकोप बढ़ने लगा है। इस दौरान मलेरिया के 285 और फैल्सीपेरम के 21 रोगी मिले हैं।
बदायूं जिला मच्छरजनित बीमारियों के मामले में 2019 में प्रदेश पर दूसरे स्थान पर था। 2020 में भी यहां मलेरिया का प्रकोप रहा। शासन स्तर से निगरानी के बाद 2021 आते-आते हालात में कुछ सुधार हुआ। हालांकि, 2021 में बदायूं में डेंगू के रिकार्ड 417 मामले मिले थे। 2022 में हालात अब तक सामान्य थे लेकिन 20 अगस्त के बाद से अचानक मलेरिया और फैल्सीपेरम के मामलों में इजाफा होने लगा। उझानी, सालारपुर ब्लॉक के गांवों चार लोगों की जान भी जा चुकी है। ऐसे में मंडल स्तर से बदायूं में निगरानी शुरू कर दी गई है।
गौर करने की बात यह है कि 20 अगस्त से 10 सितंबर तक जिले में मलेरिया के 285 और फैल्सीपेरम के 21 रोगी मिल चुके हैं। जबकि एक जनवरी से 20 अगस्त तक जिले में 65 और फैल्सीपेरम का एक ही रोगी मिला था। अचानक मलेरिया का प्रकोप बढ़ने के कारण मंडल स्तर से निगरानी के साथ शासन ने भी प्रतिदिन की रिपोर्ट तलब कर ली है।
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लार्वा पर गंभीरता नहीं तो 20 प्रधानों को मलेरिया विभाग ने भेजे नोटिस
बदायूं। लार्वा और मच्छरों को लेकर ग्राम पंचायतें संजीदा नहीं हैं। गांवों में जलभराव और सफाई न होने के कारण लार्वा के बाद मच्छर पनप रहे हैं। गौर करने की बात यह है कि जो गांव मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से संवेदनशील हैं वहां भी ग्राम पंचायतें गंभीरता से काम नहीं कर रहीं। ऐसे में मलेरिया विभाग की ओर से सालारपुर, समरेर, दातागंज और उझानी ब्लॉक के 20 प्रधानों को नोटिस जारी किए हैं। दरअसल, मलेरिया विभाग की टीमों को इन गांवों में कई स्थानों पर लार्वा मिला था। मलेरिया विभाग की टीमों ने यहां लार्वा और मच्छरनाशक दवाओं का छिड़काव भी कराया। पड़ताल में पता लगा कि ग्राम पंचायत स्तर से जलभराव और सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। इसके बाद यह नोटिस जारी किए गए हैं।
अगस्त मध्य से मलेरिया का असर कुछ बढ़ा है लेकिन जिले में पिछले वर्षों के मुकाबले हालात सामान्य हैं। अगस्त मध्य से दस सितंबर तक जिले में मलेरिया के 285 और फैल्सीपेरम के 21 रोगी मिले हैं। मलेरिया और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार कैंप का आयोजन करने के साथ दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। - योगेश सारस्वत, जिला मलेरिया अधिकारी
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बदायूं जिला मच्छरजनित बीमारियों के मामले में 2019 में प्रदेश पर दूसरे स्थान पर था। 2020 में भी यहां मलेरिया का प्रकोप रहा। शासन स्तर से निगरानी के बाद 2021 आते-आते हालात में कुछ सुधार हुआ। हालांकि, 2021 में बदायूं में डेंगू के रिकार्ड 417 मामले मिले थे। 2022 में हालात अब तक सामान्य थे लेकिन 20 अगस्त के बाद से अचानक मलेरिया और फैल्सीपेरम के मामलों में इजाफा होने लगा। उझानी, सालारपुर ब्लॉक के गांवों चार लोगों की जान भी जा चुकी है। ऐसे में मंडल स्तर से बदायूं में निगरानी शुरू कर दी गई है।
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गौर करने की बात यह है कि 20 अगस्त से 10 सितंबर तक जिले में मलेरिया के 285 और फैल्सीपेरम के 21 रोगी मिल चुके हैं। जबकि एक जनवरी से 20 अगस्त तक जिले में 65 और फैल्सीपेरम का एक ही रोगी मिला था। अचानक मलेरिया का प्रकोप बढ़ने के कारण मंडल स्तर से निगरानी के साथ शासन ने भी प्रतिदिन की रिपोर्ट तलब कर ली है।
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लार्वा पर गंभीरता नहीं तो 20 प्रधानों को मलेरिया विभाग ने भेजे नोटिस
बदायूं। लार्वा और मच्छरों को लेकर ग्राम पंचायतें संजीदा नहीं हैं। गांवों में जलभराव और सफाई न होने के कारण लार्वा के बाद मच्छर पनप रहे हैं। गौर करने की बात यह है कि जो गांव मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से संवेदनशील हैं वहां भी ग्राम पंचायतें गंभीरता से काम नहीं कर रहीं। ऐसे में मलेरिया विभाग की ओर से सालारपुर, समरेर, दातागंज और उझानी ब्लॉक के 20 प्रधानों को नोटिस जारी किए हैं। दरअसल, मलेरिया विभाग की टीमों को इन गांवों में कई स्थानों पर लार्वा मिला था। मलेरिया विभाग की टीमों ने यहां लार्वा और मच्छरनाशक दवाओं का छिड़काव भी कराया। पड़ताल में पता लगा कि ग्राम पंचायत स्तर से जलभराव और सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। इसके बाद यह नोटिस जारी किए गए हैं।
अगस्त मध्य से मलेरिया का असर कुछ बढ़ा है लेकिन जिले में पिछले वर्षों के मुकाबले हालात सामान्य हैं। अगस्त मध्य से दस सितंबर तक जिले में मलेरिया के 285 और फैल्सीपेरम के 21 रोगी मिले हैं। मलेरिया और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार कैंप का आयोजन करने के साथ दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। - योगेश सारस्वत, जिला मलेरिया अधिकारी