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रामगंगा की 700 बीघा जमीन नक्शे में दर्ज, मौके पर नहीं मिली... खोजने निकले 35 लेखपाल

Wed, 19 Feb 2020 06:37 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 19 Feb 2020 06:37 PM IST
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land available in government papers not in real
बदायूं/ दातागंज। कुख्यात कल्लू की मौत के बाद रामगंगा किनारे कटरी की जमीन पर अवैध कब्जों की होड़ मच गई थी। जिसका जहां मौका मिला अवैध कब्जा करके खेती शुरू कर दी। बरेली और बदायूं जिला प्रशासन के बीच सीमा विवाद भी बढ़ गया। रामगंगा के गैपिंग की करीब 700 बीघा जमीन अवैध कब्जों की भेंट चढ़ गई। रामगंगा की यह जमीन राजस्व नक्शे में दर्ज है, लेकिन मौके पर नहीं मिली है। करीब तीन सौ बीघा जमीन ग्राम समाज की गायब है। कमिश्नर के निर्देश पर सरकारी जमीन तलाशने के लिए 35 लेखपाल की टीम लगाई गई है।
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करीब पांच दिन पूर्व कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने दातागंज ब्लॉक क्षेत्र में रामगंगा कटरी का निरीक्षण किया था। रामगंगा किनारे बसे बरेली के नगरिया और और बदायूं के विछिलिया गांव वालों के बीच जमीन को लेकर विवाद चला आ रहा है। बरेली की फरीदपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम नगरिया के लोगों का आरोप है कि उनके खेतों का रकबा ग्राम विछिलिया के रकबा में शामिल हो गया है। जबकि दातगंज विछिलिया गांव के लोगों का आरोप है कि उनका रकबा नगरिया गांव के रकबे में पहुंच गया है। हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि दोनों गांवों के लोग अपनी-अपनी जमीन पर काबिज है। चकबंदी के दौरान इस क्षेत्र का नक्शा उलट पलट हो गया था। इससे लेखपालों को रकबे का मिलान करना मुश्किल हो रहा है। कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने दातागंज ब्लॉक क्षेत्र की जमीन नापने को सिर्फ पांच दिन का समय दिया था। इसके लिए 35 लेखपालों की टीम बनाई गई है। इनके निर्देशन की जिम्मेदारी तहसीलदार धीरेंद्र कुमार निभा रहे हैं।
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पिछले चार दिन से हो रही नपत के दौरान रामगंगा की जमीन मौके पर न मिलने से राजस्व विभाग हिल गया है। बताते हैं कि राजस्व विभाग के पास जो नक्शे में रामगंगा की करीब 700 बीघा जमीन मौजूद है, लेकिन मौके पर जमीन कौन से गांव और कौन से जिले के रकबे में है, ये मिलान करना कठिन हो रहा है। इलाके की नपत चल रही है। अभी टीम किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है।
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300 बीघा सरकारी जमीन को लेकर हुआ था खूनी संघर्ष
करीब एक साल पहले बरेली-बदायूं जिले के रामगंगा किनारे बसे गांव वालों के बीच 300 बीघा सरकारी जमीन कब्जाने को लेकर खूनी संघर्ष हुआ था। इसमें एक युवक की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हो गए थे। लेखपालों की टीम ने यह सरकारी जमीन नक्शे में खोज निकाली है। उस जमील करे राजस्व विभाग ने अपने कब्जे में ले लिया है।
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चकबंदी विभाग ने गलत लगाए थे ठिया
ग्रामीणों के मुताबिक जिस समय दातागंज इलाके में चकबंदी हुई थी, तब अधिकारियों और कर्मचारियों ने ठियाबंदी गलत कर दी थी। इलाके के ग्राम विछिलिया खाम, विछिलिया पुख्ता, सेरहा खाम, सेरहा पुख्ता, नगरियां कलां और पंखिया खेड़ा गांव में चकबंदी के मुताबिक नक्शा उलट पुलट हो गया है। किसी का खेत कहीं पहुंच गया है। इससे खेतीबाड़ी करने में किसानों के सामने समस्या खड़ी हो गई है।
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सोना उगली रही कटरी की जमीन
कुख्यात कल्लू के मारे जाने के बाद कटरी भी खत्म हो गई। करीब दस साल पहले सरकार ने कटरी का सफाई कराने के साथ जमीन समतल करा दीं थी, जिसके बाद से वहां खेती हो रही है। कटरी की जमीन बेहद उपजाऊ है। उसमें लागत कम और पैदावार ज्यादा होती हैं। इसी कारण कटरी की जमीन पर कब्जे को लेकर आए दिन कब्जे होते रहते हैं।

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कमिश्नर के निर्देशों पर क्षेत्र की नपत शुरू कर दी गई है। करीब 35 लेखपाल लगाए गए हैं। रामगंगा की जमीन नक्शे में मौजूद है लेकिन मौके पर किस क्षेत्र में है, अभी इसका मिलान किया जा रहा है। अभी नपत का कार्य खत्म नहीं हुआ। पूरा होने के बाद ही इस बारे में कुछ कहा जा सकता है।
- धीरेंद्र कुमार, तहसीलदार दातागंज
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