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छतुइया ब्लैक स्पॉट..अतिक्रमण नहीं हटा तो जाती रहेगी राहगीरों की जान
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उझानी (बदायूं)। बरेली-मथुरा हाईवे के ब्लैक स्पॉट में दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र बने छतुइया रेल फाटक के आसपास इलाके में अतिक्रमण राहगीरों की जान पर भारी पड़ता जा रहा है। फाटक के दोनों ओर एक तो तीव्र मोड़ हैं, उस पर सड़क किनारे अतिक्रमण बढ़ जाने से वाहन चालकों को दूसरे वाहनों का सही ढंग से अंदाजा नहीं लग पाता। पीडब्ल्यूडी ने हालांकि इसे काफी पहले ही ब्लैक स्पॉट तो घोषित कर दिया, लेकिन अफसरों की नजर अतिक्रमण पर नहीं गई। इसी के चलते तीन महीने में महिलाओं समेत सात लोगों की जान जा चुकी है। फिर भी जोखिम कम करने का काम नहीं हो रहा है।
छतुइया रेल फाटक के करीब दो सौ मीटर क्षेत्र में अतिक्रमण बढ़ने की शुरूआत उसी दिन से हो गई थी। जब बरेली-कासगंज के बीच ब्रॉडगेज लाइन अस्तित्व में आई। छतुइया गांव से फाटक की तरफ अतिक्रमण बढ़ा, तो वाहन चालक कस्तूरबा आवासीय स्कूल मोड़ से चकमा खा जाते हैं। स्कूल के सामने वाली पुरानी सड़क से ही बरेली-मथुरा हाईवे के वाहन गुजरा करते थे, लेकिन बाद में नई सड़क बनाकर उसे मोड़ दिया गया। इस प्वाइंट पर कोई ऐसा संकेतक भी नहीं लगा है। जो वाहन चालकों को समझने का मौका दे पाए। कमोबेश, ऐसा ही नजारा वेयर हाउस गोदाम से रेल फाटक के बीच देखने को मिलता है। इस ओर तो फाटक के नजदीक ही सड़क किनारे अतिक्रमण कर लिया गया है। ढाबा और खोखे के पास भारी वाहन और रोडवेज बसें खड़ी होने से कभी-कभी आवागमन भी सुचारु नहीं चल पाता।
ब्लैक स्पॉट के आसपास तीव्र मोड़ और अतिक्रमण होने की वजह निरंतर हो रहे हादसों की पर गौर करें तो तीन महीना पहले रेल फाटक के पास ही तेज रफ्तार ट्रक ने सवारियों से भरा टेंपो रौंद दिया था। टेंपो सवार महिला समेत तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बाद भी पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने ब्लैक स्पॉट की तरफ गौर नहीं किया, तो शनिवार को तेज रफ्तार कार सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई। कार सवार दातागंज के गांव कनेई निवासी विपिन अग्निहोत्री और उसकी मां रानी देवी को जान चली गई। कार सवार मृतक विपिन की पत्नी राधा और उसका मासूम बेटा आर्यन घायल हो गया। रेल फाटक के आसपास हादसों में घायलों की फेहरिस्त भी काफी लंबी है। बाइक फिसलने और टेंपो पलटने से दर्जनों राहगीर घायल हो चुके हैं।
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फांट की भूमि पर प्लॉटिंग ने उठाए सवाल
उझानी। बरेली-मथुरा हाईवे अस्तित्व में आया तो छतुइया रेल फाटक के आसपास नई सड़क बन जाने के बाद पुरानी सड़क पर आवागमन बंद हो गया। दोनों सड़क के बीच कुछ भूमि इलाके के लोगों की थी। शुरू में खेती होती रही, लेकिन निर्माण होने के बाद कुछ एक लोगों ने कब्जे भी करने शुरू कर दिए। बताते हैं कि फाटक के पास ही प्लॉटिंग भी शुरू हो गई है। प्लॉटिंग के दौरान सड़क किनारे की भूमि के कुछ हिस्से को भी दबा लिया गया है। पिछले दिनों राजस्व कर्मियों ने पैमाइश भी की थी। प्लॉटिंग करने वालों को थोड़ा पीछे हट जाने की हिदायत दी गई लेकिन पीडब्ल्यूडी ने अभी तक हकीकत पर गौर नहीं किया है। ऐसा ही चला तो आने वाले दिनों में ब्लैक स्पॉट पर हादसों में इजाफा होने से इंकार नहीं किया जा सकता।
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छतुइया रेल फाटक के करीब दो सौ मीटर क्षेत्र में अतिक्रमण बढ़ने की शुरूआत उसी दिन से हो गई थी। जब बरेली-कासगंज के बीच ब्रॉडगेज लाइन अस्तित्व में आई। छतुइया गांव से फाटक की तरफ अतिक्रमण बढ़ा, तो वाहन चालक कस्तूरबा आवासीय स्कूल मोड़ से चकमा खा जाते हैं। स्कूल के सामने वाली पुरानी सड़क से ही बरेली-मथुरा हाईवे के वाहन गुजरा करते थे, लेकिन बाद में नई सड़क बनाकर उसे मोड़ दिया गया। इस प्वाइंट पर कोई ऐसा संकेतक भी नहीं लगा है। जो वाहन चालकों को समझने का मौका दे पाए। कमोबेश, ऐसा ही नजारा वेयर हाउस गोदाम से रेल फाटक के बीच देखने को मिलता है। इस ओर तो फाटक के नजदीक ही सड़क किनारे अतिक्रमण कर लिया गया है। ढाबा और खोखे के पास भारी वाहन और रोडवेज बसें खड़ी होने से कभी-कभी आवागमन भी सुचारु नहीं चल पाता।
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ब्लैक स्पॉट के आसपास तीव्र मोड़ और अतिक्रमण होने की वजह निरंतर हो रहे हादसों की पर गौर करें तो तीन महीना पहले रेल फाटक के पास ही तेज रफ्तार ट्रक ने सवारियों से भरा टेंपो रौंद दिया था। टेंपो सवार महिला समेत तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बाद भी पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने ब्लैक स्पॉट की तरफ गौर नहीं किया, तो शनिवार को तेज रफ्तार कार सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई। कार सवार दातागंज के गांव कनेई निवासी विपिन अग्निहोत्री और उसकी मां रानी देवी को जान चली गई। कार सवार मृतक विपिन की पत्नी राधा और उसका मासूम बेटा आर्यन घायल हो गया। रेल फाटक के आसपास हादसों में घायलों की फेहरिस्त भी काफी लंबी है। बाइक फिसलने और टेंपो पलटने से दर्जनों राहगीर घायल हो चुके हैं।
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फांट की भूमि पर प्लॉटिंग ने उठाए सवाल
उझानी। बरेली-मथुरा हाईवे अस्तित्व में आया तो छतुइया रेल फाटक के आसपास नई सड़क बन जाने के बाद पुरानी सड़क पर आवागमन बंद हो गया। दोनों सड़क के बीच कुछ भूमि इलाके के लोगों की थी। शुरू में खेती होती रही, लेकिन निर्माण होने के बाद कुछ एक लोगों ने कब्जे भी करने शुरू कर दिए। बताते हैं कि फाटक के पास ही प्लॉटिंग भी शुरू हो गई है। प्लॉटिंग के दौरान सड़क किनारे की भूमि के कुछ हिस्से को भी दबा लिया गया है। पिछले दिनों राजस्व कर्मियों ने पैमाइश भी की थी। प्लॉटिंग करने वालों को थोड़ा पीछे हट जाने की हिदायत दी गई लेकिन पीडब्ल्यूडी ने अभी तक हकीकत पर गौर नहीं किया है। ऐसा ही चला तो आने वाले दिनों में ब्लैक स्पॉट पर हादसों में इजाफा होने से इंकार नहीं किया जा सकता।