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ककोड़ा में झंडी पूजन, जिला पंचायत को करना पड़ा महंत के विरोध का सामना
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बदायूं/ कादरचौक। जिला पंचायत को ककोड़ा देवी मंदिर में पूजन, गंगा पर झंडी पूजन और गंगा आरती से पहले ककोड़ा देवी मंदिर के महंत के विरोध का सामना करना पड़ गया। झंडी पूजन की परंपरा समय से न निभाए जाने को लेकर महंत समेत साधु-संत नाराज थे। सोमवार सुबह जब जिला पंचायत अध्यक्ष प्रीति सागर, एएमए समेत अन्य अधिकारी झंडी पूजन के लिए ककोड़ा पहुंचे तो मंदिर के महंत धर्मगिरी ने मंदिर के कपाट बंद कर दिए। इस दौरान कुछ नोकझोंक भी हुई। हालांकि, बाद में महंत ने मंदिर के कपाट खोल दिए और जिला पंचायत की ओर से अधिकारिक रूप से झंडी और गंगा पूजन किया गया।
रुहेलखंड के मिनी कुंभ के नाम से प्रसिद्ध मेला ककोड़ा के आयोजन को इस बार शासन ने अनुमति नहीं दी है। मेला ककोड़ा का आयोजन जिला पंचायत की ओर से किया जाता है। मेला आयोजन से पहले कार्तिक माह की सप्तमी को ककोड़ा देवी मंदिर में पूजन के बाद यहां से झंडी लाकर ककोड़ा गंगा घाट पर स्थापित की जाती है। इस बार जिला पंचायत की ओर से झंडी पूजन भी नहीं किया गया। ऐसे में दो दिन पहले गायत्री परिवार और ककोड़ा देवी मंदिर के महंत धर्मगिरी ने गंगा घाट पर झंडी की स्थापना और पूजन किया था। जिला पंचायत की ओर से कहा गया था कि मुख्य स्नान पर्व कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही झंडी और गंगा पूजन का औपचारिक आयोजन किया जाएगा।
समय पर झंडी पूजन न होने से महंत समेत साधु-संतों में नाराजगी थी। सोमवार को कार्तिक पूर्णिमा के मुख्य स्नान पर्व पर जिला पंचायत अध्यक्ष प्रीति सागर, पूर्व विधायक योगेंद्र सागर, एएमए सत्यपाल, प्रशासनिक अधिकारी विनोद यादव, लालता प्रसाद, एसओ प्रयागराज आदि पूजन और झंडी लेने के लिए ककोड़ा देवी मंदिर पहुंचे तो महंत ने मंदिर के कपाट बंद कर दिए। समय से झंडी पूजन की परंपरा तोड़ने पर महंत ने नाराजगी भी जताई। इस दौरान दोनों तरफ से नोकझोंक भी हुई। ककोड़ा के प्रधान अनिल द्विवेदी के समझाने पर करीब एक घंटे बाद महंत झंडी पूजन के लिए राजी हो गए और उन्होंने मंदिर के कपाट खोल दिए। इसके बाद मंदिर के पूजन के बाद यहां से झंडी ले जाकर गंगा तट पर स्थापित की गई।
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कोरोना के खतरे के कारण मेला ककोड़ा के आयोजन की शासन से अनुमति नहीं मिली थी। झंडी और गंगा पूजन के लिए जब सोमवार को हम लोग ककोड़ा देवी मंदिर पहुंचे तो मंदिर के महंत ने पहले से ही मंदिर के कपाट बंद कर दिए था। वह समय से झंडी पूजन न होने के कारण नाराज थे। झंडी पूजन का आयोजन कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही किया जाएगा, इस संबंध में पहले से ही जिला पंचायत ने स्पष्ट कर दिया था। दो दिन पहले महंत ने भी झंडी पूजन किया था। नोकझोंक जैसी कोई बात नहीं है, कुछ लोगों ने महंत को बरगला दिया था। बाद में महंत को मना लिया गया। झंडी और गंगा पूजन का विधिवत आयोजन किया गया है।
- सत्यपाल, एएमए जिला पंचायत
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रुहेलखंड के मिनी कुंभ के नाम से प्रसिद्ध मेला ककोड़ा के आयोजन को इस बार शासन ने अनुमति नहीं दी है। मेला ककोड़ा का आयोजन जिला पंचायत की ओर से किया जाता है। मेला आयोजन से पहले कार्तिक माह की सप्तमी को ककोड़ा देवी मंदिर में पूजन के बाद यहां से झंडी लाकर ककोड़ा गंगा घाट पर स्थापित की जाती है। इस बार जिला पंचायत की ओर से झंडी पूजन भी नहीं किया गया। ऐसे में दो दिन पहले गायत्री परिवार और ककोड़ा देवी मंदिर के महंत धर्मगिरी ने गंगा घाट पर झंडी की स्थापना और पूजन किया था। जिला पंचायत की ओर से कहा गया था कि मुख्य स्नान पर्व कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही झंडी और गंगा पूजन का औपचारिक आयोजन किया जाएगा।
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समय पर झंडी पूजन न होने से महंत समेत साधु-संतों में नाराजगी थी। सोमवार को कार्तिक पूर्णिमा के मुख्य स्नान पर्व पर जिला पंचायत अध्यक्ष प्रीति सागर, पूर्व विधायक योगेंद्र सागर, एएमए सत्यपाल, प्रशासनिक अधिकारी विनोद यादव, लालता प्रसाद, एसओ प्रयागराज आदि पूजन और झंडी लेने के लिए ककोड़ा देवी मंदिर पहुंचे तो महंत ने मंदिर के कपाट बंद कर दिए। समय से झंडी पूजन की परंपरा तोड़ने पर महंत ने नाराजगी भी जताई। इस दौरान दोनों तरफ से नोकझोंक भी हुई। ककोड़ा के प्रधान अनिल द्विवेदी के समझाने पर करीब एक घंटे बाद महंत झंडी पूजन के लिए राजी हो गए और उन्होंने मंदिर के कपाट खोल दिए। इसके बाद मंदिर के पूजन के बाद यहां से झंडी ले जाकर गंगा तट पर स्थापित की गई।
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कोरोना के खतरे के कारण मेला ककोड़ा के आयोजन की शासन से अनुमति नहीं मिली थी। झंडी और गंगा पूजन के लिए जब सोमवार को हम लोग ककोड़ा देवी मंदिर पहुंचे तो मंदिर के महंत ने पहले से ही मंदिर के कपाट बंद कर दिए था। वह समय से झंडी पूजन न होने के कारण नाराज थे। झंडी पूजन का आयोजन कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही किया जाएगा, इस संबंध में पहले से ही जिला पंचायत ने स्पष्ट कर दिया था। दो दिन पहले महंत ने भी झंडी पूजन किया था। नोकझोंक जैसी कोई बात नहीं है, कुछ लोगों ने महंत को बरगला दिया था। बाद में महंत को मना लिया गया। झंडी और गंगा पूजन का विधिवत आयोजन किया गया है।
- सत्यपाल, एएमए जिला पंचायत