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Budaun News: कुछ और कर्मचारियों की भी संलिप्तता, बचने को मारने लगे हाथ-पैर

Tue, 24 Oct 2023 01:10 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Updated Tue, 24 Oct 2023 01:10 AM IST
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Involvement of some other employees too, they started trying to escape
बदायूं। सहसवान की जिन विवादित जमीनों के मामले में तत्कालीन तहसीलदार और कर्मचारियों पर आरोप तय किए गए हैं, उसमें कई और कर्मचारी भी शामिल हैं। हालांकि जांच में अभी उनके नाम सामने नहीं आए हैं, लेकिन दो कर्मचारियों पर जांच बैठाए जाने के बाद उन्हें भी आगे फंसने का डर सताने लगा है। ऐसे में उन्होंने अधिकारियों समेत अपने राजनीतिक आकाओं से संपर्क साधना शुरू कर दिया है।
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सहसवान की जिस विवादित जमीन के मामले में कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में हैं, उस पर साल 2019 में फर्जी तरीके से वरासत चढ़वाकर कब्जा कर लिया गया था। इसके बाद यहां प्लॉटिंग शुरू कर दी गई। इसी मामले की शिकायत जमशेद उर्फ गुड्डू ने प्रशासन और शासन से की थी। जिसके बाद इसकी जांच शुरू हो गई। इसमें एक लेखपाल, कानूनगो समेत कुछ अन्य कर्मचारियों का नाम भी सामने आए थे। इनमें से एक कर्मचारी इन दिनों जिला मुख्यालय पर तैनात है तो कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं। मामले में अब तत्कालीन तहसीलदार, स्टेनो और पेशकार पर कार्रवाई की तलवार लटकी तो इन कर्मचारियों में भी खलबली मच गई है।
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कभी ट्रांसफर तो कभी चुनाव, टलती रही कार्रवाई : सहसवान की विवादित जमीन के असली मालिक पाकिस्तान चले गए थे। इसलिए उनके रिश्तेदारों के नाम से फर्जीवाड़ा करते हुए उन्हें कुछ रकम पकड़ा दी गई और करोड़ों की जमीन को कब्जे में ले लिया गया। तत्कालीन डीएम कुमार प्रशांत ने इस मामले की गहन जांच कराई थी तो कई फर्जीवाड़े सामने आए थे, जिस पर डीएम ने उस समय 20 साल से वहां तैनात कानूनगो को हटाकर दातागंज भेज दिया था। जबकि तत्कालीन एसडीएम संजय सिंह की शिकायत के बाद आशीष सक्सेना को बिसौली स्थानांतरित कर दिया गया। इस मामले में आर-6 नामांतरण रजिस्टर में एक ही मुकदमा संख्या पर दो बार अमल दरामद कर दिया गया। दूसरी बार कोई विक्रय पत्र भी प्रस्तुत नहीं किया गया। डीएम ने इसकी भी जांच के आदेश दिए थे, लेकिन अधिकारियों के ट्रांसफर और पंचायत और निकाय चुनाव में अधिकारियों की व्यस्तता के साथ इन पर वक्त की धूल पड़ती गई। अब प्रमुख सचिव के आदेश के बाद डीएम मनोज कुमार ने जिस तरह आरोप तय किए हैं, उसने इन कर्मचारियों का बचना मुश्किल होगा।
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ये था मामला : अन्य मामलों समेत सहसवान की जिस विवादित जमीन के मामले में कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में हैं, उसकी मालकिन शमसुल निशा के पति का नाम अली अहमद था। उनके दो बेटे अयूब अहमद और अमीर अहमद तथा तीन बेटियां खुदैजा बेगम, जकिया बेगम और रजिया बेगम थीं। इनमें रजिया को छोड़कर सभी लोग 1953-54 में पाकिस्तान चले गए थे जिसके बाद गाटा संख्या 78, 86/1 व 86/2 शत्रु संपत्ति के रूप में चढ़ गए जबकि अन्य निष्क्रांत संपत्ति में दर्ज हो गई। फर्जीवाड़े की शुरुआत इसके बाद से ही हुई। जमशेद द्वारा की गई शिकायत के अनुसार, तत्कालीन चेयरमैन हबीबुर्ररहमान ने यह संपत्ति अपनी खाला (मौसी) हबीबबानो के नाम से चढ़वा दी। हबीबबानो के पति का नाम अहमद अली था, जो शमसुल निशा के पति अली अहमद जैसा लगता था, इसका फायदा उठाते हुए कागजों में हेरफेर कर ली गई। जमीन का कुछ हिस्सा अयूब खां ने हबीबबानो को बेच भी दिया था। इसके बाद हबीब बानो का इंतकाल ईरान में हो गया। उनका बेटा नवेद कनाडा में और बेटी ईरम दिल्ली में रहती है। साल 2019 में जब इन लोगों की नजर इस जमीन पर पड़ी तो उन्होंने नवेद से संपर्क साधकर इसकी वरासत चढ़वा दी। इसके बाद इन लोगों ने नवेद से पॉवर ऑफ एटार्नी उसकी बहन ईरम के नाम करा ली गई और इरम से यह जमीन बदायूं के एक व सहसवान निवासी दो लोगों के नाम करा ली गई। इसके बाद यहां प्लॉटिंग शुरू कर दी गई।
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