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बदायूं को मायूसी, हीमो डायलिसिस यूनिट को फिलहाल नहीं मिली मंजूरी
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बदायूं। जिला अस्पताल को सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं से लैस करने की कवायद को झटका लग गया है। शासन ने हाल ही में अंबेडकर नगर, बिजनौर, बागपत, फिरोजाबाद, मऊ और फर्रुखाबाद के अस्पतालों में हीमो डायलिसिस यूनिट को मंजूरी दे दी है, लेकिन बदायूं के हाथ से इस बार भी डायलिसिस यूनिट फिसल गई है। दरअसल, जिला अस्पताल के पास हीमो डायलिसिस यूनिट के मानकों के अनुसार भवन का न होना इसमें रोड़ा गया गया है।
जिला अस्पताल का चार्ज संभालने के बाद सीएमएस डॉ. बीबी पुष्कर ने जिला अस्पताल को सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं से लैस करने के लिए कोशिशें शुरू की थीं। शासन स्तर पर उन्होंने यहां हीमो डायलिसिस यूनिट की स्थापना के लिए लिखा-पढ़ी की। प्रस्ताव शासन को भेजा गया। उच्चस्तरीय टीम ने अस्पताल का निरीक्षण भी किया। स्वास्थ्य निदेेशालय की ओर से भी हीमो डायलिसिस यूनिट की स्थापना के जिला अस्पताल प्रशासन से रिपोर्ट मांगी गई। अस्पताल प्रशासन ने रिपोर्ट में भवन न होने की बात स्पष्ट करते हुए कहा था कि भवन निर्माण के लिए अस्पताल परिसर में पर्याप्त जगह उपलब्ध है। स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से सकारात्मक संकेत मिले। निदेशालय द्वारा यूनिट संचालन के लिए अस्पताल स्टाफ को प्रशिक्षण दिलाने के लिए जिला अस्पताल में फिजीशियन रहे डॉ. आशू अग्रवाल इसका प्रशिक्षण ले चुके थे। अब उनका तबादला भी बरेली हो चुका है। अब जब शासन ने कई जिलों के लिए डायलिसिस यूनिट की स्वीकृति दी है तो बदायूं को किनारे कर दिया गया है। इसे अस्पताल को सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं से लैस करने की कवायद को झटके के तौर पर देखा जा रहा है।
- जिला अस्पताल को हीमो डायलिसिस यूनिट को मंजूरी न मिलने की एक वजह बड़ा बजट भी माना जा रहा है। जानकारों की मानें तो डायलिसिस यूनिट की स्थापना का खर्च करीब 15 लाख रुपये है। अगर जिला अस्पताल में मानक के अनुसार भवन होता तो मंजूरी मिल सकती थी। बदायूं जिला अस्पताल में भवन निर्माण पर ही कम से कम 80 लाख रुपया खर्च आएगा। ऐसे में फिलहाल शासन ने इन जिलों को यूनिट दे दी है जहां पहले से भवन तैयार है। ज्यादा बजट के चलते बदायूं में यूनिट की स्थापना से हाथ खींच लिए हैं।
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- जिले में किडनी संबंधी रोगियों की कमी नहीं है। यहां किसी निजी अस्पताल में भी डायलिसिस यूनिट नहीं है। ऐसे में मरीजों को बरेली और लखनऊ की दौड़ लगानी होती है। शहर के किडनी रोड पीड़ित एक व्यक्ति ने बताया कि निजी अस्पताल में एक बार की डायलिसिस पर करीब चार हजार रुपये का खर्च आता है। रोग के अनुसार सप्ताह में एक बार तो कई बार सप्ताह में दो बार तक डायलिसिस करानी होती है। सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस का खर्च न के बराबर आता है। बरेली के जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट है, लेकिन यह खराब पड़ी है। ऐसे में निजी अस्पतालों में जाना मजबूरी है।
हीमोडायलिसिस यूनिट प्रस्तावित है। जिला अस्पताल में यूनिट के मानक के अनुसार भवन नहीं है। हालांकि, हमारे पास जगह पर्याप्त है। इस संबंध में निदेशालय को रिपोर्ट भी भेजी गई थी। भवन निर्माण को अलग से कम से कम 80 लाख का बजट चाहिए। हाल ही में जिन जिला अस्पतालों को यूनिट मिली है, वहां पहले से भवन बने हुए हैं। फर्रुखाबाद में मैने अपनी तैनाती के दौरान ही भवन निर्माण कराया था। शासन की योजना हर वर्ष कुछ अस्पतालों को डायलिसिस यूनिट देने की है। उम्मीद है कि जिला अस्पताल को अगले वर्ष यूनिट मिल जाए। इसके लिए लिखा-पढ़ी की जाएगी।
- डॉ. बीबी पुष्कर, सीएमएस
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जिला अस्पताल का चार्ज संभालने के बाद सीएमएस डॉ. बीबी पुष्कर ने जिला अस्पताल को सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं से लैस करने के लिए कोशिशें शुरू की थीं। शासन स्तर पर उन्होंने यहां हीमो डायलिसिस यूनिट की स्थापना के लिए लिखा-पढ़ी की। प्रस्ताव शासन को भेजा गया। उच्चस्तरीय टीम ने अस्पताल का निरीक्षण भी किया। स्वास्थ्य निदेेशालय की ओर से भी हीमो डायलिसिस यूनिट की स्थापना के जिला अस्पताल प्रशासन से रिपोर्ट मांगी गई। अस्पताल प्रशासन ने रिपोर्ट में भवन न होने की बात स्पष्ट करते हुए कहा था कि भवन निर्माण के लिए अस्पताल परिसर में पर्याप्त जगह उपलब्ध है। स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से सकारात्मक संकेत मिले। निदेशालय द्वारा यूनिट संचालन के लिए अस्पताल स्टाफ को प्रशिक्षण दिलाने के लिए जिला अस्पताल में फिजीशियन रहे डॉ. आशू अग्रवाल इसका प्रशिक्षण ले चुके थे। अब उनका तबादला भी बरेली हो चुका है। अब जब शासन ने कई जिलों के लिए डायलिसिस यूनिट की स्वीकृति दी है तो बदायूं को किनारे कर दिया गया है। इसे अस्पताल को सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं से लैस करने की कवायद को झटके के तौर पर देखा जा रहा है।
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- जिला अस्पताल को हीमो डायलिसिस यूनिट को मंजूरी न मिलने की एक वजह बड़ा बजट भी माना जा रहा है। जानकारों की मानें तो डायलिसिस यूनिट की स्थापना का खर्च करीब 15 लाख रुपये है। अगर जिला अस्पताल में मानक के अनुसार भवन होता तो मंजूरी मिल सकती थी। बदायूं जिला अस्पताल में भवन निर्माण पर ही कम से कम 80 लाख रुपया खर्च आएगा। ऐसे में फिलहाल शासन ने इन जिलों को यूनिट दे दी है जहां पहले से भवन तैयार है। ज्यादा बजट के चलते बदायूं में यूनिट की स्थापना से हाथ खींच लिए हैं।
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- जिले में किडनी संबंधी रोगियों की कमी नहीं है। यहां किसी निजी अस्पताल में भी डायलिसिस यूनिट नहीं है। ऐसे में मरीजों को बरेली और लखनऊ की दौड़ लगानी होती है। शहर के किडनी रोड पीड़ित एक व्यक्ति ने बताया कि निजी अस्पताल में एक बार की डायलिसिस पर करीब चार हजार रुपये का खर्च आता है। रोग के अनुसार सप्ताह में एक बार तो कई बार सप्ताह में दो बार तक डायलिसिस करानी होती है। सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस का खर्च न के बराबर आता है। बरेली के जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट है, लेकिन यह खराब पड़ी है। ऐसे में निजी अस्पतालों में जाना मजबूरी है।
हीमोडायलिसिस यूनिट प्रस्तावित है। जिला अस्पताल में यूनिट के मानक के अनुसार भवन नहीं है। हालांकि, हमारे पास जगह पर्याप्त है। इस संबंध में निदेशालय को रिपोर्ट भी भेजी गई थी। भवन निर्माण को अलग से कम से कम 80 लाख का बजट चाहिए। हाल ही में जिन जिला अस्पतालों को यूनिट मिली है, वहां पहले से भवन बने हुए हैं। फर्रुखाबाद में मैने अपनी तैनाती के दौरान ही भवन निर्माण कराया था। शासन की योजना हर वर्ष कुछ अस्पतालों को डायलिसिस यूनिट देने की है। उम्मीद है कि जिला अस्पताल को अगले वर्ष यूनिट मिल जाए। इसके लिए लिखा-पढ़ी की जाएगी।
- डॉ. बीबी पुष्कर, सीएमएस