{"_id":"675ae1abd2368139e209d814","slug":"narrated-the-story-of-rukmanis-marriage-and-kansas-killing-badaun-news-c-123-1-sbly1018-130857-2024-12-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: रुक्मणि विवाह और कंस वध की कथा सुनाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: रुक्मणि विवाह और कंस वध की कथा सुनाई
विज्ञापन
बिनावर में भागवत कथा सुनाते सोमदत्त महाराज। संवाद
बिनावर। श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथावाचक सोमदत्त महाराज ने रुक्मणि विवाह और कंस वध की कथा सुनाई।
कथावाचक ने कहा कि कंस के अत्याचार से जब पृथ्वी त्राहि-त्राहि करने लगी, तब लोग भगवान से गुहार लगाने लगे। तब भगवान कृष्ण अवतरित हुए। कंस को यह पता था कि उसका वध श्रीकृष्ण के हाथों ही होना है। इसलिए उसने वाल्यावस्था में ही श्रीकृष्ण को अनेक बार मरवाने का प्रयास किया लेकिन हर बार वह विफल रहा।
बाद में श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस का वध कर मथुरा नगरी को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिला दी। कथावाचक ने कहा कि रुकमणि को माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। वह विदर्भ साम्राज्य की पुत्री थीं, जो भगवान श्रीकृष्ण से विवाह करने की इच्छुक थीं लेकिन रुकमणि जी के पिता व भाई इस विवाह से सहमत नहीं थे।
जिसके चलते उन्होंने रुकमणि के विवाह में जरासंध और शिशुपाल को भी आमंत्रित कर लिया। जैसे ही यह खबर रुकमणि को पता चली, तो उन्होंने दूत के माध्यम से अपने दिल की बात श्रीकृष्ण तक पहुंचाई। जिसके बाद भगवान का उनके भाई और पिता से काफी युद्ध हुआ। अंततः श्री कृष्ण रुकमणि से विवाह करने में सफल रहे। इस मौके पर काफी संख्या में कथा प्रेमी मौजूद रहे। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
कथावाचक ने कहा कि कंस के अत्याचार से जब पृथ्वी त्राहि-त्राहि करने लगी, तब लोग भगवान से गुहार लगाने लगे। तब भगवान कृष्ण अवतरित हुए। कंस को यह पता था कि उसका वध श्रीकृष्ण के हाथों ही होना है। इसलिए उसने वाल्यावस्था में ही श्रीकृष्ण को अनेक बार मरवाने का प्रयास किया लेकिन हर बार वह विफल रहा।
बाद में श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस का वध कर मथुरा नगरी को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिला दी। कथावाचक ने कहा कि रुकमणि को माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। वह विदर्भ साम्राज्य की पुत्री थीं, जो भगवान श्रीकृष्ण से विवाह करने की इच्छुक थीं लेकिन रुकमणि जी के पिता व भाई इस विवाह से सहमत नहीं थे।
विज्ञापन
जिसके चलते उन्होंने रुकमणि के विवाह में जरासंध और शिशुपाल को भी आमंत्रित कर लिया। जैसे ही यह खबर रुकमणि को पता चली, तो उन्होंने दूत के माध्यम से अपने दिल की बात श्रीकृष्ण तक पहुंचाई। जिसके बाद भगवान का उनके भाई और पिता से काफी युद्ध हुआ। अंततः श्री कृष्ण रुकमणि से विवाह करने में सफल रहे। इस मौके पर काफी संख्या में कथा प्रेमी मौजूद रहे। संवाद
विज्ञापन