{"_id":"d9feb26699bb2e6fef6dad6540592475","slug":"mentha-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दवा, पेस्ट और सौंदर्य प्रसाधन को बदलेगा मेंथा का रूप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दवा, पेस्ट और सौंदर्य प्रसाधन को बदलेगा मेंथा का रूप
badaun
Updated Sat, 10 Jan 2015 07:17 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेंथा को कई रूप देने के लिए इस परियोजना का लाभ किसान ले सकता है। इससे मेंथा के विभिन्न रूप जो दवा, पेस्ट, सौंदर्य प्रसाधन में प्रयोग होते हैं बदायूं में ही बन सकेंगे। इससे उनके मेंथा ऑयल की कीमत 50 हजार रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है।
विज्ञापन
मेंथा किसानों के लिए ‘जीएलसी लैब एंड फ्रेक्सनल कॉलम’ वरदान सिद्ध होगी। नवादा में लैब तो शुरू हो चुकी थी लेकिन फ्रेक्सनल कॉलम की स्थापना का उचित स्थान न होने के कारण औद्योगिक आस्थान में भूखंड दिया गया है। अब दोनों काम इसी भूखंड में स्थापित होंगे। जिला उद्योग केंद्र के संरक्षण में इसके विकास का कार्य शुरू हो गया है। जनवरी लास्ट तक स्थापना का काम पूरा कर लिया जाएगा। इससे मेंथा किसानों को काफी लाभ होगा।
विज्ञापन
औद्योगिक जगत की एसाइट योजना के तहत 126 लाख की ‘जीएलसी लैब एंड फ्रेक्सनल कॉलम’ परियोजना को नवादा के मोहतशाम सिद्दीकी ने अंगीकार किया है। इनकी संस्था नेचुरल एंसेसिएन ऑयल को-आपरेटिव सेवा समिति इस प्रोजेक्ट का संचालन कर रही है। इसमें 90 प्रतिशत सरकार और शेष 10 प्रतिशत अंश कार्यदायी संस्था को लगाना है। लैब का काम तो नवादा में शुरू करा दिया गया था लेकिन मेंथा के अन्य रूप परिवर्तन का काम अभी लटका हुआ था। बाकी काम दिल्ली की संगीता साइंस्टिफिक कंपनी करेगी।
विज्ञापन
लैब का लाभ
मेंथा लैब से किसानों को यह लाभ होगा कि उनके मेंथा ऑयल की गुणवत्तापरक जांच हो जाएगी। अब तक व्यापारी प्राइवेट लैब पर झूठी रिपोर्ट देकर और उनके मेंथा ऑयल में तमाम कमियां बताकर उनसे सस्ता मेंथा ऑयल खरीदने लगे हैं। इस पर रोक लगेगी।
मेंथा के ये प्रतिरूप होंगे तैयार
मेंथा के प्रतिरूपों में लीलालून, मिथाइल कैबीकॉल, टरपीन और मैंथाल अब बदायूं में ही मेंथा फसल से तैयार होगा।
‘जीएलसी लैब एंड फ्रेक्सनल कॉलम’ डी-10 भूखंड औद्योगिक आस्थान सालारपुर में आवंटित कर दिया गया है। माना जा रहा है कि जनवरी लास्ट तक किसानों के हित वाली यह परियोजना अपना काम शुरू कर देगी। इसके लिए जिला उद्योग केंद्र समन्वय का काम कर रहा है। - वीरेंद्र कुमार, जीएम, जिला उद्योग केंद्र