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डा. सोनरूपा और डा. व्यथित का अभिनंदन
बदायूं।
Updated Sat, 03 Oct 2015 11:37 PM IST
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गांधी और शास्त्री की जयंती के अवसर काव्य कलश संस्था के तत्वावधान में शुक्रवार की रात काव्य गोष्ठी एवं अभिनंदन समारोह का आयोजन रस्तोगी धर्मशाला में किया गया। देर रात चले कार्यक्रम में कवियों ने रचनाएं सुनाकर श्रोताओं को आनंदित किया।
शुभारंभ नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष फात्मा रजा, विशिष्ट अतिथि मंजुल शंखधार एवं कार्यक्रम अध्यक्ष वरिष्ठ गीतकार नरेंद्र गरल द्वारा संयुक्त रूप से मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में साहित्यकार डॉ. रामबहादुर व्यथित एवं हाल ही में उप्र हिंदी संस्थान द्वारा हरिवंश राय बच्चन युवा गीतकार सम्मान से सम्मानित कवियत्री डॉ. सोनरूपा विशाल का अभिनंदन किया गया। दोनों विभूतियों को चेयरमैन रजा ने शाल ओढ़ाकर, प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। शायर सुरेंद्र नाज और युवा कवि अजीत सुवासित ने दोनों को अभिनंदन पत्र भेंट किया। इस मौके पर रजा ने कहा कि दोनों साहित्यकार हमारे जनपद के गौरव हैं। साहित्य ने सदैव लोगों को दिशा दी है।
...अगर मुजरिमों के तरफदार होंगे, तो हम भी यकीनन गुनहगार होंगे
बदायूं। अभिनंदन समारोह के बाद काव्य निशा का प्रारंभ हुआ। डॉ. रामबहादुर व्यथित ने अपने चिर परिचित अंदाज में सुनाया-
वतन की जान लिखता हूं, चमन की शान लिखता हूं,
लहू की रोशनाई से मैं हिंदुस्तान लिखता हूं।
कवियत्री डॉ. विशाल ने कुछ इस तरह अपनी बात की-
समझते थे जो उन्हें समझाया गया है,
हमें हमसे ही मिलवाया गया है।
वरिष्ठ गीतकार टिल्लन वर्मा ने सुनाया-
जो रचनाकार इंसा को बनाता है मिटाता है, उसे इंसान अक्सर जिंदगी में भूल जाता है।
गजलकार डा. शैलेंद्र कबीर ने कहा-
अगर मुजरिमों के तरफदार होंगे,
तो हम भी यकीनन गुनहगार होंगे।
कवि अशोक खुराना ने कहा-
आस्था के दीप लेकर जब गुजारी जिंदगी,
प्यार से रोशन हुई है तब हमारी जिंदगी
शायर सुरेंद्र नाज ने मां के महत्व पर फरमाया
मैं जब से हाथ में मां के कमाई देने लगा,
कदम-कदम में मुनाफा दिखाई देने लगा।
गोष्ठी में शायर हिलाल वजीरगंजवी, कवि कुलदीप अंगार, कामेश पाठक, हास्य कवि दुर्गेश नंदन वशिष्ठ, कार्यक्रम अध्यक्ष नरेंद्र गरल, संयोजक अनिल रस्तोगी ने काव्य पाठ किया। संस्था अध्यक्ष राहुल चौबे ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में डॉ. प्रतिभा मिश्रा, डॉ. अक्षत अशेष, वीरेंद्र धींगड़ा, डॉ. भास्कर शर्मा, दीपक सक्सेना, रविंद्र मोहन सक्सेना, डॉ. विष्णुप्रकाश मिश्र, डॉ. उमेश गौड़, अशोक सक्सेना, आयेंद्र प्रकाश, नरेश चन्द्र शंखधार, प्रदीप विशाल, जयवीर चंद्रवंशी, अमन शर्मा, सौरभ शंखधार, पंकज शर्मा, अजीत नारंग, सतेंद्र प्रधान, स्वतेश रस्तोगी, सचिन सूर्यवंशी, पवन, षट्वदन शंखधार उपस्थित रहे।
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शुभारंभ नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष फात्मा रजा, विशिष्ट अतिथि मंजुल शंखधार एवं कार्यक्रम अध्यक्ष वरिष्ठ गीतकार नरेंद्र गरल द्वारा संयुक्त रूप से मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में साहित्यकार डॉ. रामबहादुर व्यथित एवं हाल ही में उप्र हिंदी संस्थान द्वारा हरिवंश राय बच्चन युवा गीतकार सम्मान से सम्मानित कवियत्री डॉ. सोनरूपा विशाल का अभिनंदन किया गया। दोनों विभूतियों को चेयरमैन रजा ने शाल ओढ़ाकर, प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। शायर सुरेंद्र नाज और युवा कवि अजीत सुवासित ने दोनों को अभिनंदन पत्र भेंट किया। इस मौके पर रजा ने कहा कि दोनों साहित्यकार हमारे जनपद के गौरव हैं। साहित्य ने सदैव लोगों को दिशा दी है।
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...अगर मुजरिमों के तरफदार होंगे, तो हम भी यकीनन गुनहगार होंगे
बदायूं। अभिनंदन समारोह के बाद काव्य निशा का प्रारंभ हुआ। डॉ. रामबहादुर व्यथित ने अपने चिर परिचित अंदाज में सुनाया-
वतन की जान लिखता हूं, चमन की शान लिखता हूं,
लहू की रोशनाई से मैं हिंदुस्तान लिखता हूं।
कवियत्री डॉ. विशाल ने कुछ इस तरह अपनी बात की-
समझते थे जो उन्हें समझाया गया है,
हमें हमसे ही मिलवाया गया है।
वरिष्ठ गीतकार टिल्लन वर्मा ने सुनाया-
जो रचनाकार इंसा को बनाता है मिटाता है, उसे इंसान अक्सर जिंदगी में भूल जाता है।
गजलकार डा. शैलेंद्र कबीर ने कहा-
अगर मुजरिमों के तरफदार होंगे,
तो हम भी यकीनन गुनहगार होंगे।
कवि अशोक खुराना ने कहा-
आस्था के दीप लेकर जब गुजारी जिंदगी,
प्यार से रोशन हुई है तब हमारी जिंदगी
शायर सुरेंद्र नाज ने मां के महत्व पर फरमाया
मैं जब से हाथ में मां के कमाई देने लगा,
कदम-कदम में मुनाफा दिखाई देने लगा।
गोष्ठी में शायर हिलाल वजीरगंजवी, कवि कुलदीप अंगार, कामेश पाठक, हास्य कवि दुर्गेश नंदन वशिष्ठ, कार्यक्रम अध्यक्ष नरेंद्र गरल, संयोजक अनिल रस्तोगी ने काव्य पाठ किया। संस्था अध्यक्ष राहुल चौबे ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में डॉ. प्रतिभा मिश्रा, डॉ. अक्षत अशेष, वीरेंद्र धींगड़ा, डॉ. भास्कर शर्मा, दीपक सक्सेना, रविंद्र मोहन सक्सेना, डॉ. विष्णुप्रकाश मिश्र, डॉ. उमेश गौड़, अशोक सक्सेना, आयेंद्र प्रकाश, नरेश चन्द्र शंखधार, प्रदीप विशाल, जयवीर चंद्रवंशी, अमन शर्मा, सौरभ शंखधार, पंकज शर्मा, अजीत नारंग, सतेंद्र प्रधान, स्वतेश रस्तोगी, सचिन सूर्यवंशी, पवन, षट्वदन शंखधार उपस्थित रहे।
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