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उझानी सीएचसी में ओपीडी का नाम और चिकित्सक कक्ष का स्थान बदला
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उझानी (बदायूं)। रविवार को भगवान धन्वंतरि वाटिका एवं योग, अध्यात्म केंद्र को अमलीजामा पहनाने के लिए शिफ्टिंग शुरू हुई। इसके चलते राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों को संचालित करने वाले कर्मियों ही नहीं बल्कि महिला रोगियों और आंखों के मरीजों की ओपीडी और चिकित्सक कक्ष का स्थान भी बदलना पड़ा। अब मलेरिया और जननी सुरक्षा योजना के मरीजों की निगरानी अस्पताल के फर्स्ट फ्लोर से होगी।
सीएचसी में यह चेंजिंग कोई विभागीय फरमान के बाद नहीं बल्कि चिकित्साधीक्षक के स्तर से की गई है। प्रथम संदर्भन इकाई की सुविधा प्राप्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पुराने भवन में महिलाओं की ओपीडी थी जो अब आपातकालीन कक्ष के पास शिफ्ट कर दी गई है। उसी के पास आंखों के मरीजों की ओपीडी होगी जो पहले चिकित्साधीक्षक के कक्ष के पास होती थी। राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम के तहत जननी सुरक्षा योजना और मलेरिया से जुड़े कर्मियों को कार्यालय फर्स्ट फ्लोर पर होगा। फर्स्ट फ्लोर से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़े कर्मियों को बैठने के लिए नीचे रूम मुहैया कराया गया है। साथ ही आयुष चिकित्सक अब फर्स्ट फ्लोर के बजाय जननी सुरक्षा योजना वाले कमरे में बैठेंगे। रविवार को पूरे दिन यही चलता रहा। सबसे अहम बात तो यह कि ओपीडी ब्लॉक से होकर चिकित्साधीक्षक कक्ष की ओर जाने वाली गैलरी को बंद कर दिया गया है। चिकित्साधीक्षक को अब ओपीडी ब्लॉक के स्थान पर लिखे गए भगवान धन्वंतिर वाटिका-योग, आध्यात्म केंद्र से होकर अपने कक्ष में आना-जाना होगा। इसके पीछे चिकित्साधीक्षक डॉ. महेश प्रताप सिंह का तर्क है कि बदलाव मरीजों की सुविधा के मद्देनजर किया गया है।
कैंपस में वाटिका, सामने कमरे में करिए योग
उझानी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कैंपस में पिछले महीने ही औषधीय पौधों की वाटिका अस्तित्व में आई थी। चिकित्साधीक्षक की मानें तो वाटिका में औषधीय गुणों वाले पौधे तुलसी, वन तुलसी, बकायन, नीम, गिलोय, बहेड़ा, अर्जुन और कचनार रोपे गए हैं। वाटिका के सामने आयुष चिकित्सक प्रभाकर मिश्र को बैठने के लिए जो कमरा दिया गया है, उसी में योग भी कराया जाएगा। अस्पताल में ऐसा भी पहली बार होगा। मिश्र योग के ट्रेनर हैं।
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ओपीडी ब्लॉक और राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों से जुड़े कक्ष में बदलाव विभागीय आदेश पर नहीं बल्कि चिकित्साधीक्षक का फैसला है। ओपीडी ब्लॉक के स्थान पर भगवान धन्वंतरि वाटिका-योग और आध्यात्म केंद्र का नाम क्यों दिया गया, यह तो उसे देखने के बाद ही पता लगेगा।
- डॉ. मंजीत सिंह, प्रभारी, मुख्य चिकित्साधिकारी
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सीएचसी में यह चेंजिंग कोई विभागीय फरमान के बाद नहीं बल्कि चिकित्साधीक्षक के स्तर से की गई है। प्रथम संदर्भन इकाई की सुविधा प्राप्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पुराने भवन में महिलाओं की ओपीडी थी जो अब आपातकालीन कक्ष के पास शिफ्ट कर दी गई है। उसी के पास आंखों के मरीजों की ओपीडी होगी जो पहले चिकित्साधीक्षक के कक्ष के पास होती थी। राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम के तहत जननी सुरक्षा योजना और मलेरिया से जुड़े कर्मियों को कार्यालय फर्स्ट फ्लोर पर होगा। फर्स्ट फ्लोर से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़े कर्मियों को बैठने के लिए नीचे रूम मुहैया कराया गया है। साथ ही आयुष चिकित्सक अब फर्स्ट फ्लोर के बजाय जननी सुरक्षा योजना वाले कमरे में बैठेंगे। रविवार को पूरे दिन यही चलता रहा। सबसे अहम बात तो यह कि ओपीडी ब्लॉक से होकर चिकित्साधीक्षक कक्ष की ओर जाने वाली गैलरी को बंद कर दिया गया है। चिकित्साधीक्षक को अब ओपीडी ब्लॉक के स्थान पर लिखे गए भगवान धन्वंतिर वाटिका-योग, आध्यात्म केंद्र से होकर अपने कक्ष में आना-जाना होगा। इसके पीछे चिकित्साधीक्षक डॉ. महेश प्रताप सिंह का तर्क है कि बदलाव मरीजों की सुविधा के मद्देनजर किया गया है।
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कैंपस में वाटिका, सामने कमरे में करिए योग
उझानी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कैंपस में पिछले महीने ही औषधीय पौधों की वाटिका अस्तित्व में आई थी। चिकित्साधीक्षक की मानें तो वाटिका में औषधीय गुणों वाले पौधे तुलसी, वन तुलसी, बकायन, नीम, गिलोय, बहेड़ा, अर्जुन और कचनार रोपे गए हैं। वाटिका के सामने आयुष चिकित्सक प्रभाकर मिश्र को बैठने के लिए जो कमरा दिया गया है, उसी में योग भी कराया जाएगा। अस्पताल में ऐसा भी पहली बार होगा। मिश्र योग के ट्रेनर हैं।
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ओपीडी ब्लॉक और राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों से जुड़े कक्ष में बदलाव विभागीय आदेश पर नहीं बल्कि चिकित्साधीक्षक का फैसला है। ओपीडी ब्लॉक के स्थान पर भगवान धन्वंतरि वाटिका-योग और आध्यात्म केंद्र का नाम क्यों दिया गया, यह तो उसे देखने के बाद ही पता लगेगा।
- डॉ. मंजीत सिंह, प्रभारी, मुख्य चिकित्साधिकारी