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Budaun News: बेनामी संपत्ति खरीदने वाले तहसीलदार और कर्मचारियों पर कसा शिकंजा

Sun, 29 Jan 2023 11:54 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 29 Jan 2023 11:54 PM IST
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investigation against tehsildar in land scam
बदायूं। सहसवान में शत्रु संपत्ति से सटी विवादित जमीन समेत अन्य बेनामी संपत्तियां खरीदने वाले अधिकारी और कर्मचारियों पर कार्रवाई का फंदा कसने लगा है। डीएम मनोज कुमार ने इस पूरे मामले की जांच एडीएम एफआर संतोष कुमार वैश्य को सौंप दी है। डीएम ने कहा है कि दोषी कर्मचारियों पर हर हाल में कार्रवाई होगी।
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सहसवान की इस जमीन की मालकिन शमसुल निशा के दो बेटे और तीन बेटियां थीं। इनमें एक बेटी को छोड़कर सभी वर्ष 1953-54 में पाकिस्तान चले गए थे। इसके बाद गाटा संख्या 78, 86/1 व 86/2 शत्रु संपत्ति के रूप में चढ़ गए, जबकि बाकी निष्क्रांत संपत्ति में दर्ज हो गई।
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तत्कालीन चेयरमैन हबीबुर्ररहमान ने अपने रसूख के चलते यह संपत्ति बिना किसी बैनामा के अपनी मौसी हबीब बानो के नाम चढ़वा दी। हबीब बानो के इंतकाल के बाद साल 2019 में भूमाफिया ने हबीब बानो के धेवते नवेद से संपर्क करके इसकी वरासत चढ़वा दी।
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खास बात यह रही कि जब पाकिस्तान जाने वाले किसी व्यक्ति ने जमीन का बैनामा ही नहीं किया तो हबीब बानो की वरासत नवेद के नाम कैसे दर्ज हो गई।
साल 2019 में जब इस जमीन को फर्जी कागजों के आधार पर खरीदा गया तो उस समय तहसील में एसडीएम संजय सिंह तैनात थे। उन्होंने तत्कालीन डीएम कुमार प्रशांत से खुद अपने स्टेनो आशीष सक्सेना की शिकायत की थी कि उसने सहसवान में कई बीघा भूमि बेनामी रूप से खरीदी है और कुछ असामाजिक तत्वों को भी इसमें हिस्सेदार बनाते हुए अपनी तरफ मिला लिया है।
इस पर डीएम ने स्टेनो का तबादला बिसौली कर दिया था। इसके अलावा एक और शिकायत के आधार पर जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी ने तत्कालीन तहसीलदार धीरेंद्र कुमार, स्टेनो आशीष समेत कई कर्मचारियों को दोषी करार देते हुए कड़ी कार्रवाई की संस्तुति की थी, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद फाइल दब गई।
चर्चा यह भी है कि इस जांच को दबाने के लिए एक वरिष्ठ लिपिक ने तत्कालीन तहसीलदार से खासी रकम भी ली थी। अब जमीन का यह जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है। अमर उजाला द्वारा मामला उठाए जाने के बाद डीएम मनोज कुमार ने इसकी जांच शुरू करा दी है।
ये किए थे घोटाले
- सहसवान के शहवाजपुर स्थित गाटा संख्या 118, 119, 120, 143, 145 आदि को 88 लाख में खरीदकर प्लाटिंग करके करोड़ों में बेच दिया गया। इसमें सहसवान में उन दिनों तैनात रहे कई कर्मचारियों की भी पार्टनरशिप रही। इन कर्मचारियों ने 44 साल बाद पाकिस्तान जाने वाले लोगों के फर्जी वारिस पैदा कर दिए। वरासत में नवेद के पिता की जगह उसके नाना यानी हबीब बानो के पति खालिद उमर खान का नाम चढ़ा दिया गया। इसके बाद नवेद की बहन इरम के नाम पर जो पावर ऑफ एटार्नी की गई उसमें कोई तारीख भी नहीं थी। इसके अलावा आर-6 के पृष्ठ संख्या 428 तथा 435 पर एक ही वाद संख्या 889 से नाम चढ़ाया गया।

सहसवान की जमीन संबंधी जांच एडीएम एफआर को दी गई है। यह भी कहा है कि यदि इसकी जांच पहले हो चुकी है तो उसे फाइनल करें। इसमें लिप्त जिन लोगों के जो नियंत्रक प्राधिकारी हैं, उन्हें लिखा जाएगा। जो मेरे अंडर हैं, उन पर मैं कार्रवाई करूंगा। दोषियों पर कार्रवाई हर हाल में होगी।
- मनोज कुमार, डीएम
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