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‘...आदमी-आदमी का दुश्मन है, अब सियासत की मेहरबानी से’
badaun
Updated Sun, 12 Apr 2015 08:51 PM IST
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बदायूं महोत्सव में शनिवार की रात ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया। नामचीन शायरों ने हर रंग-मिजाज के शेर और कलाम पेश कर श्रोताओं की दाद पाई। मुशायरे का आगाज नईम अख्तर ने नात-ए-पाक से किया। निजामत शायर डॉ. मंसूर उस्मानी ने की।
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युवा शायर हाशिम फिरोजाबादी ने पब्लिक के मूड को भांपकर शेर और गजल पेश की, उन्होंने फरमाया-
मेरा चिराग हवा के खिलाफ जलता है,
इसलिए तो जमाने को आज खलता है,
उसी को खलने लगी रोशनी मेरे घर की,
मेरे चिराग से उसका चिराग जलता है।
मशहूर शायर डॉ. राहत इंदौरी ने अपने मिजाज में शेर पढ़े-
किसने दस्तक दी है दिल पर कौन है,
आप तो अंदर है बाहर कौन है,
दिल धड़कने का तसब्बुर ही ख्याली हो गया,
इक तेरे जाने से सारा शहर खाली हो गया।
मंच की इकलौती शायरा सबा बलरामपुरी ने सुनाया-
रंग लाई दुआ मोजजा हो गया,
जो नहीं था मेरा वो मेरा हो गया,
साथ जीना है और साथ मरना है,
फैसला कर लिया फैसला हो गया।
फानी शकील अवार्ड से सम्मानित डॉ. नवाज देवबंदी ने कहा- जब भी मिलता है नया जख्म,
खुशी होती है, हंसने लगते हैं सभी जख्म पुराने मेरे।
संभल के डीएम और शायर पवन कुमार ने कहा-
तुम्हारे नाम से ही दिल की दुनिया जगमगाती है,
हमें ख्वाहिश कहा है चांद-सूरज के उजालों की,
उसी ने तीरगी से तंग आकर खुदकुशी कर ली,
हमेशा दीप भीख देता था, जो हम सबको उजालों की।
नईम अख्तर ने पढ़ा-
अंधेरों को यही तो खल रहा है, दीया मेरा हवा में जल रहा है,
तुम्हारे काम इतने तो नहीं है, तुम्हारा नाम जितना चल रहा है।
गुना से पधारे दीपक जैन ने सुनाया-
जुगनू-जुगनू रकीब है उसका, चांद जैसा नसीब है उसका,
जैसे सिसकी दबी हो हाेंठो में, मुस्कराना अजीब है उसका।
ग्वालियर से पधारे मदन मोहन दानिश ने कहा-
और क्या आखिर तुझे ऐ जिंदगी चाहिए,
आरजू कल आग की थी, आज पानी चाहिए,
मुरादाबाद से पधारे डॉ. मंसूर उस्मानी ने कहा-
तंग आकर गलत बयानी से, हम अलग हो गए कहानी से,
आदमी-आदमी का दुश्मन है, अब सियासत की मेहरबानी से।
नदीम शाद ने कलाम पेश किया। ठाकुरद्वारा से आए शायर शरीफ भारती ने श्रोताओं को हंसाया। इससे पूर्व मुशायरे का शुभारंभ मुख्य अतिथि सदर विधायक आबिद रजा, उप्र उर्दू एकेडमी के चेयरमैन एवं शायर डॉ. नवाज देवबंदी, डॉ. राहत इंदौरी, डीएम संभल पवन कुमार ने शमां रोशन कर किया। इस अवसर पर सहसवान नगरपालिका के चेयरमैन नूरउद्दीन, डॉ. अक्षत अशेष, टीओ प्रवीण कुमार त्रिपाठी, जिला विकास अधिकारी प्रदीप कुमार सोम, अलीगढ़ से पधारे जिला उद्यान अधिकारी कौशल कुमार, उस्ताद शायर नूर ककरालवी, डॉ. गोपाल मिश्रा, डॉ. रियाज उद्दीन सिद्दीकी, डॉ. सुधीर तोमर, मंजुल शंखधार, रजनी सिंह, सोनरुपा विशाल, सिया सचदेव, अनूप रस्तोगी, सुधांशु शर्मा, परविन्दर सिंह दुआ मौजूद रहे।
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फानी अवार्ड से सम्मानित हुए डा.नवाज
मुशायरे के आगाज से डॉ. नवाज देवबंदी को डॉ. राहत इंदौरी ने फानी अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया। आयोजन समिति की ओर सभी अतिथियों एवं शायरों का माल्यार्पण कर, बैज लगारकर तथा प्रतीक चिह्नन देकर सम्मानित किया। इसके अलावा शकील बदायूंनी की पुस्तक का भी विमोचन किया गया।
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...कुछ शायरों को किया हूट
बदायूं। श्रोताओं का मूड भांपकर शायरी न करने का खामियाजा कुछ शायरों को भुगतना पड़ा। उनको श्रोताओं ने हूट कर बैठने को विवश कर दिया। हालांकि संचालन कर रहे मंसूर उस्मानी ने अपने अंदाज में उनके लिए माहौल बनाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन पब्लिक ने उनको टिकने नहीं दिया। आखिर शायर आलोक श्रीवास्तव को रहा नहीं गया तो उन्होंने मंच से ही श्रोताओं के लिए तल्ख टिप्पणी कर दी। मंच की इकलौती शायरा सबा बलरामपुरी को भी दर्शकों ने नहीं बख्शा। शायरा ने भी मंच से अपनी नाराजगी बयां की।
...जब मोदी पर ली गई चुटकी
शायरों की जुबान पर हालांकि सियासत से जुड़े मसले नहीं आए, लेकिन मोदी को लेकर चुटकियां जरूर ली गईं। हुआ यूं कि जब एक युवा शायर कलाम पेश कर रहे थे, तो मंच पर काफी सर्व की जाने लगी। कुछ शायरों ने उसे रोका, तो शायर ने कहा...इन्हें मत रोको, पता नहीं आगे चलकर ये पीएम बन जाए... इस पर सबके ठहाके गूंजे। राहत इंदौरी ने मोदी की चाय पर चुटकी ली। बोले, वैसे मैं किसी राजनेता पर टिप्पणी नहीं करता, लेकिन मोदी जी का अंदाज अच्छा लगा, जब बराक ओबामा यहां आए और मोदी ने उनको खुद चाय बनाकर पेश की...आखिर वे (मोदी) अपना पुराना काम नहीं भूले।