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कम्पोजिट ग्रांट का स्कूलों में हुआ दुरुपयोग, अब भी हौसले बुलंद
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बदायूं। परिषदीय स्कूलों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए शासन ने कंपोजिट ग्रांट के रूप में हर स्कूल को बच्चों की संख्या के आधार पर भरपूर धनराशि दी। इस धनराशि से विद्यालय में क्या-क्या खरीदा जाना है इन सब की सूची भी दी गई, लेकिन जिले के ज्यादातर स्कूलों में इस धनराशि का बंदरबाट कर लिया गया। पुरानों कार्यों या फिर पूर्व में खरीदे गए सामान को ही कंपोजिट ग्रांट से खरीदा गया दर्शाया जा रहा है। इस धनराशि का कितना दुरुपयोग किया गया, इस बात का बीएसए को भी पता है, जिन्होंने बीते शैक्षिक सत्र में निरीक्षण के दौरान भौतिक सत्यापन में इसे पाया भी, मगर कार्रवाई नहीं होने की वजह से शासकीय धनराशि का दुरुपयोग करने वालों के हौसले बुलंद ही रहे हैं।
बेसिक शिक्षा के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को निजी स्कूलों की तरह सुविधाएं दिए जाने को शासन से हर साल अच्छा खासा बजट दिया जा रहा है। शासन का फोकस भी शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के साथ स्कूलों के भौतिक परिवेश को बदलने का है, ताकि निजी स्कूलों के बजाय बच्चे परिषदीय स्कूलों में दाखिला लें। सत्र 2018-19 के आखिर में शासन की ओर से हर स्कूल को नामांकित बच्चों की संख्या के आधार पर कंपोजिट ग्रांट दी गई। इस मद में दी गई धनराशि में से 10 प्रतिशत रकम से स्वच्छता से संबंधित सामान की खरीदारी की जानी थी। बाकी बच्चों के प्रयोग में होने वाली हर चीज को खरीदने के लिए सूची दी गई थी। जब यह धनराशि एसएमसी के खातों में पहुंची तभी से घोटालेबाजों ने धनराशि को ठिकाने लगाने की योजना बनानी शुरू कर दी। खुलासा तब हुआ जब बीएसए रामपाल सिंह राजपूत ने फरवरी-मार्च में किए गए स्कूलों के निरीक्षण में देखा कि कंपोजिट ग्रांट से जो सामान खरीदा गया है वह बेहद घटिया है या फिर पुराना सामान ही दिखा दिया गया है। इस पर बीएसए ने उस वक्त संबंधित प्रधानाध्यापकों को कड़ी चेतावनी जारी की थी। कुछ पर निलंबन की भी गाज गिरी थी। इस सबके बावजूद जिले के अधिकांश स्कूलों में इस धनराशि का काफी दुरुपयोग हुआ। कहा जा रहा है यदि बारीकी से जांच कराई जाए तो बहुत कुछ सामने आ सकता है।
पुताई और निर्माण कार्य भी दर्शाए
-कंपोजिट ग्रांट से कुछ स्कूलों में पुताई के साथ ही मरम्मत आदि निर्माण कार्य का होना भी दर्शाया गया है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि पुताई को अलग से धनराशि कमरों की संख्या के हिसाब से दी जाती रही है। तब सवाल खड़ा होता है कि पुताई के मद में पूर्व में दी गई धनराशि का भी दुरुपयोग किया गया जो कंपोजिट ग्रांट में काम होना दिखाया गया।
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कंपोजिट ग्रांट से जो कार्य होने हैं या सामान खरीदा जाना है, वही कार्य कराने के लिए प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिए गए। रही बात इस धनराशि के दुरुपयोग की तो पूर्व में कई प्रधानाध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। आगे भी कहीं पर कोई कमी मिलती है तो संबंधित प्रधानाध्यापक को बख्शा नहीं जाएगा।
-रामपाल सिंह राजपूत, बीएसए
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बेसिक शिक्षा के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को निजी स्कूलों की तरह सुविधाएं दिए जाने को शासन से हर साल अच्छा खासा बजट दिया जा रहा है। शासन का फोकस भी शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के साथ स्कूलों के भौतिक परिवेश को बदलने का है, ताकि निजी स्कूलों के बजाय बच्चे परिषदीय स्कूलों में दाखिला लें। सत्र 2018-19 के आखिर में शासन की ओर से हर स्कूल को नामांकित बच्चों की संख्या के आधार पर कंपोजिट ग्रांट दी गई। इस मद में दी गई धनराशि में से 10 प्रतिशत रकम से स्वच्छता से संबंधित सामान की खरीदारी की जानी थी। बाकी बच्चों के प्रयोग में होने वाली हर चीज को खरीदने के लिए सूची दी गई थी। जब यह धनराशि एसएमसी के खातों में पहुंची तभी से घोटालेबाजों ने धनराशि को ठिकाने लगाने की योजना बनानी शुरू कर दी। खुलासा तब हुआ जब बीएसए रामपाल सिंह राजपूत ने फरवरी-मार्च में किए गए स्कूलों के निरीक्षण में देखा कि कंपोजिट ग्रांट से जो सामान खरीदा गया है वह बेहद घटिया है या फिर पुराना सामान ही दिखा दिया गया है। इस पर बीएसए ने उस वक्त संबंधित प्रधानाध्यापकों को कड़ी चेतावनी जारी की थी। कुछ पर निलंबन की भी गाज गिरी थी। इस सबके बावजूद जिले के अधिकांश स्कूलों में इस धनराशि का काफी दुरुपयोग हुआ। कहा जा रहा है यदि बारीकी से जांच कराई जाए तो बहुत कुछ सामने आ सकता है।
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पुताई और निर्माण कार्य भी दर्शाए
-कंपोजिट ग्रांट से कुछ स्कूलों में पुताई के साथ ही मरम्मत आदि निर्माण कार्य का होना भी दर्शाया गया है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि पुताई को अलग से धनराशि कमरों की संख्या के हिसाब से दी जाती रही है। तब सवाल खड़ा होता है कि पुताई के मद में पूर्व में दी गई धनराशि का भी दुरुपयोग किया गया जो कंपोजिट ग्रांट में काम होना दिखाया गया।
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कंपोजिट ग्रांट से जो कार्य होने हैं या सामान खरीदा जाना है, वही कार्य कराने के लिए प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिए गए। रही बात इस धनराशि के दुरुपयोग की तो पूर्व में कई प्रधानाध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। आगे भी कहीं पर कोई कमी मिलती है तो संबंधित प्रधानाध्यापक को बख्शा नहीं जाएगा।
-रामपाल सिंह राजपूत, बीएसए