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किसानों को पता नहीं, बन गए लाखों के कर्जदार

Fri, 05 Jun 2015 07:39 PM IST
badaun
badaun Updated Fri, 05 Jun 2015 07:39 PM IST
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दातागंज क्षेत्र में एचडीएफसी बैंक और यूनियन बैंक का लोन ऐसे किसानों को दे दिया गया, जिनको खुद पता नहीं कि उन पर किसी बैंक का लोन है? इंतखाब लेने गए किसानों को इंतखाब देखकर पता लगा है कि वे लाखों के कर्जदार हो गए हैं। हालात तो इतने खराब हैं कि जिस जमीन पर किसानों को कर्ज दिया गया है, वह जमीन नदी में समाई हुई है। शिकायतें हुईं तो इसकी जांच शुरू हुई है। प्रकरण सामने आया तो बैंक प्रबंधन में भी खलबली मची हुई है।

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दातागंज क्षेत्र की ग्राम पंचायत खेड़ा जलालपुर के गांव बल्ले नगला निवासी मुन्नालाल पुत्र नैनसुख ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में शिकायत की थी कि वर्ष 2013 में उनके और उनके भाई राजवीर, राजपाल पर छह लाख, 30 हजार रुपये का एचडीएफसी बैंक का लोन दर्शाया गया है। उन्होंने ऐसा कोई लोन नहीं लिया है। इसकी जानकारी उन्हें तब हुई, जब उन्होंने अपनी जमीन का इंतखाब लिया। यही नहीं उनके अलावा नत्थू सिंह पुत्र रामदयाल पर इसी प्रकार यूनियन बैंक का 2013 में तीन लाख लोन दर्शाया गया है। अभिलेखों में लोन चढ़ा हुआ है। इन्होंने भी कभी लोन नहीं लिया है। यूनियन बैंक के प्रबंधक मुकेश ने तो अपने लेटर पैड पर लिखकर भी दिया है कि नत्थू सिंह का कोई खाता नहीं है। खाता नहीं है, लेकिन बैंक का बंधक पत्र उनके पास कैसे पहुंच गया? इस लोन के संबंध में मुन्नालाल और मोर पाल पुत्र लालाराम को गवाह बनाया गया है। जब जांच में इन लोगों से पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट मना कर दिया कि उन्होंने कोई गवाही नहीं दी है। इस प्रकरण की शिकायत पर जांच कर रहे जांच अधिकारी नायब तहसीलदार सतीश कुमार ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि लोन लिया ही नहीं गया है। किसानों की बिना जानकारी के लोन के मामले में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है। जिन तीन भाइयों को लोन दिया गया है। उनकी जमीन नदी में है।
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ऐसे में बैंक प्रबंधन द्वारा लोन देने से पहले किए जाने वाले भौतिक सत्यापन पर भी सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल अभी इस प्रकरण की जांच चल रही है। बिना लोन लिए कर्जदार हुए किसानों ने इस मामले में डीएम से उच्च स्तरीय जांच कराकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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