{"_id":"6a3adda839cd31814f07a9d2","slug":"farmers-take-to-the-streets-against-the-us-trade-deal-badaun-news-c-123-1-sbly1001-166846-2026-06-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ सड़कों पर उतरे किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ सड़कों पर उतरे किसान
विज्ञापन
मालवीय आवास पर पंचायत करते भाकियू (चढ़ूनी) के पदाधिकारी। स्रोत संगठन
बदायूं। भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार (ट्रेड) समझौते के विरोध में मंगलवार को भाकियू (चढ़ूनी) के पदाधिकारियों ने मालवीय आवास पर पंचायत की। काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करते हुए किसानों ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सदर तहसीलदार को दिया।
जिलाध्यक्ष सतीश साहू ने कहा कि देश का किसान पहले से ही बढ़ती लागत, फसलों के कम दाम, प्राकृतिक आपदाओं और कर्ज के बोझ से जूझ रहा है। ऐसे समय में यदि विदेशी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में प्रवेश दिया गया तो किसानों की आय पर सीधा असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि भारत में खेती आजीविका का साधन है, जबकि विकसित देशों में यह व्यापार का माध्यम है। विदेशी कंपनियों के सस्ते उत्पाद बाजार में आने से भारतीय किसानों की उपज का मूल्य गिर जाएगा। खेती घाटे का सौदा बन जाएगी। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति और कमजोर होगी।
विज्ञापन
किसानों ने यह भी आशंका जताई कि प्रस्तावित ट्रेड डील से बहुराष्ट्रीय कंपनियों का कृषि क्षेत्र में दखल बढ़ेगा। इससे निजीकरण और कॉर्पोरेट नियंत्रण को बढ़ावा मिलेगा। यादवेंद्र सिंह यादव ने कहा कि यदि किसानों के हितों की अनदेखी कर कोई व्यापार समझौता लागू किया गया तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। ज्ञापन कार्यक्रम में बीयशु दास, भगवान दास शाक्य, अजय सैनी, रजनेश उपाध्याय, इरशाद खान, शराफत, मुमताज, नूरुद्दीन, शरीफ अब्बासी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
जिलाध्यक्ष सतीश साहू ने कहा कि देश का किसान पहले से ही बढ़ती लागत, फसलों के कम दाम, प्राकृतिक आपदाओं और कर्ज के बोझ से जूझ रहा है। ऐसे समय में यदि विदेशी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में प्रवेश दिया गया तो किसानों की आय पर सीधा असर पड़ेगा।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि भारत में खेती आजीविका का साधन है, जबकि विकसित देशों में यह व्यापार का माध्यम है। विदेशी कंपनियों के सस्ते उत्पाद बाजार में आने से भारतीय किसानों की उपज का मूल्य गिर जाएगा। खेती घाटे का सौदा बन जाएगी। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति और कमजोर होगी।
विज्ञापन
किसानों ने यह भी आशंका जताई कि प्रस्तावित ट्रेड डील से बहुराष्ट्रीय कंपनियों का कृषि क्षेत्र में दखल बढ़ेगा। इससे निजीकरण और कॉर्पोरेट नियंत्रण को बढ़ावा मिलेगा। यादवेंद्र सिंह यादव ने कहा कि यदि किसानों के हितों की अनदेखी कर कोई व्यापार समझौता लागू किया गया तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। ज्ञापन कार्यक्रम में बीयशु दास, भगवान दास शाक्य, अजय सैनी, रजनेश उपाध्याय, इरशाद खान, शराफत, मुमताज, नूरुद्दीन, शरीफ अब्बासी आदि मौजूद रहे।