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खंडहरनुमा स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के सिर पर खतरा
बदायूं।
Updated Thu, 06 Jul 2017 11:42 PM IST
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स्कूल
- फोटो : अमर उजाला
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शहर में बेसिक शिक्षा परिषद से संचालित स्कूलों के जर्जर भवन बने दिक्कत का सबब
शहर में बेसिक शिक्षा परिषद की ओर संचालित कई स्कूलों के जर्जर भवनों के इस बरसात में गिरने का खतरा बना हुआ है। इनमें बैठकर पढ़ने वाले बच्चों के सिर पर खतरा मंडराता रहता है लेकिन बीएसए और खंड शिक्षा अधिकारी इसको लेकर गंभीर नहीं हैं।शहर में बेसिक शिक्षा से 25 स्कूल संचालित हैं। इनमें तीन जूनियर हाईस्कूल और 22 प्राइमरी स्कूल हैं। इनमें 15 स्कूल पूरी तरह से जर्जर हैं। ये सभी निजी किराए के भवनों में संचालित हैं। इनके भवनों की लंबे समय से मरम्मत नहीं की गई है। मसलन, मोहल्ला कबूलपुरा नंबर एक, नंबर दो और नंबर तीन प्राइमरी स्कूलों के भवन की दशा इतनी जर्जर हैं कि यहां ईटें अक्सर निकलती रहतीं हैं। कई बार बच्चे और शिक्षक बच चुके हैं। नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है और बारिश भी शुरू हो चुकी है, जिसके चलते जर्जर भवनों के गिरने का खतरा लगातार बना हुआ है।
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असंवेदनशील बने अफसर
बदायूं। शहर के जर्जर स्कूलों के बारे में जब भी अधिकारियों से पूछा जाता है तो उनका रटा-रटाया जवाब होता है कि शासन और आला अफसरों को पत्र भेजा गया है। अफसरों की इसी असंवेदनशीलता के चलते बच्चों के सिर पर खतरा बना हुई है।
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इन स्कूलों के भवन हैं जर्जर
मोहल्ला ऊपरपारा, खंडसारी प्रथम और द्वितीय, शहबाजपुर प्रथम और द्वितीय, फरशोरी टोला, टिकटगंज, सराय नौ नंबर प्रथम और द्धितीय, लालपुल, नाहरखां सराय नंबर दो, हल्का नंबर एक, मोहल्ला कबूलपुरा नंबर एक, नंबर दो और नंबर तीन।
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क्या कहते हैं शिक्षक
बरसात के कारण स्कूल भवन में जगह नहीं बचने से बच्चों की छुट्टी करनी पड़ती है। कभी-कभार बच्चों को टूटी छत के ऊपर पन्नी तानकर बैठाना पड़ता है। भवन पूरी तरह से जर्जर हैं।
-बुशरा कौसर, शिक्षिका प्राइमरी स्कूल कबूलपुरा नंबर दो।
--
बरसात के कारण भवन परिसर में जलभराव हो गया है। ग्रीन बोर्ड भी भीग गया है। ज्यादातर बच्चे बरसात के कारण घरों को चले जाते हैं। स्कूल में बैठाने में बेहद दिक्कत होती है।
-जेबा इस्माइल शिक्षिका, प्राइमरी स्कूल कबूलपुरा नंबर तीन
--
स्कूल भवन पूरी तरह खंडहर हो चुका है। बरसात में तो स्थिति नाजुक ही रहती है। वैसे आम दिनों में सांप आदि निकलते रहते हैं सो मन में डर बना रहता है। दीवारों की ईंटें निकलकर गिरती रहतीं हैं।
-नसरीन सगीर, शिक्षिका प्राइमरी स्कूल कबूलपुरा नंबर एक
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वर्जन-
जर्जर स्कूलों की दशा सुधारने के लिए निदेशालय को पत्र लिख चुके हैं। वहां से मार्गदर्शन मिलते ही जर्जर भवनों वाले स्कूलों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कर दिया जाएगा। वैसे सभी शिक्षकों को बरसात के दिनों में खास ध्यान देने के भी निर्देश दे दिए हैं। कहा है कि बारिश में बच्चों को जर्जर भवन में न बैठाएं।
-प्रेमचंद्र यादव, बीएसए
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शहर में बेसिक शिक्षा परिषद की ओर संचालित कई स्कूलों के जर्जर भवनों के इस बरसात में गिरने का खतरा बना हुआ है। इनमें बैठकर पढ़ने वाले बच्चों के सिर पर खतरा मंडराता रहता है लेकिन बीएसए और खंड शिक्षा अधिकारी इसको लेकर गंभीर नहीं हैं।शहर में बेसिक शिक्षा से 25 स्कूल संचालित हैं। इनमें तीन जूनियर हाईस्कूल और 22 प्राइमरी स्कूल हैं। इनमें 15 स्कूल पूरी तरह से जर्जर हैं। ये सभी निजी किराए के भवनों में संचालित हैं। इनके भवनों की लंबे समय से मरम्मत नहीं की गई है। मसलन, मोहल्ला कबूलपुरा नंबर एक, नंबर दो और नंबर तीन प्राइमरी स्कूलों के भवन की दशा इतनी जर्जर हैं कि यहां ईटें अक्सर निकलती रहतीं हैं। कई बार बच्चे और शिक्षक बच चुके हैं। नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है और बारिश भी शुरू हो चुकी है, जिसके चलते जर्जर भवनों के गिरने का खतरा लगातार बना हुआ है।
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असंवेदनशील बने अफसर
बदायूं। शहर के जर्जर स्कूलों के बारे में जब भी अधिकारियों से पूछा जाता है तो उनका रटा-रटाया जवाब होता है कि शासन और आला अफसरों को पत्र भेजा गया है। अफसरों की इसी असंवेदनशीलता के चलते बच्चों के सिर पर खतरा बना हुई है।
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इन स्कूलों के भवन हैं जर्जर
मोहल्ला ऊपरपारा, खंडसारी प्रथम और द्वितीय, शहबाजपुर प्रथम और द्वितीय, फरशोरी टोला, टिकटगंज, सराय नौ नंबर प्रथम और द्धितीय, लालपुल, नाहरखां सराय नंबर दो, हल्का नंबर एक, मोहल्ला कबूलपुरा नंबर एक, नंबर दो और नंबर तीन।
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क्या कहते हैं शिक्षक
बरसात के कारण स्कूल भवन में जगह नहीं बचने से बच्चों की छुट्टी करनी पड़ती है। कभी-कभार बच्चों को टूटी छत के ऊपर पन्नी तानकर बैठाना पड़ता है। भवन पूरी तरह से जर्जर हैं।
-बुशरा कौसर, शिक्षिका प्राइमरी स्कूल कबूलपुरा नंबर दो।
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बरसात के कारण भवन परिसर में जलभराव हो गया है। ग्रीन बोर्ड भी भीग गया है। ज्यादातर बच्चे बरसात के कारण घरों को चले जाते हैं। स्कूल में बैठाने में बेहद दिक्कत होती है।
-जेबा इस्माइल शिक्षिका, प्राइमरी स्कूल कबूलपुरा नंबर तीन
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स्कूल भवन पूरी तरह खंडहर हो चुका है। बरसात में तो स्थिति नाजुक ही रहती है। वैसे आम दिनों में सांप आदि निकलते रहते हैं सो मन में डर बना रहता है। दीवारों की ईंटें निकलकर गिरती रहतीं हैं।
-नसरीन सगीर, शिक्षिका प्राइमरी स्कूल कबूलपुरा नंबर एक
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वर्जन-
जर्जर स्कूलों की दशा सुधारने के लिए निदेशालय को पत्र लिख चुके हैं। वहां से मार्गदर्शन मिलते ही जर्जर भवनों वाले स्कूलों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कर दिया जाएगा। वैसे सभी शिक्षकों को बरसात के दिनों में खास ध्यान देने के भी निर्देश दे दिए हैं। कहा है कि बारिश में बच्चों को जर्जर भवन में न बैठाएं।
-प्रेमचंद्र यादव, बीएसए