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Budaun News: 48 करोड़ से होगा कछला घाट का कायाकल्प

Mon, 10 Nov 2025 12:13 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 10 Nov 2025 12:13 AM IST
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Kachla Ghat will be rejuvenated with Rs 48 crore.
कछला गंगाघाट। - फोटो : udhampur news
उझानी। कछला गंगाघाट पर श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिहाज से विकास कार्य कराने के लिए चल रही कवायद अब परवान चढ़ने लगी है। पर्यटन विभाग ने इको टूरिज्म विकसित करने के लिए सर्वे कराने के बाद करीब 48 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इसके बाद नगर पंचायत कछला की ओर से पर्यटन विभाग के बरेली स्थित कार्यालय को अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) भेज दिया गया है।
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गंगाघाट के कायाकल्प के लिए पर्यटन विभाग ने कार्रवाई करीब चार महीना पहले शुरू की थी। नगर पंचायत अध्यक्ष जगदीश सिंह लौनिया चौहान ने बताया कि कछला घाट के मौका मुआयने के बाद पर्यटन विभाग बरेली की टीम ने करीब चार महीना पहले सर्वे कराया, उसी समय से घाट के कायाकल्प की उम्मीद बढ़ गई थी। सर्वे के बाद ही पर्यटन विभाग के इंजीनियरों की टीम ने (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) डीपीआर तैयार की। घाट पर करीब 48 करोड़ रुपये से श्रद्धालुओं की सुविधा के अनुरूप विकास कार्य होने हैं।
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बदायूं और कासगंज जिले के छोर के दोनों ओर बनेंगे पक्के घाट
इको टूरिज्म विकसित करने के लिए प्रस्तावित विकास कार्य में बदायूं और कासगंज जिले के छोर के दोनों ओर पक्के घाट, टॉयेलट ब्लॉक, प्लेटफॉर्म, गजेबी हट्स, महिलाओं के लिए चेंजरूम, बैठने के लिए बेंचें और प्रकाश व्यवस्था किया जाना शामिल है। डीपीआर शासन को भेजे जाने के बाद पर्यटन विभाग ने कछला नगर पंचायत प्रशासन से एनओसी भी मांगी। नगर पंचायत अध्यक्ष ने बताया कि एनओसी भेज दी गई है। जल्द ही धनराशि अवमुक्त होने के आसार हैं। इसके बाद गंगाघाट के कायाकल्प का काम शुरू हो जाएगा।
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जिले में आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है गंगाघाट
कछला गंगाघाट पर डुबकी लगाने के लिए बदायूं जिले के अलावा बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, कासगंज, हाथरस, मथुरा, आगरा, एटा और फिरोजाबाद से श्रद्धालु आते हैं। राजस्थान और मध्यप्रदेश के श्रद्धालु भी यहां आकर स्नान के बाद पूजा-अर्चना करते हैं, लेकिन सुविधा के लिहाज से कोई विशेष व्यवस्था नहीं है। सबसे ज्यादा दिक्कत पक्के घाट के अभाव में गंगा में डुबकी लगाते समय श्रद्धालुओं की जान पर जोखिम को लेकर है।

दो मंदिर समेत पौराणिक तीर्थ स्थल सहसवान में होगा विकास कार्य

- तीनों धार्मिक स्थलों पर 75–75 लाख रुपये से होगा सौंदर्यीकरण
- पर्यटन विभाग ने डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी

संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। जिले में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग ने सहसवान क्षेत्र के महत्वपूर्ण पौराणिक सहस्रबाहु तीर्थ स्थल और दातागंज के धार्मिक स्थल श्रीबाबा देवासदास मंदिर (अस्तल), बदायूं के गांव घौसपुरा में तपोसिद्ध बाबा मंदिर के विकास के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर शासन को भेज दी है। तीनों स्थलों पर 75–75 लाख रुपये की लागत से कार्य करवाने का प्रस्ताव है। इसके बाद यहां पर काम किया जाएगा।

पर्यटन विभाग के अनुसार श्री बाबा देवासदास मंदिर (अस्तल) के विकास पर 75 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इस धनराशि से मंदिर एलईडी स्ट्रीट लाइटें, पेयजल, साफ-सफाई व्यवस्था और मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। ताकी श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण मिले।
इसी प्रकार तपोसिद्ध बाबा मंदिर घौसपुर के विकास पर भी 75 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित है। यहां आने वाले भक्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुविधाओं की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी। प्रस्ताव में बाउंड्रीवॉल, प्रकाश व्यवस्था, सूचना पट्ट, मंदिर परिसर के आसपास हरित क्षेत्र जैसी सुविधाओं को शामिल किया गया है। इससे न केवल भक्तों को सुविधा मिलेगी, बल्कि ग्रामीण स्तर पर रोजगार और व्यावसायिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
तीसरा महत्वपूर्ण स्थल पौराणिक तीर्थ सहस्रबाहु है, जिसके लिए भी 75 लाख रुपये की योजना तैयार की गई है। यह स्थल धार्मिक मान्यता और ऐतिहासिक महत्व के कारण सहसवान की पहचान माना जाता है। प्रस्ताव में तालाब और आसपास के क्षेत्र का संरक्षण, बैठने की व्यवस्था, लाइटिंग सिस्टम, सुरक्षा दीवार जैसे कार्य शामिल हैं।

पर्यटन विभाग का मानना है कि इस तीर्थ स्थल का विकास होने से सहसवान धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। अधिकारियों का कहना है कि डीपीआर शासन को भेज दी गई है और मंजूरी मिलते ही विकास कार्यों को शुरू किया जाएगा। तीनों स्थलों पर 75-75 लाख रुपये की लागत से होने वाले विकास कार्यों से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर, व्यापार में वृद्धि और क्षेत्र की पहचान को नई दिशा मिलेगी।

तीन धार्मिक स्थलों पर 75-75 लाख रुपये से काम किया जाएगा। इसके लिए डीपीआर शासन को भेजी गई है। -मनीष सिंह, पर्यटन अधिकारी बरेली
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