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नगला मंदिर : यहां शेर पर सवार हैं काली माता
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नगला मंदिर
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। शहर से सटे नगलाशर्की स्थित देवी शक्ति पीठ का अलग इतिहास रहा है। शेर पर सवार काली माता का यह मंदिर जिले में क्रांतिकारी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ यहीं बैठकर क्रांतिकारी योजनाएं बनाते थे।
नगला मंदिर जिले का प्रमुख देवी मंदिर है। साल के दोनों नवरात्र यहां भक्तों की भारी भीड़ रहती है। यह जिले के सर्वाधिक प्राचीन देवी मंदिरों में से एक है। धर्मकर्म के अलावा इस मंदिर को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़कर भी देखा जाता है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 1921 और 1929 में महात्मा गांधी बदायूं आए थे। इससे जिले के क्रांतिकारियों में जज्बा और बढ़ा। इसके बाद नगलाशर्की के एक बाग में क्रांतिकारी बैठक किया करते थे। यहीं देवी की एक मिट्टी से बनी प्रतिमा थी। क्रांतिकारी इस प्रतिमा के पास कीर्तन के बहाने बैठते थे ताकि अंग्रेजी सरकार को शक न हो। बाद में इसे मंदिर का रूप दे दिया गया। कई साल तक मंदिर स्वतंत्रता आंदोलन का केंद्र बना रहा।
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भक्तों की आस्था का केंद्र
मंदिर के महंत शिवओम शर्मा बताते हैं कि नगला मंदिर की मिट्टी की प्राचीन मूर्ति के पास ही काली माता की भव्य प्रतिमा है। काली मां यहां शेर पर सवार हैं जो स्वरूप देश के किसी दूसरे मंदिर में नहीं मिलता। मंदिर में भक्तों की मनोकामना पूरी होने के बाद वह घंटे चढ़ाते हैं तो नल भी लगवाते हैं। महंत शिवओम ने बताया कि 17 साल से उनका परिवार यहां महंत है। मंदिर को लेकर भक्तों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है।
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नगला मंदिर जिले का प्रमुख देवी मंदिर है। साल के दोनों नवरात्र यहां भक्तों की भारी भीड़ रहती है। यह जिले के सर्वाधिक प्राचीन देवी मंदिरों में से एक है। धर्मकर्म के अलावा इस मंदिर को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़कर भी देखा जाता है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 1921 और 1929 में महात्मा गांधी बदायूं आए थे। इससे जिले के क्रांतिकारियों में जज्बा और बढ़ा। इसके बाद नगलाशर्की के एक बाग में क्रांतिकारी बैठक किया करते थे। यहीं देवी की एक मिट्टी से बनी प्रतिमा थी। क्रांतिकारी इस प्रतिमा के पास कीर्तन के बहाने बैठते थे ताकि अंग्रेजी सरकार को शक न हो। बाद में इसे मंदिर का रूप दे दिया गया। कई साल तक मंदिर स्वतंत्रता आंदोलन का केंद्र बना रहा।
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भक्तों की आस्था का केंद्र
मंदिर के महंत शिवओम शर्मा बताते हैं कि नगला मंदिर की मिट्टी की प्राचीन मूर्ति के पास ही काली माता की भव्य प्रतिमा है। काली मां यहां शेर पर सवार हैं जो स्वरूप देश के किसी दूसरे मंदिर में नहीं मिलता। मंदिर में भक्तों की मनोकामना पूरी होने के बाद वह घंटे चढ़ाते हैं तो नल भी लगवाते हैं। महंत शिवओम ने बताया कि 17 साल से उनका परिवार यहां महंत है। मंदिर को लेकर भक्तों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है।
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