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Budaun News: कुत्तों का खौफ, जिले में करीब 1700 लोग प्रतिदिन लगवा रहे एंटी रैबीज इंजेक्शन
Mon, 29 Dec 2025 10:58 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Mon, 29 Dec 2025 10:58 PM IST
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जिला अस्पताल में एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगवाने के लिए लगी मरीजों की लाइन। संवाद
बदायूं। सर्दी के मौसम में जिलेभर में आवारा कुत्तों के हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि शहर से लेकर गांव तक लोग दहशत में हैं और जिला अस्पताल समेत सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
जिला अस्पताल में आम दिनों में जहां रोजाना लगभग 200 लोग एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने आते थे, वहीं पिछले एक सप्ताह से यह संख्या लगातार बढ़ी है। सोमवार को यह आंकड़ा 350 के पार पहुंच गया। ओपीडी से लेकर इंजेक्शन काउंटर तक मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं। कई मरीजों को नंबर आने तक घंटों इंतजार करना पड़ा।
जानकारों का कहना है कि इस समय जिले में रोजाना 500 से अधिक लोग कुत्तों के काटने का शिकार बन रहे हैं। शहरों में जहां गली-मोहल्लों में आवारा कुत्तों के झुंड घूम रहे हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों में खेतों और रास्तों पर कुत्तों के हमले बढ़ गए हैं। इससे बच्चों का स्कूल जाना, महिलाओं का बाहर निकलना और बुजुर्गों का सुबह-शाम टहलना मुश्किल हो गया है।
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हर दिन 1400 रैबीज के मरीज
-जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर भी हालात चिंताजनक हैं। पहले जहां प्रतिदिन लगभग 800 मरीज एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 1400 प्रतिदिन तक पहुंच गई है। ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। कई अभिभावकों ने बताया कि गांवों में आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और वे झुंड में हमला कर देते हैं, जिससे हादसों का खतरा लगातार बना हुआ है।
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सर्दी में आक्रामक हो जाते कुत्ते
-जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आरके वर्मा ने बताया कि सर्दी के मौसम में कुत्तों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं, क्योंकि इस समय भोजन की तलाश में वे ज्यादा इधर-उधर घूमते हैं और आक्रामक हो जाते हैं। इसी कारण काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि कुत्ते के काटने की स्थिति में लोग घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत घाव को कम से कम 15 मिनट तक साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोएं। इसके बाद नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचकर एंटी रैबीज इंजेक्शन जरूर लगवाएं और डॉक्टर द्वारा बताए गए पूरे कोर्स को समय पर पूरा करें। डॉ. राजेश वर्मा ने कहा कि रैबीज एक जानलेवा बीमारी है और इसमें लापरवाही जान पर भारी पड़ सकती है। इसलिए घरेलू इलाज या झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें और तुरंत मेडिकल सहायता लें।
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वर्जन
-जिले के सभी सीएचसी और पीएचसी पर एंटी रैबीज इंजेक्शन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है। किसी भी केंद्र पर मरीजों को दवा या इंजेक्शन की कमी नहीं है। जहां भी जरूरत पड़ेगी वहां अतिरिक्त स्टॉक भेजा जाएगा।
-डॉ. रामेश्वर मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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जिला अस्पताल में आम दिनों में जहां रोजाना लगभग 200 लोग एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने आते थे, वहीं पिछले एक सप्ताह से यह संख्या लगातार बढ़ी है। सोमवार को यह आंकड़ा 350 के पार पहुंच गया। ओपीडी से लेकर इंजेक्शन काउंटर तक मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं। कई मरीजों को नंबर आने तक घंटों इंतजार करना पड़ा।
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जानकारों का कहना है कि इस समय जिले में रोजाना 500 से अधिक लोग कुत्तों के काटने का शिकार बन रहे हैं। शहरों में जहां गली-मोहल्लों में आवारा कुत्तों के झुंड घूम रहे हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों में खेतों और रास्तों पर कुत्तों के हमले बढ़ गए हैं। इससे बच्चों का स्कूल जाना, महिलाओं का बाहर निकलना और बुजुर्गों का सुबह-शाम टहलना मुश्किल हो गया है।
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हर दिन 1400 रैबीज के मरीज
-जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर भी हालात चिंताजनक हैं। पहले जहां प्रतिदिन लगभग 800 मरीज एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 1400 प्रतिदिन तक पहुंच गई है। ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। कई अभिभावकों ने बताया कि गांवों में आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और वे झुंड में हमला कर देते हैं, जिससे हादसों का खतरा लगातार बना हुआ है।
सर्दी में आक्रामक हो जाते कुत्ते
-जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आरके वर्मा ने बताया कि सर्दी के मौसम में कुत्तों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं, क्योंकि इस समय भोजन की तलाश में वे ज्यादा इधर-उधर घूमते हैं और आक्रामक हो जाते हैं। इसी कारण काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि कुत्ते के काटने की स्थिति में लोग घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत घाव को कम से कम 15 मिनट तक साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोएं। इसके बाद नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचकर एंटी रैबीज इंजेक्शन जरूर लगवाएं और डॉक्टर द्वारा बताए गए पूरे कोर्स को समय पर पूरा करें। डॉ. राजेश वर्मा ने कहा कि रैबीज एक जानलेवा बीमारी है और इसमें लापरवाही जान पर भारी पड़ सकती है। इसलिए घरेलू इलाज या झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें और तुरंत मेडिकल सहायता लें।
वर्जन
-जिले के सभी सीएचसी और पीएचसी पर एंटी रैबीज इंजेक्शन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है। किसी भी केंद्र पर मरीजों को दवा या इंजेक्शन की कमी नहीं है। जहां भी जरूरत पड़ेगी वहां अतिरिक्त स्टॉक भेजा जाएगा।
-डॉ. रामेश्वर मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी