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जयंती पर याद किए गए महाकवि तुलसीदास
ब्यूरो, अमर उजाला बदायूं
Updated Sat, 22 Aug 2015 09:00 PM IST
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भगवान परशुराम विद्या मंदिर इंटर कॉलेज नेकपुर में तुलसी जयंती कार्यक्रम में प्रधानाचार्य भीष्म देव मिश्रा ने कहा कि आज के परिवेश में रामचरित मानस को जीवन में उतारा जाए तो आपसी विवाद और समाज की विकृतियां समाप्त हो सकती हैं। तुलसीदास ने अपने काव्य में समन्वय की विराट चेष्टा की है। इसलिए वे एक सच्चे लोकनायक थे। यदि समन्वय स्थापित करना है तो प्रत्येक घर में रामचरितमानस का अध्ययन जरूरी है।
इस अवसर पर तुलसी की चौपाइयों पर आधारित एक अंत्याक्षरी प्रतियोगिता भी हुई। विद्या मंदिर इंटर कॉलेज की टीमों ने प्रतिभाग किया। इस प्रतियोगिता में चंद्रशेखर आजाद टीम ने प्रथम, भगत सिंह टीम ने द्वितीय व रामप्रसाद विस्मिल टीम ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
निर्णायक मंडल में हरवंश सक्सेना, रेखा कुंवर रहीं। इस अवसर पर अशोक सक्सेना, राजकुमार, अवनेश कुमार, कात्यायनी मिश्रा, सुरेश सिंह, कमलेश श्रीवास्तव, राजवीर सिंह, संजय मिश्रा आदि उपस्थित रहे।
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इधर, भारतीय संगोष्ठक के संयोजक अमन मयंक शर्मा के नेतृत्व में संगोष्ठक कार्यालय पर तुलसी जयंती का आयोजन किया गया। तुलसी दास हिंदुस्तान के महान कवियों में से थे। उन्होंने देश ही नहीं पूरे विश्व में ख्याति प्राप्त की। जन-जन की समझ के लिए ही उन्होंने श्री रामचरित मानस की रचना की। इनके द्वारा रचित 12 ग्रंथों में रामचरित मानस सर्वाधिक लोकप्रिय हुई। घर-घर में आज भी धार्मिक ग्रंथ के रूप में मानस रखी जाती है। साहित्य जगत में तुलसी दास जी का नाम हमेशा अमर रहेगा।
इस अवसर पर गौरव पाठक, दिनेश चंद्र शर्मा, नरेश परौलवी ने भी महाकवि तुलसी दास के चरित्र से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
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इस अवसर पर तुलसी की चौपाइयों पर आधारित एक अंत्याक्षरी प्रतियोगिता भी हुई। विद्या मंदिर इंटर कॉलेज की टीमों ने प्रतिभाग किया। इस प्रतियोगिता में चंद्रशेखर आजाद टीम ने प्रथम, भगत सिंह टीम ने द्वितीय व रामप्रसाद विस्मिल टीम ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
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निर्णायक मंडल में हरवंश सक्सेना, रेखा कुंवर रहीं। इस अवसर पर अशोक सक्सेना, राजकुमार, अवनेश कुमार, कात्यायनी मिश्रा, सुरेश सिंह, कमलेश श्रीवास्तव, राजवीर सिंह, संजय मिश्रा आदि उपस्थित रहे।
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इधर, भारतीय संगोष्ठक के संयोजक अमन मयंक शर्मा के नेतृत्व में संगोष्ठक कार्यालय पर तुलसी जयंती का आयोजन किया गया। तुलसी दास हिंदुस्तान के महान कवियों में से थे। उन्होंने देश ही नहीं पूरे विश्व में ख्याति प्राप्त की। जन-जन की समझ के लिए ही उन्होंने श्री रामचरित मानस की रचना की। इनके द्वारा रचित 12 ग्रंथों में रामचरित मानस सर्वाधिक लोकप्रिय हुई। घर-घर में आज भी धार्मिक ग्रंथ के रूप में मानस रखी जाती है। साहित्य जगत में तुलसी दास जी का नाम हमेशा अमर रहेगा।
इस अवसर पर गौरव पाठक, दिनेश चंद्र शर्मा, नरेश परौलवी ने भी महाकवि तुलसी दास के चरित्र से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।