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भगवान न करे मेडिकल कॉलेज में पड़े खून की जरूरत...भागना होगा सात किलोमीटर
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बदायूं। गुनौरा वाजिदपुर पर बन रहा राजकीय मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल को दवाएं बांटने में लगा है, लेकिन खुद की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है। हालत ये है कि अगर मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन के समय किसी मरीज को अचानक खून की जरूरत पड़ जाए तो परिजनों को ब्लड लेने के लिए सात किमी दूर जिला अस्पताल की दौड़ लगानी होगी। ऐसे में मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर कई ऐसे मरीजों को इलाज किए बिना ही वापस कर देते हैं, जिन्हें ब्लड की जरूरत पड़ सकती है। कॉलेज में अभी तक ब्लड बैंक की कोई व्यवस्था नहीं है। हालांकि कॉलेज प्रशासन का कहना है कि इसके लिए शासन से अनुमति मांगी है, उम्मीद है जल्द ही उन्हें अनुमति मिल जाएगी। कॉलेज परिसर में ब्लड बैंक कक्ष का निर्माण करा लिया गया है।
सपा शासन काल में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राजकीय मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखी थी। इसके बाद में राजकीय मेडिकल कॉलेज को बनाने का जिम्मा राजकीय निर्माण निगम को दिया गया। 20 दिसंबर 2013 को 13 करोड़ की धनराशि आवंटित हुई।, जिसके बाद में आज तक कॉलेज का निर्माण कार्य रुक-रुक कर चल रहा है, इस वजह से ये कॉलेज आज भी निर्माणधीन है, हालांकि मेडिकल कॉलेज में ओडीपी से लेकर आईपीडी तक शुरू हो चुकी है। पिछले साल मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई भी शुरू हो चुकी है। अब नए सत्र में एमबीबीएस को लेकर कॉलेज प्रशासन ने फिर से तैयारी करनी शुरू कर दी है। यहां पर प्रतिदिन लगभग दो हजार से लेकर 2200 तक की ओपीडी होती है।
इस सबके बावजूद राजकीय मेडिकल कॉलेज तमाम समस्याओं से जूझ रहा है। इसमें बड़ी समस्या ब्लड बैंक नहीं होने की है, क्योंकि राजकीय मेडिकल कॉलेज में कई एक्सीडेंट केस ऐसे आते हैं, जिनमें मरीजों को तुरंत या ऑपरेशन के समय ब्लड की जरूरत होती है। ऐसे में डॉक्टर तीमारदारों को जिला अस्पताल से ब्लड लाने को कहते हैं, या फिर मरीजों को डॉक्टर प्राथमिक उपचार देने के बाद मेें जिला अस्पताल या अन्य अस्पताल के लिए रेफर कर देते हैं। यही हाल अन्य जांचों का भी है। हालांकि कॉलेज प्रशासन का कहना है कि ब्लड बैंक खोलने के लिए शासन से अनुमति मांगी है, उम्मीद है जल्द ही उन्हें अनुमति मिल जाएगी। परिसर में कॉलेज प्रशासन के द्वारा ब्लड बैंक कक्ष का निर्माण करा लिया गया है।
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नहीं खुल सकी बैंक की शाखा
मेडिकल कॉलेज में तैनात डॉक्टर, स्टाफ और विद्यार्थियों को जब कभी भी रुपयों की जरूरत होती है, तो उन्हें बैंक या एटीएम की तलाश में शहर की तरफ रुख करना होता है। वहीं मेडिकल कॉलेज में कई जांच कराने के लिए शासन स्तर से शुल्क रखा है। कई बार देखा गया है कि मरीज के साथ तीमारदार नकद रुपये लेकर नहीं आ पाते हैं, ऐसे में वह बैंक या एटीएम की तलाश करते हैं, जिससे उन्हें काफी परेशानी होती है। बैंक खोलने के लिए लीड बैंक मैनेजर श्याम पासवान ने राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से वार्ता भी की थी, लेकिन वह यहां पर पीएनबी की शाखा खोलने के लिए जगह नहीं दे सके हैं।
ब्लड बैंक के लिए कक्ष पूरी तरह से तैयार है। पिछले दिनों एमसीआई की टीम ने निरीक्षण किया था। उसमें अधिकांश सब कुछ ठीक मिला। कुछ छोटी-छोटी कमियां थीं, उनको दुरुस्त करने के निर्देश मिले थे, ऐसे में उम्मीद है कि अब ब्लड बैंक संचालित करने के लिए अनुमति मिल जाए। ब्लड बैंक खोलने के लिए कक्ष पूरा तैयार है।
- डॉ. आरपी सिंह, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज
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सपा शासन काल में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राजकीय मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखी थी। इसके बाद में राजकीय मेडिकल कॉलेज को बनाने का जिम्मा राजकीय निर्माण निगम को दिया गया। 20 दिसंबर 2013 को 13 करोड़ की धनराशि आवंटित हुई।, जिसके बाद में आज तक कॉलेज का निर्माण कार्य रुक-रुक कर चल रहा है, इस वजह से ये कॉलेज आज भी निर्माणधीन है, हालांकि मेडिकल कॉलेज में ओडीपी से लेकर आईपीडी तक शुरू हो चुकी है। पिछले साल मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई भी शुरू हो चुकी है। अब नए सत्र में एमबीबीएस को लेकर कॉलेज प्रशासन ने फिर से तैयारी करनी शुरू कर दी है। यहां पर प्रतिदिन लगभग दो हजार से लेकर 2200 तक की ओपीडी होती है।
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इस सबके बावजूद राजकीय मेडिकल कॉलेज तमाम समस्याओं से जूझ रहा है। इसमें बड़ी समस्या ब्लड बैंक नहीं होने की है, क्योंकि राजकीय मेडिकल कॉलेज में कई एक्सीडेंट केस ऐसे आते हैं, जिनमें मरीजों को तुरंत या ऑपरेशन के समय ब्लड की जरूरत होती है। ऐसे में डॉक्टर तीमारदारों को जिला अस्पताल से ब्लड लाने को कहते हैं, या फिर मरीजों को डॉक्टर प्राथमिक उपचार देने के बाद मेें जिला अस्पताल या अन्य अस्पताल के लिए रेफर कर देते हैं। यही हाल अन्य जांचों का भी है। हालांकि कॉलेज प्रशासन का कहना है कि ब्लड बैंक खोलने के लिए शासन से अनुमति मांगी है, उम्मीद है जल्द ही उन्हें अनुमति मिल जाएगी। परिसर में कॉलेज प्रशासन के द्वारा ब्लड बैंक कक्ष का निर्माण करा लिया गया है।
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नहीं खुल सकी बैंक की शाखा
मेडिकल कॉलेज में तैनात डॉक्टर, स्टाफ और विद्यार्थियों को जब कभी भी रुपयों की जरूरत होती है, तो उन्हें बैंक या एटीएम की तलाश में शहर की तरफ रुख करना होता है। वहीं मेडिकल कॉलेज में कई जांच कराने के लिए शासन स्तर से शुल्क रखा है। कई बार देखा गया है कि मरीज के साथ तीमारदार नकद रुपये लेकर नहीं आ पाते हैं, ऐसे में वह बैंक या एटीएम की तलाश करते हैं, जिससे उन्हें काफी परेशानी होती है। बैंक खोलने के लिए लीड बैंक मैनेजर श्याम पासवान ने राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से वार्ता भी की थी, लेकिन वह यहां पर पीएनबी की शाखा खोलने के लिए जगह नहीं दे सके हैं।
ब्लड बैंक के लिए कक्ष पूरी तरह से तैयार है। पिछले दिनों एमसीआई की टीम ने निरीक्षण किया था। उसमें अधिकांश सब कुछ ठीक मिला। कुछ छोटी-छोटी कमियां थीं, उनको दुरुस्त करने के निर्देश मिले थे, ऐसे में उम्मीद है कि अब ब्लड बैंक संचालित करने के लिए अनुमति मिल जाए। ब्लड बैंक खोलने के लिए कक्ष पूरा तैयार है।
- डॉ. आरपी सिंह, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज