{"_id":"626d8e63315d122d8c7ae907","slug":"may-divas-badaun-news-bly483309330","type":"story","status":"publish","title_hn":"मई दिवस पर विशेष : छह सड़का से पुलिस ने हटाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मई दिवस पर विशेष : छह सड़का से पुलिस ने हटाया
विज्ञापन
गांधी ग्राउंड शिव मंदिर के पास खड़े मजदूर। संवाद
- फोटो : BADAUN
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदायूं। गरीबी का शिकार मजदूर 350 रुपये की दिहाड़ी में कैसे घर चलाता होगा यह अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। एक मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता है। साल में एक बार मजदूरों की समस्याओं पर गोष्ठियां, सेमिनार तो होते हैं, लेकिन उनकी जीवन स्तर सुधारने के लिए पूरे साल कुछ खास नहीं होता। बदायूं के मजदूरों को तो मजदूरी तलाशने के लिए ठिकाने तक की तलाश करनी पड़ रही है।
सुबह के वक्त शहर में छह सड़का से लेकर घंटाघर तक मजदूरों का मजमा लगता है। मजदूर एक दिहाड़ी का 325 से 350 रुपये लेते हैं। छह सड़का से मजदूरों को पुलिस ने खदेड़ा तो उन्होंने नया ठिकाना गांधी ग्राउंड शिव मंदिर के पास बनाया। यहां भी आपत्ति हुई। इसी का नतीजा है कि उन्हें यहां भी खड़ा होने नहीं दिया जाता। जिले भर के गांवों से मजदूर यहां पहुंचते हैं। कभी मजदूरी मिलती है तो कभी बिना मजदूरी के ही मायूस होकर घर लौटना पड़ता है।
इन दिनों खेतों में भी खास काम नहीं है, ऐसे में गांवों से दिहाड़ी मजदूरी की तलाश में आने वाले मजदूरों की संख्या काफी बढ़ गई है। शनिवार को गांधी ग्राउंड शिव मंदिर पास दिहाड़ी मजदूरी की तलाश में खड़े मजदूरों से बात करने पर उन्होंने अपनी पीड़ा बयां की। बोले-छह सड़का से पुलिस भगा देते है और गांधी ग्रउंड के पास भी खड़ा नहीं होने दिया जाता। ऐसे में आखिर वह कहां जाएं।
विज्ञापन
-
मजदूरों ने कहा-जाएं तो जाएं कहां
इस्लामगंज से मजदूरी की तलाश में रोज आता हूं। महीने में बमुश्किल 15 से 20 दिन ही मजदूरी मिलती है। रोज बीस रुपये किराया खर्च होता है। कई बार सुबह घर पर खाना तैयार नहीं होता तो यहां होटल पर खाना पड़ता है। छह सड़का पर पुलिस खड़ा नहीं होने देती और गांधी ग्राउंड से भी भगा दिया जाता है।
-ब्रजेश
-
छह सड़का पर कई बार पुलिस परेशान करती है। पिछले दिनों तो कई मजदूरों का सामान भी छीन लिया था। दो दिन वहां खड़ा नहीं होने दिया। इसके बाद कहा गया कि गांधी ग्राउंड पर खड़े हो जाओ। यहां दो दिन ही हुए हैं, अभी से खड़े होने पर आपत्ति की जाने लगी है।
-विकास
-
नौगवां से रोज दिहाड़ी मजदूरी की तलाश में टेंपो से किराया खर्च करते आता हूं। पिछले 12-15 दिन से काफी समस्या हो रही है। छह सड़का पर अब पुलिस खड़ा ही नहीं होने देती। पूरे शहर के लोगों का पता है कि दिहाड़ी मजदूर छह सड़का पर मिलते हैं। इन दिनों गांवों में भी काम नहीं है और मजदूरी भी नहीं मिल रही।
-राकेश
-
मैं रोज पड़ौआ गांव से पैदल जाता हूं और पैदल ही वापस जाता हूं। महीने में 10-12 दिन ही मजदूरी मिल पाती है। मजदूरों के पास अब तो कोई ठिकाना भी नहीं है। वर्षों से मजदूर छह सड़का पर खड़े होते आ रहे थे। अब पुलिस ने वहां खड़ा होना बंद करा दिया है। गांधी ग्राउंड पर भी उनका विरोध हो रहा है।
- अकरम
-
‘मजदूर गांधी ग्राउंड के अंदर खड़े हों तथा अच्छा रहेगा’
बड़ी संख्या में महिलाएं सुबह के वक्त मंदिर आती हैं। इसके अलावा काफी महिलाएं सुबह के वक्त गांधी ग्राउंड में टहलने के लिए भी आती हैं। शिव म ंदिर के पास से कई स्कूल कॉलेजों की छात्राएं भी गुजरती हैं। मजदूरों के यहां खड़े होने के कारण महिलाओं और छात्राओं को असुविधा होती है। यह लोग मंदिर के आस-पास गंदगी भी करते हैं। अगर मजदूर गांधी ग्राउंड के अंदर खड़े हो जाएं तो कोई समस्या नहीं है।
- सत्यपाल, पुजारी शिव मंदिर
--
छह सड़का पर यलो स्कीम लागू की गई है। चौराहे को भीड़भाड़ से मुक्त कर सुरक्षा संबंधी गतिविधियों का केंद्र बनाने के लिए ऐसा किया गया है। मजदूरों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी, उन्हें खड़ा करने के लिए कोई सही जगह चिह्नित कराएंगे।
- प्रवीन सिंह चौहान, एसपी सिटी
विज्ञापन
सुबह के वक्त शहर में छह सड़का से लेकर घंटाघर तक मजदूरों का मजमा लगता है। मजदूर एक दिहाड़ी का 325 से 350 रुपये लेते हैं। छह सड़का से मजदूरों को पुलिस ने खदेड़ा तो उन्होंने नया ठिकाना गांधी ग्राउंड शिव मंदिर के पास बनाया। यहां भी आपत्ति हुई। इसी का नतीजा है कि उन्हें यहां भी खड़ा होने नहीं दिया जाता। जिले भर के गांवों से मजदूर यहां पहुंचते हैं। कभी मजदूरी मिलती है तो कभी बिना मजदूरी के ही मायूस होकर घर लौटना पड़ता है।
विज्ञापन
इन दिनों खेतों में भी खास काम नहीं है, ऐसे में गांवों से दिहाड़ी मजदूरी की तलाश में आने वाले मजदूरों की संख्या काफी बढ़ गई है। शनिवार को गांधी ग्राउंड शिव मंदिर पास दिहाड़ी मजदूरी की तलाश में खड़े मजदूरों से बात करने पर उन्होंने अपनी पीड़ा बयां की। बोले-छह सड़का से पुलिस भगा देते है और गांधी ग्रउंड के पास भी खड़ा नहीं होने दिया जाता। ऐसे में आखिर वह कहां जाएं।
विज्ञापन
-
मजदूरों ने कहा-जाएं तो जाएं कहां
इस्लामगंज से मजदूरी की तलाश में रोज आता हूं। महीने में बमुश्किल 15 से 20 दिन ही मजदूरी मिलती है। रोज बीस रुपये किराया खर्च होता है। कई बार सुबह घर पर खाना तैयार नहीं होता तो यहां होटल पर खाना पड़ता है। छह सड़का पर पुलिस खड़ा नहीं होने देती और गांधी ग्राउंड से भी भगा दिया जाता है।
-ब्रजेश
-
छह सड़का पर कई बार पुलिस परेशान करती है। पिछले दिनों तो कई मजदूरों का सामान भी छीन लिया था। दो दिन वहां खड़ा नहीं होने दिया। इसके बाद कहा गया कि गांधी ग्राउंड पर खड़े हो जाओ। यहां दो दिन ही हुए हैं, अभी से खड़े होने पर आपत्ति की जाने लगी है।
-विकास
-
नौगवां से रोज दिहाड़ी मजदूरी की तलाश में टेंपो से किराया खर्च करते आता हूं। पिछले 12-15 दिन से काफी समस्या हो रही है। छह सड़का पर अब पुलिस खड़ा ही नहीं होने देती। पूरे शहर के लोगों का पता है कि दिहाड़ी मजदूर छह सड़का पर मिलते हैं। इन दिनों गांवों में भी काम नहीं है और मजदूरी भी नहीं मिल रही।
-राकेश
-
मैं रोज पड़ौआ गांव से पैदल जाता हूं और पैदल ही वापस जाता हूं। महीने में 10-12 दिन ही मजदूरी मिल पाती है। मजदूरों के पास अब तो कोई ठिकाना भी नहीं है। वर्षों से मजदूर छह सड़का पर खड़े होते आ रहे थे। अब पुलिस ने वहां खड़ा होना बंद करा दिया है। गांधी ग्राउंड पर भी उनका विरोध हो रहा है।
- अकरम
-
‘मजदूर गांधी ग्राउंड के अंदर खड़े हों तथा अच्छा रहेगा’
बड़ी संख्या में महिलाएं सुबह के वक्त मंदिर आती हैं। इसके अलावा काफी महिलाएं सुबह के वक्त गांधी ग्राउंड में टहलने के लिए भी आती हैं। शिव म ंदिर के पास से कई स्कूल कॉलेजों की छात्राएं भी गुजरती हैं। मजदूरों के यहां खड़े होने के कारण महिलाओं और छात्राओं को असुविधा होती है। यह लोग मंदिर के आस-पास गंदगी भी करते हैं। अगर मजदूर गांधी ग्राउंड के अंदर खड़े हो जाएं तो कोई समस्या नहीं है।
- सत्यपाल, पुजारी शिव मंदिर
--
छह सड़का पर यलो स्कीम लागू की गई है। चौराहे को भीड़भाड़ से मुक्त कर सुरक्षा संबंधी गतिविधियों का केंद्र बनाने के लिए ऐसा किया गया है। मजदूरों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी, उन्हें खड़ा करने के लिए कोई सही जगह चिह्नित कराएंगे।
- प्रवीन सिंह चौहान, एसपी सिटी