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भट्ठों ने नहीं उगला धुआं...ईंट पर महंगाई के बादल
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ईंट भट्ठा।संवाद
- फोटो : BADAUN
बदायूं। विरोध के बीच सरकार ने जीएसटी दर में एक प्रतिशत की वृद्धि तो कर दी, लेकिन ईंट भट्ठा संचालकों ने इसके विरोध में अभी तक रॉयल्टी जमा नहीं की है। रॉयल्टी जमा न होने के कारण अभी तक जिले में एक भी ईंट भट्ठे का संचालन नहीं हो सका है। लिहाजा इस बार ईंट पर महंगाई के बादल मंडरा रहे हैं। इससे लोगों को आशियाना बनाने के लिए और अधिक जेब ढीली करनी पड़ सकती है।
भट्ठा संचालकों को हर साल खनन विभाग से भट्ठे संचालन की अनुमति लेनी पड़ती है। इसके लिए उन्हें विभाग में रॉयल्टी जमा करनी होती है। विभाग की ओर से इसके लिए एक सितंबर से 31 अक्तूबर तक का समय निर्धारित रहता है। लेकिन इस बार जिले में किसी भी ईंट भट्ठा संचालक ने रॉयल्टी जमा नहीं की गई है। इसका मुख्य कारण सरकार की ओर से पांच से बढ़ाकर छह प्रतिशत की गई जीएसटी दर है। ईंट भट्ठा व्यापारी लगातार सरकार के इस कदम का विरोध जता रहे हैं और बढ़ी हुई दर वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इस बीच भट्ठा संचालकों की दूसरी मांग यह है कि उन्हें रॉयल्टी जमा करते वक्त विभाग की ओर से जेसीबी से काम कराने की अनुमति दी जाए।
ईंट भट्ठा एसोसिएशन अध्यक्ष विनोद कुमार ने बताया कि अधिकांश जगहों पर श्रमिकों से खोदाई का काम नहीं कराया जा सकता है। अगर कराया भी जाता है, तो वह बहुत धीमी गति से होता है। ऐसे में जेसीबी की सख्त जरूरत होती। उन्होंने बताया कि शासन स्तर से जितनी देरी हो रही है, उससे ईंटों के रेट बढ़ सकते हैं, क्योंकि अभी तक जिले में एक भी भट्ठा संचालित नहीं हो सका है। कुछ खर्च हर महीने होते हैं, जो रेट बढ़ने की वजह बन सकते हैं।
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नवंबर में शुरू हो जाते हैं 15 फीसदी भट्ठे
एसोसिएशन अध्यक्ष के मुताबिक नवंबर में 10 से 15 प्रतिशत भट्ठे संचालित हो जाते हैं। जबकि जनवरी में 50 से 60 प्रतिशत भट्ठों का संचालन होता है। वहीं, फरवरी में सभी भट्ठों पूरी क्षमता से चलते हैं। उन्होंने बताया कि ईंट तैयार होने में करीब एक माह का समय लगता है। 15 दिन तक तो ईंट भट्ठे में रहती है।
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भट्ठा संचालकों को हर साल खनन विभाग से भट्ठे संचालन की अनुमति लेनी पड़ती है। इसके लिए उन्हें विभाग में रॉयल्टी जमा करनी होती है। विभाग की ओर से इसके लिए एक सितंबर से 31 अक्तूबर तक का समय निर्धारित रहता है। लेकिन इस बार जिले में किसी भी ईंट भट्ठा संचालक ने रॉयल्टी जमा नहीं की गई है। इसका मुख्य कारण सरकार की ओर से पांच से बढ़ाकर छह प्रतिशत की गई जीएसटी दर है। ईंट भट्ठा व्यापारी लगातार सरकार के इस कदम का विरोध जता रहे हैं और बढ़ी हुई दर वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इस बीच भट्ठा संचालकों की दूसरी मांग यह है कि उन्हें रॉयल्टी जमा करते वक्त विभाग की ओर से जेसीबी से काम कराने की अनुमति दी जाए।
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ईंट भट्ठा एसोसिएशन अध्यक्ष विनोद कुमार ने बताया कि अधिकांश जगहों पर श्रमिकों से खोदाई का काम नहीं कराया जा सकता है। अगर कराया भी जाता है, तो वह बहुत धीमी गति से होता है। ऐसे में जेसीबी की सख्त जरूरत होती। उन्होंने बताया कि शासन स्तर से जितनी देरी हो रही है, उससे ईंटों के रेट बढ़ सकते हैं, क्योंकि अभी तक जिले में एक भी भट्ठा संचालित नहीं हो सका है। कुछ खर्च हर महीने होते हैं, जो रेट बढ़ने की वजह बन सकते हैं।
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नवंबर में शुरू हो जाते हैं 15 फीसदी भट्ठे
एसोसिएशन अध्यक्ष के मुताबिक नवंबर में 10 से 15 प्रतिशत भट्ठे संचालित हो जाते हैं। जबकि जनवरी में 50 से 60 प्रतिशत भट्ठों का संचालन होता है। वहीं, फरवरी में सभी भट्ठों पूरी क्षमता से चलते हैं। उन्होंने बताया कि ईंट तैयार होने में करीब एक माह का समय लगता है। 15 दिन तक तो ईंट भट्ठे में रहती है।