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Budaun News: पहले सास और फिर पत्नी के नाम वरासत कराकर हड़पी 10 बीघा जमीन

Sat, 03 May 2025 01:15 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 03 May 2025 01:15 AM IST
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First he got 10 bigha land transferred in the name of his mother-in-law and then his wife
दातागंज। तहसील क्षेत्र के एक गांव में मृतक की फर्जी तौर पर बहन बनकर 10 बीघा जमीन पर कब्जा कर लिया गया। कब्जा करने वाले ने उस जमीन को पहले अपने सास के नाम करवाया और फिर पत्नी के नाम वरासत करवा ली। कब्जा करने वाले को हाईकोर्ट से स्टे भी मिल गया है। इसलिए असली वारिस की मुसीबत बढ़ गई है। अब पीड़ित स्टे खारिज कराने के लिए वाद दायर करेंगे। हालांकि तहसील कोर्ट से उनके पक्ष में फैसला हो चुका है।
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गांव रयपुरा के हेमराज ने बताया कि उनके चाचा भग्गू और रामचंद्र की करीब 35 साल पहले मृत्यु हो चुकी है। उनके पास 20 बीघा से अधिक जमीन थी। उसमें से 10 बीघा जमीन की वरासत हम लोगों के नाम हो गई और 10 बीघा, 11 विस्वा जमीन की वरासत नहीं हो पाई थी। गांव के ही एक नेता ने वरासत कराने का आश्वासन देकर उनसे 10 हजार रुपये ले लिए, लेकिन तीन साल पहले ही उसने वरासत बरेली जनपद के गांव रहमतपुर की अपनी सास ओमवती के नाम करा ली।
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लेखपाल से मिलकर उसने अपनी सास को भग्गू और रामचंद्र की बहन दर्शा दिया था। वरासत हो जाने के कुछ समय बाद ओमवती ने अपनी पुत्री नगरिया खनू गांव की पुष्पा के नाम वरासत कर दी। इसकी जानकारी जब असली वारिस हेमराज को हुई तो उन्होंने तहसीलदार कोर्ट में वाद दायर कर दिया। नायब तहसीलदार ने ओमवती और पुष्पा की वरासत को खारिज करके असली वारिस हेमराज को मान लिया। इसी बीच गांव वालों का दबाव पड़ने पर गांव के पंचों के बीच इस फर्जीवाड़ा को अंजाम देने वाले व्यक्ति ने स्टांप पेपर पर लिखकर दे दिया कि इस जमीन से उसका कोई संबंध नहीं है। जमीन हेमराज और उसके परिवार के लोगों की है, लेकिन बाद में वह हाईकोर्ट चला गया और वरासत के आधार पर स्टे ले आया। अब हेमराज पक्ष परेशान है। हेमराज का कहना है कि हाईकोर्ट में हम तहसील कोर्ट की नकल के साथ स्टे को खारिज कराने को वाद दायर करेंगे। ग्रामीणों ने बताया कि ऐसे ही कुछ और जमीनों पर भी अवैध कब्जे हैं।
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