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कादराबाद का काली दरबार : यहां बनते हैं बिगड़े काम
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कादराबाद के मंदिर में मां दुर्गा की प्रतिमा। संवाद
- फोटो : BADAUN
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दहगवां (बदायूं)। कादराबाद सिद्धपीठ के नाम से जाने वाला मां महाकाली का मंदिर दूरदराज तकक प्रसिद्ध है। मान्यता है कि मां काली का पूजन करने से लोगों के बिगड़े काम बन जाते हैं। इसी के चलते यहां देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचते हैं। लोगों के अटूट विश्वास का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि मां काली के मंदिर में दिन-रात घंटे खनकते रहते हैं।
जरीफनगर थाना मुख्यालय से मुश्किल से पांच किमी दूर कादराबाद गांव में मां काली का यह प्राचीन मंदिर स्थापित है। बताया जाता है कि कुछ सौ वर्ष पहले इस क्षेत्र में तेज प्रवाह में गंगा बहती थीं। संत शिरोमणि श्री हरिबाबा ने 40 मील लंबा बांध गवां क्षेत्र (जिला संभल) में गंगा के सहारे बनाकर इस क्षेत्र को पूरी तरह बाढ़ से मुक्त कर दिया। गंगा का एक स्रोत कादराबाद के नजदीक होकर निकला जिसे महावा नदी के नाम से जाना जाता है। इसी नदी के तट पर रहकर संत भोले बाबा कोलकाता वाली काली मां की तपस्या किया करते थे। उन्हीं के प्रयास से मंदिर को मान्यता मिली और दिनोदिन भीड़ बढ़ती चली गई।
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पुजारी बोले- इलाके को मां काली ने दिया रोजगार
मंदिर के पुजारी पंडा श्यामबाबू ने बताया मां काली के विराजमान होने से यहां साल भर मेले जैसा माहौल रहता है। नवरात्र व विशेष दिनों में तो हजारों श्रद्धालु रोज आते हैं। ऐसे में मां काली ने आधे गांव के लोगों के लिए रोजगार का रास्ता खोल दिया है। धर्मशाला से लेकर प्रसाद की दुकानों तक भीड़ रहती है। कई पंडा परिवारों की भी इससे रोजी-रोटी चल रही है। संवाद
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जरीफनगर थाना मुख्यालय से मुश्किल से पांच किमी दूर कादराबाद गांव में मां काली का यह प्राचीन मंदिर स्थापित है। बताया जाता है कि कुछ सौ वर्ष पहले इस क्षेत्र में तेज प्रवाह में गंगा बहती थीं। संत शिरोमणि श्री हरिबाबा ने 40 मील लंबा बांध गवां क्षेत्र (जिला संभल) में गंगा के सहारे बनाकर इस क्षेत्र को पूरी तरह बाढ़ से मुक्त कर दिया। गंगा का एक स्रोत कादराबाद के नजदीक होकर निकला जिसे महावा नदी के नाम से जाना जाता है। इसी नदी के तट पर रहकर संत भोले बाबा कोलकाता वाली काली मां की तपस्या किया करते थे। उन्हीं के प्रयास से मंदिर को मान्यता मिली और दिनोदिन भीड़ बढ़ती चली गई।
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पुजारी बोले- इलाके को मां काली ने दिया रोजगार
मंदिर के पुजारी पंडा श्यामबाबू ने बताया मां काली के विराजमान होने से यहां साल भर मेले जैसा माहौल रहता है। नवरात्र व विशेष दिनों में तो हजारों श्रद्धालु रोज आते हैं। ऐसे में मां काली ने आधे गांव के लोगों के लिए रोजगार का रास्ता खोल दिया है। धर्मशाला से लेकर प्रसाद की दुकानों तक भीड़ रहती है। कई पंडा परिवारों की भी इससे रोजी-रोटी चल रही है। संवाद
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