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Budaun News: अस्पताल पंजीकरण में खेल... नाम किसी का, सेवा देता कोई और

Fri, 08 Sep 2023 02:04 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Updated Fri, 08 Sep 2023 02:04 AM IST
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Game in hospital registration... someone's name, someone else provides service
बदायूं। सीएमओ कार्यालय में निजी अस्पतालों, अल्ट्रासाउंड सेंटर और पैथोलॉजी लैब का रजिस्ट्रेशन कराने में खेल चल रहा है। पंजीकरण प्रक्रिया में जिन डॉक्टर, फार्मासिस्ट या लैब टेक्नीशियन के नाम दर्ज कराए जाते हैं, हकीकत में उन्हें सीएमओ कार्यालय बुलाया ही नहीं जाता। उनसे यह तक भी नहीं पूछा जाता कि वह संबंधित अस्पताल या अल्ट्रासाउंड सेंटर में काम कर रहे हैं या दूसरे में। उन्हें बिना बुलाए ही रजिस्ट्रेशन कर दिया जाता है।
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इसका खुलासा मंगलवार शाम को सीएमओ की ओर से जारी किए गए एक प्रेसनोट में हुआ। उसमें राजश्री हॉस्पिटल के एक ऐसे डॉक्टर का जिक्र था, जिनके बिना बताए ही रजिस्ट्रेशन में उनका नाम लिखवाने का आरोप लगाया था। सीएमओ कार्यालय में राजश्री हॉस्पिटल के रजिस्ट्रेशन की कॉपी मौजूद है। इस हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन करीब एक साल पहले हुआ था। तब से हॉस्पिटल चल रहा था। उसका नाम स्वास्थ्य विभाग की सूची में भी शामिल था।
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इसके बावजूद एक साल तक सीएमओ कार्यालय का कोई जिम्मेदार यह पता करने हॉस्पिटल नहीं पहुंचा कि जिन डॉक्टरों के नाम रजिस्ट्रेशन में दर्ज हैं, वो हॉस्पिटल में आ रहे हैं या नहीं। वहां प्रसव कौन चिकित्सक करता है, ऑपरेशन कौन करता है और कौन एनेस्थेसिया देता है। जब हॉस्पिटल में नौ मार्च को प्रसूता की मौत हुई तो अगल दिन ही अस्पताल को सील कर दिया गया।
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इसके बाद स्वास्थ्य अधिकारियों की जांच शुरू हुई। इस बीच अस्पताल संचालक पर दो मामले दर्ज कराए गए, लेकिन किसी में डॉक्टर के मुकरने का जिक्र नहीं है। 10 मार्च से अब तक डॉक्टर भी सामने नहीं आया और न ही विभाग की ओर से कोई प्रतिक्रिया व्यक्त की गई। जब अधिकारी खुद फंसने लगे तो मंगलवार शाम प्रेसनोट जारी कर सफाई पेश कर दी। यह सिर्फ इसी अस्पताल का मामला नहीं है, जिले के अधिकतर अस्पतालों में ऐसा ही चल रहा है।
बाबू बोला- बुलाए नहीं जाते डॉक्टर, खुद आते हैं

सीएमओ कार्यालय में निजी अस्पतालों का पंजीकरण पटल देखने वाले लिपिक पारस का कहना है कि अस्पतालों के डॉक्टरों को बुलाया नहीं जाता है, वे खुद आते हैं। यह वही बाबू हैं, जिनकी ऑडियो रिकॉर्डिंग यह मामला सामने आने के बाद वायरल हुई। वह अस्पताल संचालक से यह कहते सुने गए कि वह सीएमओ के नाम एक माफीनामा लिख दें, उसमें लिखें कि मीडिया के दबाव में आकर उन पर कार्रवाई कराई गई है। उससे बिना पूछे ही कार्रवाई कर दी गई।

निजी अस्पताल के रजिस्ट्रेशन में जिस डॉक्टर का नाम लिखा होता है, उसकी जांच होनी चाहिए। एक बार जाकर देख भी लिया जाता है, लेकिन राजश्री हॉस्पिटल के मामले में क्या रहा, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। वो तो डॉक्टर ने अपना हल्फनामा दिया था, जिससे प्रेसनोट में लिखा गया कि उसका नाम गलत तरीके से लिखाया गया है।- डॉ. तहसीन, प्रभारी सीएमओ एवं जिला सर्विलांस अधिकारी
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