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मृतक आश्रित कोटे में बाबू ने झटक ली नौकरी
बदायूं
Updated Mon, 19 Jan 2015 07:59 PM IST
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बेसिक शिक्षा विभाग में मृतक आश्रित कोटे में गलत तरीके से नौकरी पाने का आरोपी बाबू जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। जांच आख्या के आधार पर बीएसए ने बाबू का वेतन रोक दिया है। साथ ही नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा है। एक सप्ताह में साक्ष्य सहित जवाब नहीं देने पर सेवाएं समाप्ति की बात कही गई है।
एक शिकायतकर्ता ने आरोपी बाबू पर बेसिक शिक्षा विभाग में मृतक आश्रित कोटे से गलत तरीके से नौकरी हासिल करने का आरोप लगाया था। विभाग के अनुसार शिकायतकर्ता का भी चयन गलत हुआ था। इसका पता चलने पर तत्कालीन बीएसए ने उसे बर्खास्त करते हुए मुकदमा दर्ज कराया था।
आरोप था कि कनिष्ठ लिपिक के पिता डायट में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत थे। जबकि उसकी माता प्राइमरी स्कूल में अध्यापिका थीं। माता की मौत के बाद बेटे को धोखाधड़ी कर लिपिक पद पर नौकरी दे दी गई। इसे देखते हुए बीएसए कृपा शंकर वर्मा ने इसमें बीईओ जगत को जांच अधिकारी नियुक्त कर जांच के आदेश दिए थे। तीन महीने की जांच में प्रथम दृष्टया गलत तरीके से नौकरी का मामला सही पाया गया है।
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पाया गया कि मृतक आश्रित पद पर नौकरी हासिल करते हुए तथ्य को छुपाया गया। जांच अधिकारी सोमनाथ विश्वकर्मा और वित्त एवं लेखाधिकारी ने जांच आख्या बीएसए को सौंप दी। इसके बाद कार्रवाई की गई है।
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शिकायत के आधार पर कनिष्ठ लिपिक सचिन सिंघल की जांच कराई गई थी। प्रथम दृष्टया मामला सही पाया गया है। नौकरी लेने में तथ्य को छुपाया गया। लिहाजा इस संदर्भ में नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगते हुए साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा गया है। वेतन रोक दिया गया है। अगर जवाब नहीं देते हैं तो सेवा समाप्ति की भी कार्रवाई की जाएगी।
- कृपा शंकर वर्मा, बीएसए, बदायूं
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एक शिकायतकर्ता ने आरोपी बाबू पर बेसिक शिक्षा विभाग में मृतक आश्रित कोटे से गलत तरीके से नौकरी हासिल करने का आरोप लगाया था। विभाग के अनुसार शिकायतकर्ता का भी चयन गलत हुआ था। इसका पता चलने पर तत्कालीन बीएसए ने उसे बर्खास्त करते हुए मुकदमा दर्ज कराया था।
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आरोप था कि कनिष्ठ लिपिक के पिता डायट में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत थे। जबकि उसकी माता प्राइमरी स्कूल में अध्यापिका थीं। माता की मौत के बाद बेटे को धोखाधड़ी कर लिपिक पद पर नौकरी दे दी गई। इसे देखते हुए बीएसए कृपा शंकर वर्मा ने इसमें बीईओ जगत को जांच अधिकारी नियुक्त कर जांच के आदेश दिए थे। तीन महीने की जांच में प्रथम दृष्टया गलत तरीके से नौकरी का मामला सही पाया गया है।
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पाया गया कि मृतक आश्रित पद पर नौकरी हासिल करते हुए तथ्य को छुपाया गया। जांच अधिकारी सोमनाथ विश्वकर्मा और वित्त एवं लेखाधिकारी ने जांच आख्या बीएसए को सौंप दी। इसके बाद कार्रवाई की गई है।
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शिकायत के आधार पर कनिष्ठ लिपिक सचिन सिंघल की जांच कराई गई थी। प्रथम दृष्टया मामला सही पाया गया है। नौकरी लेने में तथ्य को छुपाया गया। लिहाजा इस संदर्भ में नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगते हुए साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा गया है। वेतन रोक दिया गया है। अगर जवाब नहीं देते हैं तो सेवा समाप्ति की भी कार्रवाई की जाएगी।
- कृपा शंकर वर्मा, बीएसए, बदायूं