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‘इस्लाम का आतंकवाद से न रहा और न हो सकता कोई ताल्लुक’
सहसवान (बदायूं)
Updated Sun, 06 Dec 2015 12:06 AM IST
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गांव शाहपुर ताहरखेड़ा में एक जलसा जिक्र -ए- शहीदाने कर्बला और औलिया-ए-किराम का आयोजन किया। जलसे की शुरूआत कारी सगीर ने तिलावते कुरान से की। कमाल मियां हाशमी ने नात ए पाक पेश की। मेहमाने खुसुसी जिला पंचायत सदस्य हाफिज मो. इरफान रहे।
बुलंदशहर से आए मौलाना शकील अहमद ने औलिया ए किराम व शहीदाने इस्लाम के बारे में ऐतिहासिक तौर पर बताया कि हमारे बुजुर्गों ने दुनिया के तमाम इंसानों के लिए मोहब्बत का पैगाम देकर आपस में भाईचारा व हमदर्दी के साथ जीने का सबक सिखाया। शनिवार को कुछ गंदी जहनियत रखने वाले लोग इस्लाम को आतंकवाद से जोडकर इस्लाम और मुसलमानों को बदनाम करने की नाकाम कोशिश कर रहें हैं। जबकि मजहबे इस्लाम का आतंकवाद से कभी ताल्लुक न है और न हो सकता है। छत्तीसगढ़ से आए मोलावा अहमद रजा ने कहा कि शहीदाने करबला व औलिया ए किराम से हमारा रूहानी रिस्ता है। उन्होंने नौजवानों से नेक राह अख्तियार करने की अपील की। कार्यक्रम में अमन और खुशहाली की दुआ की। जलसा देर रात तक चला। इस मौके पर कारी खलीर्कुरहमान, कारी तौसीफ, फिजा नूरी, हाफिज अब्दुल रज्जाक, मोलाना जावेद आदि मौजूद रहे।
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बुलंदशहर से आए मौलाना शकील अहमद ने औलिया ए किराम व शहीदाने इस्लाम के बारे में ऐतिहासिक तौर पर बताया कि हमारे बुजुर्गों ने दुनिया के तमाम इंसानों के लिए मोहब्बत का पैगाम देकर आपस में भाईचारा व हमदर्दी के साथ जीने का सबक सिखाया। शनिवार को कुछ गंदी जहनियत रखने वाले लोग इस्लाम को आतंकवाद से जोडकर इस्लाम और मुसलमानों को बदनाम करने की नाकाम कोशिश कर रहें हैं। जबकि मजहबे इस्लाम का आतंकवाद से कभी ताल्लुक न है और न हो सकता है। छत्तीसगढ़ से आए मोलावा अहमद रजा ने कहा कि शहीदाने करबला व औलिया ए किराम से हमारा रूहानी रिस्ता है। उन्होंने नौजवानों से नेक राह अख्तियार करने की अपील की। कार्यक्रम में अमन और खुशहाली की दुआ की। जलसा देर रात तक चला। इस मौके पर कारी खलीर्कुरहमान, कारी तौसीफ, फिजा नूरी, हाफिज अब्दुल रज्जाक, मोलाना जावेद आदि मौजूद रहे।
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