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जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मिलेंगी आईसीयू की सुविधाएं
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बदायूं। जिला अस्पताल में तैयार हो चुकी नई इमरजेंसी में अब पुरानी व्यवस्थाएं नहीं चलेंगी। इमरजेंसी एक रूम ऐसा तैयार किया गया है, जिसमें आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) बनेगा। इसमें सात बेड होंगे। प्रत्येक बेड पर ऑक्सीजन और ब्लड प्रेशर, पल्स चेक करने वाली मशीनें उपलब्ध रहेंगी। मरीजों की देखभाल के लिए अनुभवी स्टाफ तैनात किया जाएगा।
जिला अस्पताल की नई इमरजेंसी गंभीर मरीजों को बचाने में काफी कारगर साबित होगी, क्योंकि इसमें वो सुविधाएं मौजूद होंगी। अब ज्यादातर मरीजों को हायरसेंटर रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसमें मरीजों को भर्ती रखने की सुविधा होगी। अलग से एक आईसीयू रूम होगा, जहां एक साथ सात गंभीर मरीजों का उपचार हो सकेगा। इसके लिए डॉक्टर से लेकर से लेकर स्टाफ नर्स और वार्ड ब्वाय अनुभवी तैनात रहेंगे। इमरजेंसी में दवाएं भी पर्याप्त होंगी, कोई दवा कम होने पर तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी। इंजेक्शन से लेकर गोली, ग्लूकोज सब तैयार रहेगा। नई इमरजेंसी में मरीज के तीमारदारों को अंदर जाने की अनुमति नहीं होगी। आईसीयू में तो बिल्कुल नहीं जा सकेंगे, वहां सिर्फ चिकित्सक और स्टाफ के कर्मचारी 24 घंटे तैयार रहेंगे।
अलग होगा ईएमओ रूम
नई इमरजेंसी का एक कमरा ईएमओ के लिए बनाया गया है। जिस तरह पुरानी इमरजेंसी में ईएमओ ड्यूटी करते हैं। उसी तरह नई इमरजेंसी में ड्यूटी करेंगे, लेकिन यहां बेवजह लोगों को जाने की अनुमति नहीं होगी। इसमें मरीज और पुलिस केस से संबंधित मामले पहुंचेंगे।
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तैयारी पूरी, शुरुआत का इंतजार
नई इमरजेंसी बनकर तैयार हो चुकी है। फिर भी कुछ कार्य शेष रह गया है। कहीं पर शीशा नहीं लगा है तो किसी रूम में पंखे नहीं लगे है, तो कहीं लकड़ी का कार्य शेष रह गया है। ये कार्य पूरा करने के लिए कर्मचारी लगे हुए हैं, जो दो-चार दिन में होने का अनुमान है।
मरीजों का बचेगा खर्चा
नई इमरजेंसी में आईसीयू तैयार होने मरीजों का खर्च बचेगा। क्योंकि अब तक अधिकतर मरीजों को हायरसेंटर रेफर कर दिया जाता था। जिन मरीजों का इलाज संभव होता, उन्हें भी बरेली या अलीगढ़ भेज दिया जाता था। आईसीयू बनने से रेफर होने वाले मरीजों की संख्या में कमी आएगी। इससे कम से उन मरीजों का पैसा बचेगा।
नई इमरजेंसी में आईसीयू तैयार किया जा रहा है। जहां आधुनिक संसाधनों से मरीजों का गंभीरता से उपचार होगा। अब मरीजों को ज्यादा रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लगभग तैयारियां हो चुकी हैं। हम जल्द ही इमरजेंसी शुरू करने जा रहे हैं।
- डॉ. भारत भूषण पुष्कर, सीएमएस जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल की नई इमरजेंसी गंभीर मरीजों को बचाने में काफी कारगर साबित होगी, क्योंकि इसमें वो सुविधाएं मौजूद होंगी। अब ज्यादातर मरीजों को हायरसेंटर रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसमें मरीजों को भर्ती रखने की सुविधा होगी। अलग से एक आईसीयू रूम होगा, जहां एक साथ सात गंभीर मरीजों का उपचार हो सकेगा। इसके लिए डॉक्टर से लेकर से लेकर स्टाफ नर्स और वार्ड ब्वाय अनुभवी तैनात रहेंगे। इमरजेंसी में दवाएं भी पर्याप्त होंगी, कोई दवा कम होने पर तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी। इंजेक्शन से लेकर गोली, ग्लूकोज सब तैयार रहेगा। नई इमरजेंसी में मरीज के तीमारदारों को अंदर जाने की अनुमति नहीं होगी। आईसीयू में तो बिल्कुल नहीं जा सकेंगे, वहां सिर्फ चिकित्सक और स्टाफ के कर्मचारी 24 घंटे तैयार रहेंगे।
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अलग होगा ईएमओ रूम
नई इमरजेंसी का एक कमरा ईएमओ के लिए बनाया गया है। जिस तरह पुरानी इमरजेंसी में ईएमओ ड्यूटी करते हैं। उसी तरह नई इमरजेंसी में ड्यूटी करेंगे, लेकिन यहां बेवजह लोगों को जाने की अनुमति नहीं होगी। इसमें मरीज और पुलिस केस से संबंधित मामले पहुंचेंगे।
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तैयारी पूरी, शुरुआत का इंतजार
नई इमरजेंसी बनकर तैयार हो चुकी है। फिर भी कुछ कार्य शेष रह गया है। कहीं पर शीशा नहीं लगा है तो किसी रूम में पंखे नहीं लगे है, तो कहीं लकड़ी का कार्य शेष रह गया है। ये कार्य पूरा करने के लिए कर्मचारी लगे हुए हैं, जो दो-चार दिन में होने का अनुमान है।
मरीजों का बचेगा खर्चा
नई इमरजेंसी में आईसीयू तैयार होने मरीजों का खर्च बचेगा। क्योंकि अब तक अधिकतर मरीजों को हायरसेंटर रेफर कर दिया जाता था। जिन मरीजों का इलाज संभव होता, उन्हें भी बरेली या अलीगढ़ भेज दिया जाता था। आईसीयू बनने से रेफर होने वाले मरीजों की संख्या में कमी आएगी। इससे कम से उन मरीजों का पैसा बचेगा।
नई इमरजेंसी में आईसीयू तैयार किया जा रहा है। जहां आधुनिक संसाधनों से मरीजों का गंभीरता से उपचार होगा। अब मरीजों को ज्यादा रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लगभग तैयारियां हो चुकी हैं। हम जल्द ही इमरजेंसी शुरू करने जा रहे हैं।
- डॉ. भारत भूषण पुष्कर, सीएमएस जिला अस्पताल