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आंगनबाड़ी वर्कर के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर
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बदायूं। बाल विकास परियोजना अधिकारी सहसवान ने आंगनबाड़ी वर्कर मोरश्री के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई है। उसके अंकपत्र और स्कूल के अभिलेखों में काफी अंतर पाया गया है। इससे माना जा रहा है कि उसने धोखा देकर आंगनबाड़ी की नौकरी हासिल की। शिकायत पर जांच कराई गई तो मामला फर्जीबाड़े का निकला।
सहसवान के मोहल्ला पट्टी यकीन निवासी निगहत बेगम ने अधिकारियों से शिकायत की थी कि मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव परमू निवासी मोरश्री पत्नी मुकेश को हाईस्कूल और इंटर के फर्जी अंक पत्रों व प्रमाण पत्रों के आधार पर आंगनबाड़ी वर्कर की नौकरी मिली है। वह फर्जी अभिलेखों से नौकरी कर रही है लेकिन उसकी जांच नहीं कराई गई। अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और इसकी जांच शुरू करा दी। जांच के दौरान पता चला कि उसने गांधी हायर सेकेंडरी स्कूल शाही (बरेली) से हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इंटर भी गांधी इंटर कॉलेज शाही बरेली से किया था। उसने स्वयं प्रमाणित छाया प्रतियों की कॉपी लगाई थी। उसके अंक पत्रों का मिलान ठीक निकला। उसके हाईस्कूल के अंक पत्र में जन्मतिथि 1968 लिखी हुई थी लेकिन स्कूल के अभिलेखों में जन्मतिथि 1965 दर्ज पाई गई। इसके अलावा उसने जो भी अभिलेख लगाए थे। सभी में जन्मतिथि 1968 लिखी हुई थी। इससे माना गया कि आंगनबाड़ी वर्कर ने जानबूझकर जन्मतिथि में फेरबदल किया। अंकपत्र पर ओवरराइट किया गया था। इसके आधार पर परियोजना अधिकारी ने आंगनबाड़ी वर्कर मोरश्री के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई है।
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सहसवान के मोहल्ला पट्टी यकीन निवासी निगहत बेगम ने अधिकारियों से शिकायत की थी कि मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव परमू निवासी मोरश्री पत्नी मुकेश को हाईस्कूल और इंटर के फर्जी अंक पत्रों व प्रमाण पत्रों के आधार पर आंगनबाड़ी वर्कर की नौकरी मिली है। वह फर्जी अभिलेखों से नौकरी कर रही है लेकिन उसकी जांच नहीं कराई गई। अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और इसकी जांच शुरू करा दी। जांच के दौरान पता चला कि उसने गांधी हायर सेकेंडरी स्कूल शाही (बरेली) से हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इंटर भी गांधी इंटर कॉलेज शाही बरेली से किया था। उसने स्वयं प्रमाणित छाया प्रतियों की कॉपी लगाई थी। उसके अंक पत्रों का मिलान ठीक निकला। उसके हाईस्कूल के अंक पत्र में जन्मतिथि 1968 लिखी हुई थी लेकिन स्कूल के अभिलेखों में जन्मतिथि 1965 दर्ज पाई गई। इसके अलावा उसने जो भी अभिलेख लगाए थे। सभी में जन्मतिथि 1968 लिखी हुई थी। इससे माना गया कि आंगनबाड़ी वर्कर ने जानबूझकर जन्मतिथि में फेरबदल किया। अंकपत्र पर ओवरराइट किया गया था। इसके आधार पर परियोजना अधिकारी ने आंगनबाड़ी वर्कर मोरश्री के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई है।
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