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नहीं रुका डेंगू का कहर, दो और लोगों ने दम तोड़ा
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शहर में सिविल लाइंस बरेली रोड पर बजबजाता नाला। संवाद
- फोटो : BADAUN
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उझानी। नगर समेत गांवों में बुखार और डेंगू का प्रकोप कम नहीं हो रहा। उझानी में कन्फेक्शरी व्यापारी की 14 वर्षीय बेटी और पूर्व प्रधान के भाई ने दम तोड़ दिया।
उझानी नगर समेत बसोमा, बरामालदेव में इस बार बुखार और डेंगू का व्यापक प्रकोप रहा। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में अब यहां डेंगू के नए रोगी नहीं मिल रहे हैं वहीं दूसरी ओर निजी अस्पतालों में डेंगू से मौतों का सिलसिला अब तक नहीं थमा है। उझानी के मोहल्ला श्रीनारायणगंज निवासी सौरभ वार्ष्णेय कन्फेशनरी व्यापारी हैं। सौरभ की 14 वर्षीय बेटी इशिका को तीन-चार दिन से बुखार आ रहा था। परिवारवाले निजी डॉक्टर के यहां इलाज करा रहे थे। फायदा न होने पर बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। यहां इलाज के दौरान रविवार रात इशिका की मौत हो गई।
वहीं उझानी के गांव देवरमई के पूर्व प्रधान अहिवरन के भाई तोताराम ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। तोताराम को चार दिन से बुखार आ रहा था। तोताराम के परिवार में दो अन्य लोग भी बीमार हैं।
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कैसे न फैले बीमारी : शहर में सफाई के बाद भी कचरे के ढेर पर भिनभिना रहे मच्छर
बदायूं। डेंगू के प्रकोप ने इस वर्ष जिले में सभी रिकार्ड तोड़ दिए हैं। रविवार को डेंगू के दो नए रोगी मिले थे। सीजन में सोमवार को कोई नया रोगी सामने नहीं आया है, लेकिन उझानी में दो मौतें जरूर हुईं हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग इनको डेंगू से मौत नहीं मान रहा। गंदगी और जलभराव का खतरा अब भी बना हुआ है।
जिले में इस वर्ष पहली बार एलाइजा जांच की व्यवस्था हुई तो सच भी सामने आ गया। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग अब तक जिले में डेंगू के प्रकोप को नकारता रहता था। एलाइजा जांच के लिए सेंपल बरेली, लखनऊ और अलीगढ़ भेजे जाते थे। इस बार एलाइजा जांच की व्यवस्था हुई तो पोल भी खुल गई। सीजन में इस वर्ष रिकार्ड 474 डेंगू के रोगी मिले हैं। 80 से ज्यादा लोगों की मौत भी हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग सिर्फ एक मौत को स्वीकार रहा है।
दरअसल, ज्यादातर लोगों ने निजी पैथोलॉजी में जांच और निजी या फिर झोलाछापों के यहां इलाज कराया था। सोमवार को जिले में डेंगू का कोई नया रोगी न मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कुछ राहत की सांस ली है। दूसरी ओर शहर में फैली गंदगी और नाले चोक होने के कारण अब भी जानलेवा बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
जिले में डेंगू के प्रकोप की एक वजह यह भी रही कि मलेरिया विभाग ने इस बार पायराथ्रेम की फॉगिंग नहीं कराई। नगर पालिका और नगर पंचायतों की ओर से फॉगिंग को लेकर घोर लापरवाही का असर भी शहर के पॉश इलाकों में डेंगू के प्रकोप में रूप में देखने को मिला।
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फिलहाल डेंगू मुक्त नहीं हुआ है जिला
सोमवार को मलेरिया का कोई नया रोगी नहीं मिला है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का भी मानना है कि अभी जिले को डेंगू मुक्त नहीं माना जा सकता। दरअसल, अब भी जिले में 30 से ज्यादा सक्रिय रोगी हैं। इनका अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इसके साथ ही शहर समेत जिले में गंदगी के कारण अब भी डेंगू का खतरा बना हुआ है।
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मेला ककोड़ा में डेंगू का खतरा, जिला पंचायत ने फॉगिंग के लिए लिखा
मेला ककोड़ा में भी डेंगू का खतरा बना हुआ है। हालांकि, यहां स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्टाफ और एंबुलेंस की तैनाती कर दी गई है। हेल्थ कैंप लगाकर लोगों की स्वास्थ्य जांच की भी व्यवस्था की गई है। इस बीच जिला पंचायत ने मलेरिया विभाग को फॉगिंग के लिए लिखा है। दरअसल, मलेरिया विभाग के पास मच्छरनाशक पायराथ्रेम दवा तो है, लेकिन इसकी फॉगिंग के लिए केरोसिन नहीं है। ऐसे में जिला पंचायत ने मलेरिया विभाग को केरोसिन के लिए पांच हजार रुपये भुगतान के लिए भी कहा है। जिला पंचायत की ओर से भुगतान की बात कहे जाने के बाद मलेरिया विभाग ने मेला ककोड़ा में फॉगिंग की तैयारी शुरू कर दी है। मलेरिया निरीक्षक तनवीर सिंह ने बताया कि डीडीटी का छिड़काव शुरू करा दिया गया है। लगातार फॉगिंग की भी व्यवस्था की जा रही है।
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तापमान में कमी आने के साथ डेंगू का प्रकोप भी थमने लगा है। यह बात सही है कि इस वर्ष डेंगू के समसे ज्यादा रोगी मिले हैं, लेकिन डेंगू के कारण कोई जान नहीं गई है। सोमवार को डेंगू का कोई नया रोगी नहीं मिला है। जहां से भी बुखार के प्रकोप की सूचना मिल रही है वहां टीमों को भेजा जा रहा है।
- डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएमओ
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उझानी नगर समेत बसोमा, बरामालदेव में इस बार बुखार और डेंगू का व्यापक प्रकोप रहा। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में अब यहां डेंगू के नए रोगी नहीं मिल रहे हैं वहीं दूसरी ओर निजी अस्पतालों में डेंगू से मौतों का सिलसिला अब तक नहीं थमा है। उझानी के मोहल्ला श्रीनारायणगंज निवासी सौरभ वार्ष्णेय कन्फेशनरी व्यापारी हैं। सौरभ की 14 वर्षीय बेटी इशिका को तीन-चार दिन से बुखार आ रहा था। परिवारवाले निजी डॉक्टर के यहां इलाज करा रहे थे। फायदा न होने पर बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। यहां इलाज के दौरान रविवार रात इशिका की मौत हो गई।
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वहीं उझानी के गांव देवरमई के पूर्व प्रधान अहिवरन के भाई तोताराम ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। तोताराम को चार दिन से बुखार आ रहा था। तोताराम के परिवार में दो अन्य लोग भी बीमार हैं।
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कैसे न फैले बीमारी : शहर में सफाई के बाद भी कचरे के ढेर पर भिनभिना रहे मच्छर
बदायूं। डेंगू के प्रकोप ने इस वर्ष जिले में सभी रिकार्ड तोड़ दिए हैं। रविवार को डेंगू के दो नए रोगी मिले थे। सीजन में सोमवार को कोई नया रोगी सामने नहीं आया है, लेकिन उझानी में दो मौतें जरूर हुईं हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग इनको डेंगू से मौत नहीं मान रहा। गंदगी और जलभराव का खतरा अब भी बना हुआ है।
जिले में इस वर्ष पहली बार एलाइजा जांच की व्यवस्था हुई तो सच भी सामने आ गया। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग अब तक जिले में डेंगू के प्रकोप को नकारता रहता था। एलाइजा जांच के लिए सेंपल बरेली, लखनऊ और अलीगढ़ भेजे जाते थे। इस बार एलाइजा जांच की व्यवस्था हुई तो पोल भी खुल गई। सीजन में इस वर्ष रिकार्ड 474 डेंगू के रोगी मिले हैं। 80 से ज्यादा लोगों की मौत भी हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग सिर्फ एक मौत को स्वीकार रहा है।
दरअसल, ज्यादातर लोगों ने निजी पैथोलॉजी में जांच और निजी या फिर झोलाछापों के यहां इलाज कराया था। सोमवार को जिले में डेंगू का कोई नया रोगी न मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कुछ राहत की सांस ली है। दूसरी ओर शहर में फैली गंदगी और नाले चोक होने के कारण अब भी जानलेवा बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
जिले में डेंगू के प्रकोप की एक वजह यह भी रही कि मलेरिया विभाग ने इस बार पायराथ्रेम की फॉगिंग नहीं कराई। नगर पालिका और नगर पंचायतों की ओर से फॉगिंग को लेकर घोर लापरवाही का असर भी शहर के पॉश इलाकों में डेंगू के प्रकोप में रूप में देखने को मिला।
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फिलहाल डेंगू मुक्त नहीं हुआ है जिला
सोमवार को मलेरिया का कोई नया रोगी नहीं मिला है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का भी मानना है कि अभी जिले को डेंगू मुक्त नहीं माना जा सकता। दरअसल, अब भी जिले में 30 से ज्यादा सक्रिय रोगी हैं। इनका अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इसके साथ ही शहर समेत जिले में गंदगी के कारण अब भी डेंगू का खतरा बना हुआ है।
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मेला ककोड़ा में डेंगू का खतरा, जिला पंचायत ने फॉगिंग के लिए लिखा
मेला ककोड़ा में भी डेंगू का खतरा बना हुआ है। हालांकि, यहां स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्टाफ और एंबुलेंस की तैनाती कर दी गई है। हेल्थ कैंप लगाकर लोगों की स्वास्थ्य जांच की भी व्यवस्था की गई है। इस बीच जिला पंचायत ने मलेरिया विभाग को फॉगिंग के लिए लिखा है। दरअसल, मलेरिया विभाग के पास मच्छरनाशक पायराथ्रेम दवा तो है, लेकिन इसकी फॉगिंग के लिए केरोसिन नहीं है। ऐसे में जिला पंचायत ने मलेरिया विभाग को केरोसिन के लिए पांच हजार रुपये भुगतान के लिए भी कहा है। जिला पंचायत की ओर से भुगतान की बात कहे जाने के बाद मलेरिया विभाग ने मेला ककोड़ा में फॉगिंग की तैयारी शुरू कर दी है। मलेरिया निरीक्षक तनवीर सिंह ने बताया कि डीडीटी का छिड़काव शुरू करा दिया गया है। लगातार फॉगिंग की भी व्यवस्था की जा रही है।
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तापमान में कमी आने के साथ डेंगू का प्रकोप भी थमने लगा है। यह बात सही है कि इस वर्ष डेंगू के समसे ज्यादा रोगी मिले हैं, लेकिन डेंगू के कारण कोई जान नहीं गई है। सोमवार को डेंगू का कोई नया रोगी नहीं मिला है। जहां से भी बुखार के प्रकोप की सूचना मिल रही है वहां टीमों को भेजा जा रहा है।
- डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएमओ