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Budaun News: पहले सांसद थे बदन सिंह, अब 18वीं लोकसभा में प्रतिनिधित्व करेंगे आदित्य यादव
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बदायूं। पहली लोकसभा में बदन सिंह सांसद थे। अब 18वीं लोकसभा में आदित्य यादव प्रतिनिधित्व करेंगे। साल 1962 के चुनाव में भारतीय जन संघ ने इस सीट पर कब्जा किया था। अगले चुनाव में भी जनसंघ का कब्जा रहा।
साल 1971 में एक बार फिर कांग्रेस ने वापसी की, लेकिन अगले चुनाव में सीट नहीं बचा पाई थी। साल 1977 में भारतीय लोकदल विजयी रहा। साल 1980 और 1984 में यह सीट कांग्रेस की झोली में आई, लेकिन 1989 में बदायूं की जनता ने जनता दल के नेता शरद यादव को सांसद चुना। साल 1991 के पहली बार समाजवादियों के गढ़ में भाजपा ने अपना खाता खोला।
स्वामी चिन्मयानंद पहले भाजपा सांसद बने। साल 1996 से लेकर 2014 तक इस सीट पर समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा। सलीम इकबाल शेरवानी 1996 से 2009 तक लगातार चार बार इस सीट से जीते और उनके बाद मुलायम सिंह यादव के भतीजे धर्मेंद्र यादव दो बार सांसद रहे। साल 2019 के चुनाव में भाजपा ने यह सीट सपा से छीन ली। इस सीट पर संघमित्रा मौर्य सांसद बनीं। इस 2024 के चुनाव में सपा ने अपने गढ़ को बरकरार रखा। भाजपा के प्रत्याशी दुर्विजय शाक्य को हार का मुंह देखना पड़ा। सपा महा सचिव शिव पाल सिंह यादव के बेटे आदित्य यादव ने चुनाव जीता। (संवाद)
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इन नेताओं ने मत पाकर किया संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व
साल उम्मीदवार दल प्राप्त मत
2019 डॉ. संघमित्रा मौर्य भाजपा 5,11,352
2014 धर्मेंद्र यादव सपा 4,98,378
2009 धर्मेंद्र यादव सपा 2,33,744
2004 सलीम इकबाल शेरवानी सपा 2,65,713
1999 सलीम इकबाल शेरवानी सपा 2,36,496
1998 सलीम इकबाल शेरवानी सपा 2,64,583
1996 सलीम इकबाल शेरवानी सपा 1,98,065
1991 स्वामी चिन्मयानंद भाजपा 1,61,957
1989 शरद यादव जनता दल 2,25,712
1984 सलीम इकबाल शेरवानी कांग्रेस 1,83,524
1980 मोहम्मद असरार अहमद कांग्रेस 1,23,603
1977 ओमकार सिंह बीएलडी 2,31,556
1971 करन सिंह यादव कांग्रेस 90504
1667 ओमकार सिंह भाजपा 1,61,957
1662 ओमकार सिंह जेडी 2,25,712
1957 रघुवीर सहाय कांग्रेस 1,83,524
1952 बदन सिंह कांग्रेस (आई) 1,23,603
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साल 1971 में एक बार फिर कांग्रेस ने वापसी की, लेकिन अगले चुनाव में सीट नहीं बचा पाई थी। साल 1977 में भारतीय लोकदल विजयी रहा। साल 1980 और 1984 में यह सीट कांग्रेस की झोली में आई, लेकिन 1989 में बदायूं की जनता ने जनता दल के नेता शरद यादव को सांसद चुना। साल 1991 के पहली बार समाजवादियों के गढ़ में भाजपा ने अपना खाता खोला।
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स्वामी चिन्मयानंद पहले भाजपा सांसद बने। साल 1996 से लेकर 2014 तक इस सीट पर समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा। सलीम इकबाल शेरवानी 1996 से 2009 तक लगातार चार बार इस सीट से जीते और उनके बाद मुलायम सिंह यादव के भतीजे धर्मेंद्र यादव दो बार सांसद रहे। साल 2019 के चुनाव में भाजपा ने यह सीट सपा से छीन ली। इस सीट पर संघमित्रा मौर्य सांसद बनीं। इस 2024 के चुनाव में सपा ने अपने गढ़ को बरकरार रखा। भाजपा के प्रत्याशी दुर्विजय शाक्य को हार का मुंह देखना पड़ा। सपा महा सचिव शिव पाल सिंह यादव के बेटे आदित्य यादव ने चुनाव जीता। (संवाद)
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इन नेताओं ने मत पाकर किया संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व
साल उम्मीदवार दल प्राप्त मत
2019 डॉ. संघमित्रा मौर्य भाजपा 5,11,352
2014 धर्मेंद्र यादव सपा 4,98,378
2009 धर्मेंद्र यादव सपा 2,33,744
2004 सलीम इकबाल शेरवानी सपा 2,65,713
1999 सलीम इकबाल शेरवानी सपा 2,36,496
1998 सलीम इकबाल शेरवानी सपा 2,64,583
1996 सलीम इकबाल शेरवानी सपा 1,98,065
1991 स्वामी चिन्मयानंद भाजपा 1,61,957
1989 शरद यादव जनता दल 2,25,712
1984 सलीम इकबाल शेरवानी कांग्रेस 1,83,524
1980 मोहम्मद असरार अहमद कांग्रेस 1,23,603
1977 ओमकार सिंह बीएलडी 2,31,556
1971 करन सिंह यादव कांग्रेस 90504
1667 ओमकार सिंह भाजपा 1,61,957
1662 ओमकार सिंह जेडी 2,25,712
1957 रघुवीर सहाय कांग्रेस 1,83,524
1952 बदन सिंह कांग्रेस (आई) 1,23,603