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Budaun News: 385 रुपये प्रति क्विंटल घाटे पर आढ़तियों को गेहूं बेच रहे किसान
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दातागंत। बारदाना न होने की बात कहकर गेहूं क्रय केंद्रों से किसानों को लौटा दिया जा रहा है। 30 मार्च से खरीद शुरू होने पर दातागंज के चार क्रय केंद्रों पर कुल 3600 क्विंटल गेहूं की ही खरीद हो सकी है। उपेक्षा का शिकार किसान अपना गेहूं आढ़तियों पर 2200 से 2450 के बीच में बेच रहे हैं। इससे उन्हें सरकारी खरीद 2585 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले 385 रुपये से लेकर 135 रुपये तक का घाटा उठाना पड़ रहा है।
दातागंज की मंडी में चार क्रय केंद्र हैं। इनमें तीन आरएफसी और एक पीसीएफ का है। आरएफसी की केंद्र प्रभारी मधु यादव ने बताया कि अभी चारों केंद्रों पर 3600 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई है। यहां बता दें कि सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं का भाव 2585 रुपये निर्धारित है। मार्केट में आढ़ती 2200 से 2450 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीददारी कर रहे हैं। अधिकतम दामों पर रुकें तो 135 रुपये का नुकसान हो रहा। अगर वे 2200 रुपये में गेहूं बेचते हैं तो उन्हें 385 प्रति क्विंटल की क्षति हो रही है।
कम कीमत के बारदाने पर क्रय केंद्र संचालकों की नजर
केंद्र पर जानकारी लेने पर पता लगा कि पहले बारदाना गोदामों से आता था। इसके लिए अब खरीद केंद्र कोटेदारों पर बारदाने काे आश्रित हो गए हैं। नया बारदाना 65 से 70 रुपये प्रति बोरा है। वन यूज बारदाना को इसमें इस्तेमाल की छूट है। सो, क्रय केंद्र संचालक कोटेदार से 50 प्रतिशत कम का रेट देकर इसके इस्तेमाल को वरीयता दे रहे हैं।यह मिल नहीं पा रहा है। कोटेदार कहते हैं कि इस संबंध में उनकी किसी क्रय केंद्र से बात ही नहीं हुई है।
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किसान हीं नहीं बटाईदार भी हो रहे हैं रजिस्टर्ड
किसानों का आरोप है कि क्रय केंद्रों पर किसानों के बटाईदारों को रजिस्टर्ड करके खेल खेला जा रहा है ताकि बाद में आढ़तियों को गेहूं उनके नाम से खरीद लिया जाए, जो किसान यहां अबतक खरीद केंद्रों पर गेहूं डाल चुके हैं, उनके ही बटाईदारों का अतिरिक्त रजिस्टेशन कर लिया गया है। जांच में इसका पर्दाफाश भी हो सकता है। बारदाना की कमी बताना तो इसी खेल का एक हिस्सा है।
शासन ने बारदाने के अभी कोई रेट नहीं खोले हैं। बारदाने की कमी है। पिछले माह 1400 बोरे करीब आए थे, वे खरीद केंद्रों को बांट दिए गए हैं। -राजेंद्र कुमार, पूर्ति निरीक्षक, दातागंज, बदायूं
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दातागंज की मंडी में चार क्रय केंद्र हैं। इनमें तीन आरएफसी और एक पीसीएफ का है। आरएफसी की केंद्र प्रभारी मधु यादव ने बताया कि अभी चारों केंद्रों पर 3600 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई है। यहां बता दें कि सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं का भाव 2585 रुपये निर्धारित है। मार्केट में आढ़ती 2200 से 2450 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीददारी कर रहे हैं। अधिकतम दामों पर रुकें तो 135 रुपये का नुकसान हो रहा। अगर वे 2200 रुपये में गेहूं बेचते हैं तो उन्हें 385 प्रति क्विंटल की क्षति हो रही है।
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कम कीमत के बारदाने पर क्रय केंद्र संचालकों की नजर
केंद्र पर जानकारी लेने पर पता लगा कि पहले बारदाना गोदामों से आता था। इसके लिए अब खरीद केंद्र कोटेदारों पर बारदाने काे आश्रित हो गए हैं। नया बारदाना 65 से 70 रुपये प्रति बोरा है। वन यूज बारदाना को इसमें इस्तेमाल की छूट है। सो, क्रय केंद्र संचालक कोटेदार से 50 प्रतिशत कम का रेट देकर इसके इस्तेमाल को वरीयता दे रहे हैं।यह मिल नहीं पा रहा है। कोटेदार कहते हैं कि इस संबंध में उनकी किसी क्रय केंद्र से बात ही नहीं हुई है।
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किसान हीं नहीं बटाईदार भी हो रहे हैं रजिस्टर्ड
किसानों का आरोप है कि क्रय केंद्रों पर किसानों के बटाईदारों को रजिस्टर्ड करके खेल खेला जा रहा है ताकि बाद में आढ़तियों को गेहूं उनके नाम से खरीद लिया जाए, जो किसान यहां अबतक खरीद केंद्रों पर गेहूं डाल चुके हैं, उनके ही बटाईदारों का अतिरिक्त रजिस्टेशन कर लिया गया है। जांच में इसका पर्दाफाश भी हो सकता है। बारदाना की कमी बताना तो इसी खेल का एक हिस्सा है।
शासन ने बारदाने के अभी कोई रेट नहीं खोले हैं। बारदाने की कमी है। पिछले माह 1400 बोरे करीब आए थे, वे खरीद केंद्रों को बांट दिए गए हैं। -राजेंद्र कुमार, पूर्ति निरीक्षक, दातागंज, बदायूं