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राष्ट्रकवि ब्रजेंद्र अवस्थी ने दिलाई थी बदायूं को पहचान
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डॉ. ब्रजेंद्र अवस्थी (फाइल फोटो)। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। वीर रस के चर्चित कवि रहे दिवंगत डॉ. ब्रजेंद्र अवस्थी बदायूं की शान के तौर पर पहचाने जाते हैं। उन्होंने बदायूं में रहकर साहित्य और काव्य रचना का जो बीज बोया, उसके अंकुर आज भी नए कवियों के रूप में मंच की शोभा बढ़ा रहे हैं। कई पुस्तकें लिखने वाले डॉ. अवस्थी राष्ट्रप्रेम, धर्म व ओज की रचनाओं के लिए चर्चित रहे।
डॉ. अवस्थी मूल रूप से लखीमपुर खीरी जिले के निवासी थे। उनका जन्म एक जनवरी 1931 को लखीमपुर खीरी जिले के अलीगंज में हुआ था। शुरू से ही साहित्यक मिजाज के डॉ. अवस्थी ने हिंदी को विषय के रूप में चुनकर डिग्री ली और जिले के कछला स्थित डिग्री कॉलेज में हिंदी प्रवक्ता के रूप में नौकरी करने आए। इसके बाद उनका ट्रांसफर बदायूं के एनएमएसएन दास पीजी कॉलेज में हो गया। यहां वह लंबे समय हिंदी विभागाध्यक्ष रहे और इसी पद से सेवानिवृत हुए। हिंदी के प्रकांड विद्वान डॉ. अवस्थी काव्य जगत के भी पुरोधा रहे। बदायूं की शान रहे राष्ट्रीय गीतकार डॉ. उर्मिलेश अवस्थी भी उनके सानिध्य में रहकर बुलंदियों तक पहुंचे। डॉ. अवस्थी मंच पर जब ओज के साथ वीर रस की कविताएं पढ़ते थे तो लोग विस्मृत होकर रह जाते थे। उन्होंने अमेरिका व कनाडा की दो-दो बार साहित्यिक यात्राएं कीं। साथ ही उनके जीवित रहते व निधन के बाद भी उनके व्यक्तित्व पर कई हिंदी छात्रों ने पीएचडी की है। बदायूं में सांस्कृतिक साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में उनका नाम अग्रणी है। उनकी तीस से ज्यादा रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं।
निधन पर आए मुलायम सिंह, राजकीय सम्मान से हुआ संस्कार
पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव डॉ. अवस्थी का बहुत सम्मान करते थे। 21 जनवरी 2007 में अवस्थी के निधन पर मुलायम सिंह खुद बदायूं आए। तब गिंदो देवी कॉलेज के पास स्थित डॉ. अवस्थी के घर रातोंरात सड़क बनाई गई थी। राजकीय सम्मान का अंतिम संस्कार कराया गया। बताते हैं कि मुख्यमंत्री रहते मुलायम सिंह ने डॉ. अवस्थी को जिले की ही एक सीट से चुनाव लड़ाने की पेशकश की थी। हालांकि डॉ. अवस्थी ने इसे विनम्रता पूर्वक टाल दिया।
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साहित्य से जुड़ा परिवार
डॉ. अवस्थी के पुत्र डॉ. राजीव अवस्थी का भी निधन हो चुका है। वह शिक्षा व साहित्य से जुड़े थे। उनसे छोटे डॉ. संजीव अवस्थी मंगलौर में चिकित्सक हैं। पुत्रवधू डॉ. निशि अवस्थी स्थानीय गिंदो देवी कॉलेज में हिंदी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। अवस्थी के तीसरे पुत्र शतंजीव अवस्थी लखनऊ में फार्मा क्षेत्र से जुड़े हैं। डॉ. अवस्थी की दोनों पुत्रियां डॉ. पूर्ति मिश्रा व डॉ. तृप्ति मिश्रा भी साहित्य सृजन से जुड़ी हैं।
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डॉ. अवस्थी मूल रूप से लखीमपुर खीरी जिले के निवासी थे। उनका जन्म एक जनवरी 1931 को लखीमपुर खीरी जिले के अलीगंज में हुआ था। शुरू से ही साहित्यक मिजाज के डॉ. अवस्थी ने हिंदी को विषय के रूप में चुनकर डिग्री ली और जिले के कछला स्थित डिग्री कॉलेज में हिंदी प्रवक्ता के रूप में नौकरी करने आए। इसके बाद उनका ट्रांसफर बदायूं के एनएमएसएन दास पीजी कॉलेज में हो गया। यहां वह लंबे समय हिंदी विभागाध्यक्ष रहे और इसी पद से सेवानिवृत हुए। हिंदी के प्रकांड विद्वान डॉ. अवस्थी काव्य जगत के भी पुरोधा रहे। बदायूं की शान रहे राष्ट्रीय गीतकार डॉ. उर्मिलेश अवस्थी भी उनके सानिध्य में रहकर बुलंदियों तक पहुंचे। डॉ. अवस्थी मंच पर जब ओज के साथ वीर रस की कविताएं पढ़ते थे तो लोग विस्मृत होकर रह जाते थे। उन्होंने अमेरिका व कनाडा की दो-दो बार साहित्यिक यात्राएं कीं। साथ ही उनके जीवित रहते व निधन के बाद भी उनके व्यक्तित्व पर कई हिंदी छात्रों ने पीएचडी की है। बदायूं में सांस्कृतिक साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में उनका नाम अग्रणी है। उनकी तीस से ज्यादा रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं।
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निधन पर आए मुलायम सिंह, राजकीय सम्मान से हुआ संस्कार
पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव डॉ. अवस्थी का बहुत सम्मान करते थे। 21 जनवरी 2007 में अवस्थी के निधन पर मुलायम सिंह खुद बदायूं आए। तब गिंदो देवी कॉलेज के पास स्थित डॉ. अवस्थी के घर रातोंरात सड़क बनाई गई थी। राजकीय सम्मान का अंतिम संस्कार कराया गया। बताते हैं कि मुख्यमंत्री रहते मुलायम सिंह ने डॉ. अवस्थी को जिले की ही एक सीट से चुनाव लड़ाने की पेशकश की थी। हालांकि डॉ. अवस्थी ने इसे विनम्रता पूर्वक टाल दिया।
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साहित्य से जुड़ा परिवार
डॉ. अवस्थी के पुत्र डॉ. राजीव अवस्थी का भी निधन हो चुका है। वह शिक्षा व साहित्य से जुड़े थे। उनसे छोटे डॉ. संजीव अवस्थी मंगलौर में चिकित्सक हैं। पुत्रवधू डॉ. निशि अवस्थी स्थानीय गिंदो देवी कॉलेज में हिंदी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। अवस्थी के तीसरे पुत्र शतंजीव अवस्थी लखनऊ में फार्मा क्षेत्र से जुड़े हैं। डॉ. अवस्थी की दोनों पुत्रियां डॉ. पूर्ति मिश्रा व डॉ. तृप्ति मिश्रा भी साहित्य सृजन से जुड़ी हैं।