फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Let the toilet be made

शौचालय बनवा दें तभी जाऊंगी ससुराल 

Sun, 13 Aug 2017 11:44 PM IST
 कुवंरगांव (बदायूं)।
 कुवंरगांव (बदायूं)। Updated Sun, 13 Aug 2017 11:44 PM IST
विज्ञापन
Let the toilet be made
टायलेट - फोटो : अमर उजाला
एक साल से मायके में रह रही है जागरूक बहू, तोहफे में मांगा शौचालय
विज्ञापन

24 सौ की आबादी वाले अहरुईया गांव में शौचालय बने 57, प्रयोग हो रहे केवल 10        


अहरुईया गांव की पढ़ी लिखी एक लड़की शादी के बाद जब पहली बार ससुराल पहुंची तो पति से तोहफे में शौचालय मांगा। मायके जाते समय उसने शर्त भी रख दी कि जब तक शौचालय नहीं बनेगा तब तक वह ससुराल नहीं आएगी। अहरुईया गांव की यह बहू केशलता पिछले करीब एक साल से मायके में रह रही है। उधर गरीबी की वजह से उसके ससुराल वाले अपने खर्च पर शौचालय नहीं बनवा पाए। अभी तक सरकारी मदद मिली नहीं। पूरे गांव में इस साहसी बहू की चर्चा तो है, लेकिन इस परिवार की मदद करने वाला कोई नहीं। न प्रधान और न अफसर। खास बात यह है कि अहरुईया में पिछले नौ सालों में एक भी शौचालय नहीं बना।         
 स्थान सालारपुर ब्लॉक के अहरुईया गांव में लगभग 90 फीसदी से ज्यादा महिलाएं, बच्चे, बड़े और बूढ़े खुले में शौच जाते हैं। सुबह निकलो तो किसी के हाथ में पानी भरा लोटा, तो किसी के हाथ में डिब्बा और बोतल दिख जाएगी। ग्रामीणों के मुुताबिक यहां यह नजारा लगभग रोज ही रहता है।        
विज्ञापन

अहरुईया गांव की बदायूं शहर से दूूरी महज 19 किलोमीटर होगी। यहां की आबादी 24 सौ के करीब है। यहां रहने वाले 350 परिवारों में एक हजार वोटर हैं। इस पूरे गांव में 57 कुल शौचालय हैं। इनमें 50 सरकारी मदद से बने और बाकी सात शौचालय लोगों ने निजी खर्चे पर बनवाए। इन 57 में फिलहाल केवल 10 शौचालयों का प्रयोग किया जा रहा है। प्रयोग किए जाने वालों में सरकारी मदद से बने केवल तीन ही शौचालय हैं। शेष 47 शौचालयों में ज्यादातर ध्वस्त हो गए या बदहाल पड़े हैं। कुछ शौचालयों को दूसरे कामों में प्रयोग किया जा रहा है।        
विज्ञापन
विज्ञापन

    
पढ़ी लिखी हूं, बाहर नही जाऊंगी       
पति बीर बहादुर से शादी में तोहफा के रूप में शौचालय मांगने वाली केशलता से अमर उजाला प्रतिनिधि ने फोन पर बात की। वह बोली- मैं बीकॉम पास हूं। मेरे मायके में शौचालय है। इसलिए मुझे बाहर जाने की आदत नही है। मैं शादी में ससुराल पहुंची तो पता चला कि वहां शौचालय नहीं है। शौच को घर के सभी लोग खेतों में जाते हैं। मगर मगर मैं तो खेत में नहीं जा सकती। ससुराल वाले जब तक शौचालय नहीं बनाएंगे मायके में ही रहूंगी। केशलता का मायका बरेली भोजीपुरा इलाके के ग्राम मसीद में है।        

जब पैसा होगा तो बनवा लेंगे
अहरुईया गांव की गीता कहती हैं कि उनके घर में शौचालय नहीं बना। इतना पैसा है नहीं जो खुद बनवा लें। ऊपर वाले सुनते नहीं, चाहे प्रधान हों या अधिकारी। शौच के लिए खेतों में न जाएं तो क्या करें? जब हमारे पास पैसा होगा तो बनवा लेंगे।       
   
खुले में शौच जाना मजबूरी 
जयलाल का कहते हैं कि  उनके घर में चार परिवार है। इनमें दो लोगों ने तो खुद शौचालय बनवा लिए हैं। उनकी इतनी कमाई ही नहीं होती, जो शौचालय बनवा सकें  वह भी चाहते हैं कि हमारे घर की महिलाएं बाहर न जाएं। बाहर जाने पर कीड़े-मकोड़ों से भी डर लगता है।  मगर क्या करें, खुले में शौच जाना मजबूरी है।       

अभी पैसा नही मिला
अभी शौचालय बनवाने के लिए पैसा नही मिला है। विभाग जब पैसा भेजेगा तो शौचालय बनवाए जाएगें। गांव का सर्वे कराकर पंचायत राज विभाग को भेज दिया है।-
राजेश्वरी देवी, प्रधान      

इस ब्लाक में टिगरिंग चल रही है। टिगरिंग होने के बाद लाभार्थियों को पैसा भेज दिया जाएगा। अभी शौचालय बनवाने का अभियान चल रहा है।- शशिकांत शर्मा, प्रभारी डीपीआरओ       

ओडीएफ का अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। पूरे जिले को ओडीएफ कराने का लक्ष्य है। सभी पात्र लाभार्थियों को शौचालय बनवाने के लिए पैसा दिया जाएगा।-अनिता श्रीवास्तव, डीएम
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed