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Budaun News: भक्ति भाव से पूजी गईं माता कूष्मांडा, मंदिरों में जुटे श्रद्धालु

Thu, 19 Oct 2023 12:01 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Updated Thu, 19 Oct 2023 12:01 AM IST
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Mata Kushmanda was worshiped with devotion, devotees gathered in temples
नगला मंदिर में पुजा अर्चना करते श्रद्धालु। संवाद
बदायूं। नवरात्र के चाैथे दिन श्रद्धालुओं ने मां कूष्मांडा देवी की पूजा अर्चना की। सुबह से लेकर देर रात तक देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ी। आरती-पूजा कर लोगों ने घंटे घड़ियाल बजाकर माता के जयकारे लगाए।
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सुबह पांच बजे से स्नान कर श्रद्धालुओं ने पहले घर के पूजा स्थल को शुद्ध किया। माता की चौकी पर देवी मां के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा अर्चना की। अज्ञारी कर भोग प्रसाद लगाया। इसके बाद श्रद्धालु देवी मंदिरों में जलाभिषेक के लिए पहुंचे। नगला मंदिर समेत जिलेभर के मंदिरों में सुबह से ही जलाभिषेक, धूप-दीप जलाकर श्रद्धालुओं ने घर में सुख समृद्धि की कामना की। दोपहर के बाद देर रात तक देवी मंदिरों में श्रद्धालु आरती-पूजा, भजन-संकीर्तन, पाठ आदि के लिए पहुंचे। शाम को आरती के दौरान मंदिरों में भीड़ रही
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ऐसे करें स्कंदमाता की पूजा

पंडित गिरीश शर्मा के अनुसार शारदीय नवरात्रि की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को प्रात: काल स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद मां का पूजन आरंभ करें। मां की प्रतिमा को गंगाजल से शुद्ध करें। मां के श्रृंगार के लिए शुभ रंगों का इस्तेमाल करना श्रेष्ठ माना गया है। स्कंदमाता और भगवान कार्तिकेय की पूजा विनम्रता के साथ करनी चाहिए। पूजा में कुमकुम, अक्षत, पुष्प, फल आदि से पूजा करें। चंदन लगाएं, माता के सामने घी का दीपक जलाएं। इसके बाद फूल चढ़ाएं व भोग लगाएं। मां की आरती उतारें और मंत्र का जाप करें। इनका प्रिय भोग केला है। साथ ही खीर और सूखे मेवा का भोग भी प्रिय है।
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सैकड़ों साल पुराने खितौरा मंदिर में तीन देवियों का संगम
संवाद न्यूज एजेंसी
उघैती। खितौरा के प्राचीन तीन देवियों के मंदिर का संगम देवी भक्तों की अटूट श्रद्धा का केंद्र हैं। सैकड़ों साल पुराने इन तीन देवियों के मंदिर पर हर साल नवरात्र पर भक्तों की भारी भीड़ जुटती हैं। यहां पर जरीफनगर के गांव कादराबाद, बुलंदशहर के कर्णवास व अलीगढ़ के बैलोन की प्रसिद्ध देवी पीठ का संगम है, हालांकि तीनों देवियां की प्रतिमाएं कितने सालों से यहां स्थापित हैं, इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है।
बताया जाता है कि कई सालों पहले खितौरा के ठाकुर स्व. डंबर सिंह को एक रात तीन देवियों ने स्वप्न दिया कि वह एक पुराने कुएं में बंद हैं। उनको निकालो तब भक्तो का लाभ होगा। सुबह उठकर उन्होंने ग्रामीणों को यह बात बताई तो सभी अचंभित रह गए। किसी को विश्वास नहीं हुआ कि यह सपना सच हो सकता है।

सपने के अनुसार सभी लोगो ने कुएं की खोदाई शुरू कर दीं, लेकिन दो दिनों तक कुछ भी हाथ नहीं आया। इसके लोग मायूस हो चले। बताते हैं कि सभी लोग सपने को झूठा मनाकर घर लौटने ही वाले थे कि खोदी गई जगह पर अचानक दो मूर्तियां नजर आने लगीं तो पूरा गांव खुशी से झूम उठा। उसके बाद में कादराबाद वाली माता को मंदिर लाया गया। तब से यह मंदिर आज तक तीनों देवियों के अनूठे संगम को लेकर भक्तों की अटूट श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।

नगला मंदिर में पुजा अर्चना करते श्रद्धालु। संवाद

नगला मंदिर में पुजा अर्चना करते श्रद्धालु। संवाद

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