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...तमाशाई तो बहुत, पर इमदाद नहीं

Dataganj Updated Fri, 03 Apr 2015 08:03 PM IST
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‘साहिल के तमाशाई हर डूबने वाले पर अफसोस तो करते हैं...इमदाद नहीं करते।’ ये पंक्तियां मौत को गले लगाने वाले कर्जदार किसान सूरजपाल पर सटीक बैठती हैं। गांव गढ़ा का ये किसान सूदखोरों से हारकर इस दुनिया से चला गया, लेकिन वह कई सवाल भी छोड़ गया है। उसकी अकाल मौत के बाद घर में मातम पसरा हुआ है। पर अभी तक प्रशासन की ओर से किसी तरह की आर्थिक मदद नहीं दी की गई है। पीड़ित परिवार इंतजार कर रहा है।
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गरीब युवा किसान सूरजपाल जाटव की गांव में ही गमगीन माहौल में अंत्येष्टि कर दी गई। गांव के तमाम लोग मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से उसके परिवारीजनों को 30 हजार रुपये की मदद देने की बात कही गई थी, लेकिन शुक्रवार शाम तक कोई मदद उसके परिवार वालों को नहीं मिली थी। चूंकि सूदखोरों के कर्ज में सूरजपाल का परिवार इतना दब गया है कि उसके पास अब दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो गया है। मां और पत्नी सुध-बुध खो बैठी हैं। वो तो यही कह रही हैं... सूरज को सूदखोरों ने ही मार डाला।


कई गांवों में फैला है
सूदखोरों का नेटवर्क
तहसील क्षेत्र के कई गांवों में सूदखोराें का नेटवर्क फैला है। अगर कोई गरीब व्यक्ति इनके फंदे में फंस जाता है, तो वह निकल नहीं पाता। वह अपनी जमीन या अन्य संपत्ति से हाथ धो बैठता है, या फिर मजबूरी में मौत को गले लगा लेता है। सूदखोरों को धंधा देहात क्षेत्र में अधिक फैला हुआ है।
लोगों की बात को सच माना जाए तो यह सूदखोर 10 रुपये सैकड़े के ब्याज पर अपनी रकम देते हैं और छह माह बाद बैठक मारते हैं। जो ब्याज बनता है उसे मूलधन में जोड़कर फिर उसी धनराशि पर ब्याज वसूलते हैं। कह सकते हैं कि इनसे पैसा लेने वाला जीवनभर छुटकारा नहीं पाता है। यह बहुत ही संवेदनशील होते हैं। गुंडई के बल पर अपने काम को अंजाम देते हैं। गढ़ा निवासी सूरजपाल से पहले भी कई गरीब किसान सूदखोरों के कर्ज में दबकर अपना सब कुछ गंवा चुके हैं।
गौर करने वाली बात यह भी है कि सूरजपाल भी किसान था। किसानों के हितों की रक्षा करने की तमाम संगठन बात करते हैं किंतु सवाल उठ रहा है कि जब कोई किसान कर्ज में दबकर सुसाइड करता है या फिर सूदखोर उसे परेशान करते हैं, तब यह संगठन क्यों खामोशी की चादर ओढ़ लेते हैं। लोग कहते हैं कि यदि किसान संगठन भी थोड़ा सक्रिय होकर काम करें, तो शायद सूदखोर से परेशान होकर कोई व्यक्ति सुसाइड न करे।  
लोग बताते हैं कि सूदखोर इतने असंवेदनशील होते हैं कि उन्हें किसी की परेशानी से कोई सरोकार नहीं रहता। वह गरीब का सब कुछ हासिल करने को हर हथकंडा अपनाते हैं, उनकी दबंगई चलती है। प्रशासन भी खामोश रहता है।

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